बिहार कैडर के 2011 बैच के IAS अधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. और राहुल कुमार को केंद्र सरकार में निदेशक स्तर की जिम्मेदारी मिली है. डॉ. त्यागराजन एस.एम. को सहकारिता मंत्रालय और राहुल कुमार को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में नियुक्त किया गया है. दोनों अधिकारियों ने बिहार में जिला प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, वित्त और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम किया है. दोनों को ही पांच साल के लिए दिल्ली भेजा गया है. ऐसे में आज हम आपको बिहार कैडर के इन दोनों IAS अधिकारियों की एजुकेशन से लेकर करियर की पूरी कहानी बताने जा रहे हैं.
दोनों अधिकारियों की सफलता की कहानी अलग-अलग है. डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने चिकित्सा की पढ़ाई करने के बाद पुलिस सेवा और फिर IAS तक का सफर तय किया. वहीं, राहुल कुमार ने जिला प्रशासन में काम करने के बाद ग्रामीण आजीविका, वित्त, कला-संस्कृति और ऊर्जा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालीं.
कौन हैं डॉ त्यागराजन एसएम?
डॉ. त्यागराजन एस.एम. की प्रशासनिक यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा देने वाली है. उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में पढ़ाई की, लेकिन आगे चलकर सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया. इसके बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होकर अपनी एक अलग पहचान बनाई.
कोयंबटूर में हुई पढ़ाई
डॉ. त्यागराजन एस.एम. मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले हैं. उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, उनका जन्म 20 दिसंबर 1984 को हुआ था. उन्होंने कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई पूरी की. मेडिकल की पढ़ाई के बाद उनके सामने चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने का विकल्प था. हालांकि, उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का फैसला किया. सिविल सेवा में आने की उनकी कोशिश ने उन्हें एक नए क्षेत्र में काम करने का अवसर दिया.
पहले IPS बने, फिर IAS में बनाई जगह
डॉ. त्यागराजन एस.एम. का सिविल सेवा का सफर भी काफी दिलचस्प रहा है. साल 2010 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए हुआ था. इसके बाद उन्होंने ओडिशा में सहायक पुलिस अधीक्षक यानी ASP के रूप में काम किया. पुलिस सेवा में काम करने के बाद उन्होंने दोबारा UPSC परीक्षा दी. साल 2011 में वो भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए और उन्हें बिहार कैडर मिला.
कई अहम पदों पर किया काम
बिहार में डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने कई अहम प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं. उन्होंने गया, नालंदा और दरभंगा जैसे जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम किया. गया में जिलाधिकारी रहते हुए उनका कार्यकाल स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कुछ पहलों के लिए भी चर्चा में रहा. इनमें वंडर ऐप और श्रवण श्रुति जैसी पहलों का उल्लेख किया जाता है. गया के अलावा त्यागराजन ने नालंदा और दरभंगा में भी जिलाधिकारी के रूप में काम किया. इन जिलों में उन्हें सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, स्थानीय समस्याओं के समाधान और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी मिली.
कौन हैं IAS राहुल कुमार?
राहुल कुमार की प्रशासनिक यात्रा भी कई अहम पड़ावों से होकर गुजरी है. उन्होंने बिहार के अलग-अलग जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम किया. इसके बाद ग्रामीण आजीविका, वित्त, कला-संस्कृति और ऊर्जा क्षेत्र में जिम्मेदारियां संभालीं. अब केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के निदेशक के रूप में उनकी नियुक्ति हुई है. उनके करियर की खास बात ये है कि उन्होंने प्रशासन के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए व्यापक अनुभव हासिल किया है.
शिक्षा में अर्थशास्त्र और हिंदी की पृष्ठभूमि
राहुल कुमार बिहार कैडर के 2011 बैच के IAS अधिकारी हैं. उपलब्ध प्रशासनिक करियर प्रोफाइल के अनुसार, उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि में अर्थशास्त्र और हिंदी का अध्ययन शामिल है. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), दिल्ली से अर्थशास्त्र में स्नातक और हिंदी में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की. उपलब्ध प्रोफाइल में दोनों डिग्रियों में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने का भी उल्लेख मिलता है.
गोपालगंज से पूर्णिया तक जिला प्रशासन में काम
राहुल कुमार ने बिहार के कई जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. उनके प्रशासनिक करियर में गोपालगंज, बेगूसराय और पूर्णिया जैसे जिलों का विशेष स्थान रहा है. लगातार अलग-अलग जिलों में काम करने से अधिकारियों को स्थानीय जरूरतों, प्रशासनिक चुनौतियों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की व्यापक समझ मिलती है.
ग्रामीण आजीविका परियोजना में निभाई अहम भूमिका
जिला प्रशासन के बाद राहुल कुमार को ग्रामीण विकास से जुड़े क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला. मई 2022 से जनवरी 2024 तक उन्होंने बिहार ग्रामीण आजीविका परियोजना के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी यानी CEO के रूप में काम किया. ग्रामीण आजीविका से जुड़ी परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, आजीविका के अवसर विकसित करने और लोगों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने जैसे लक्ष्यों को आगे बढ़ाना होता है. इस क्षेत्र में काम करने के लिए सरकारी योजनाओं के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों की जरूरतों और परियोजनाओं के प्रबंधन को समझना जरूरी है.
वित्त और कला-संस्कृति विभाग में भी किया काम
राहुल कुमार का प्रशासनिक अनुभव केवल जिला प्रशासन और ग्रामीण विकास तक सीमित नहीं रहा. उपलब्ध करियर विवरण के मुताबिक, जनवरी से अक्टूबर 2024 के बीच उन्होंने कला, संस्कृति एवं युवा विभाग में पुरातत्व और संग्रहालय से संबंधित जिम्मेदारियां संभालीं. इस तरह के विभागों में सांस्कृतिक विरासत, पुरातात्विक महत्व के स्थलों और संग्रहालयों से जुड़े प्रशासनिक विषय महत्वपूर्ण होते हैं. इसके बाद अक्टूबर 2024 से मार्च 2025 तक उन्होंने बिहार सरकार के वित्त विभाग में विशेष सचिव के रूप में जिम्मेदारी निभाई.
बिहार से केंद्र तक, प्रशासनिक अनुभव का नया अध्याय
डॉ. त्यागराजन एस.एम. और राहुल कुमार को केंद्र सरकार में निदेशक स्तर की जिम्मेदारी मिलना उनके प्रशासनिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है. दोनों अधिकारियों ने बिहार में जिला प्रशासन से लेकर तमाम विभागों तक काम करते हुए अनुभव हासिल किया है. एक अधिकारी ने मेडिकल की पढ़ाई के बाद IPS और IAS तक का सफर तय किया, जबकि दूसरे अधिकारी ने जिला प्रशासन से आगे बढ़कर ग्रामीण आजीविका, वित्त और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम किया. अब सहकारिता मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में उनकी नई भूमिकाएं उनके अनुभव को केंद्र सरकार के स्तर पर इस्तेमाल करने का अवसर देंगी.
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