- तृणमूल कांग्रेस की चुनाव रणनीति बनाने वाली कंपनी I-PAC ने अगले बीस दिनों के लिए अपने काम को बंद कर दिया है.
- I-PAC तृणमूल कांग्रेस के लिए फील्ड वर्क और बूथ स्तर पर डेटा संग्रहण का काम करती रही है.
- कंपनी के बंद होने से चुनाव के दिन वोटरों को बूथ तक पहुंचाने में TMC को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में रोज कुछ ना कुछ घट रहा है. इसमें सबसे ताजा है तृणमूल कांग्रेस का इलेक्शन कैंपेन देखने वाली पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC का काम-काज बंद करना. ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रणनीति बनाने वाली कंपनी आईपैक अगले 20 दिनों तक बंद कर दी गई है. आईपैक ने अपने कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया है, जबकि ममता बनर्जी ने कहा है कि आईपैक के किसी भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी, सबको तृणमूल कांग्रेस वेतन देगी. अब सबसे बड़ा सवाल है कि यदि आईपैक की सुविधा तृणमूल कांग्रेस को नहीं मिलती है तो क्या होगा? कितना नुकसान हो सकता है?
टीएमसी के लिए क्या काम करती थी I-PAC
इसके लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आईपैक तृणमूल कांग्रेस के लिए क्या करती रही है? आईपैक तृणमूल कांग्रेस के लिए फील्ड वर्क करती है, हर बूथ से डाटा इकट्ठा करना, फिर उस आधार पर चुनाव प्रचार के लिए रणनीति बनाना. तृणमूल कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि यह काम हो चुका है. मगर सबसे दिक्कत आने वाली है चुनाव के दिन. क्योंकि उस दिन हर बूथ पर लोगों को ले जाकर वोट डलवाने के काम में दिक्कत हो सकती है.
बंगाल के किस मोहल्ले में टीएमसी के कितने वोटर, आईपैक के पास इसका डाटा
आईपैक के पास इस बात के भी आंकड़े हैं कि किस पारा (मोहल्ले) में कौन तृणमूल कांग्रेस का वोटर है या पार्टी से सहानुभूति रखता है. अब इस सब में खलल पड़ने की संभावना जताई जा रही है. 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण का चुनाव प्रचार मंगलवार को समाप्त होने जा रहा है. लेकिन 29 अप्रैल को होने वाली दूसरे चरण की वोटिंग के लिए अभी एक हफ्ते से ज्यादा का समय बाकी है. ऐसे में यह चुनाव के लिए लिहाज से सबसे अहम समय है.

टीएमसी नेता ने बताया- आईपैक पर बढ़ गई थी पार्टी की निर्भरता
तृणमूल कांग्रेस को यहां पर आईपैक की कमी खलेगी. तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने यह भी बताया कि पार्टी की आईपैक पर निर्भरता कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी और हर चीज के लिए पार्टी आईपैक पर ही विश्वास करने लगी थी. जैसे कि किसी भी उम्मीदवार के लिए फीडबैक हो, पार्टी अपने कार्यकर्ताओं से अधिक आईपैक पर निर्भर हो गई थी, जिससे तृणमूल कांग्रेस के कई नेता नाराज भी हैं, मगर वो कुछ नहीं कर सकते.
आईपैक पूरी तरह से बंद नहीं
पश्चिम बंगाल में कोई भी योजना लागू करना हो, सरकार भी आईपैक पर ही निर्भर रही. क्योंकि यही संस्था सब कुछ डिजाइन कर रही थी. लेकिन तृणमूल कांग्रेस के और नेता ने कहा कि ऐसा नहीं है आईपैक पूरी तरह से बंद हो गया है या किसी कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है. आईपैक की कोर टीम अभी भी तृणमूल कांग्रेस के लिए काम करेगी और कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने के कहा गया है. मगर जिस समन्वय के साथ काम होता था, उसमें परेशानी हो जाएगी.
वोटिंग के दिन पता चलेगा आईपैक के पैकअप का असर
कुल मिलाकर आईपैक के पैकअप से तृणमूल कांग्रेस को नुकसान तो है मगर उतना नहीं जिसकी लोग उम्मीद लगा रखे हैं. वोटिंग के दिन इसका कितना असर पड़ता है, उसी पर निर्भर करेगा कि कितना नुकसान होता है. बाकी डेटा तो सबके कम्प्यूटर में है ही, जो कहीं से भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
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