- असम CM हिमंता बिस्वा सरमा और बंगाल के सुवेंदु अधिकारी भाजपा के नए प्रभावशाली क्षेत्रीय नेता बनकर उभरे हैं.
- योगी, फडणवीस जैसे नेता अपने राज्यों में पार्टी को मजबूत कर राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ समन्वय बना रहे हैं.
- सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को दो बार हराकर भाजपा की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत और असम में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक नई राजनीतिक धारा साफ दिखाई देने लगी है. इस धारा के केंद्र में वे नेता हैं जिन्होंने न सिर्फ अपने-अपने राज्यों में पार्टी को मजबूत किया है, बल्कि ‘ब्रांड मोदी' के साथ तालमेल बिठाते हुए संगठन के भविष्य को भी दिशा दी है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर अपने चुनावी कौशल और रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया है. वहीं पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी का कद लगातार बढ़ा है, जहां उन्होंने ममता बनर्जी को लगातार दूसरी बार हराकर खुद को राज्य की राजनीति में भाजपा के सबसे मजबूत चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया है. इन नतीजों के बाद पार्टी के भीतर उन नेताओं की चर्चा तेज हो गई है जिन्हें 2029 के मिशन के अहम सिपहसलार के रूप में देखा जा रहा है.
इस सूची में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जैसे नाम प्रमुख हैं. ये नेता अपने राज्यों में पार्टी का आधार मजबूत कर रहे हैं और साथ ही केंद्रीय नेतृत्व के साथ पूरी तरह समन्वय में काम कर रहे हैं.
यह भी पढ़ें- तमिलनाडु में विजय की TVK को समर्थन देगी कांग्रेस, शपथ ग्रहण में शामिल हो सकते हैं राहुल गांधी
बदलता हुआ ‘क्षत्रप' का अर्थ
भारतीय राजनीति में ‘क्षत्रप' शब्द का एक खास अर्थ रहा है. कांग्रेस के दौर में 1960 से 1990 तक कई ऐसे क्षेत्रीय नेता उभरे जिन्होंने अपनी-अपनी राज्यों में स्वतंत्र राजनीतिक ताकत कायम की और कई बार केंद्रीय नेतृत्व को भी चुनौती दी. लेकिन बीजेपी में इस अवधारणा का स्वरूप थोड़ा अलग रहा है.
1990 और 2000 के दशक में बीजेपी में भी भैरों सिंह शेखावत, कल्याण सिंह, उमा भारती और वसुंधरा राजे जैसे नेताओं ने अपनी मजबूत क्षेत्रीय पहचान बनाई, लेकिन 2014 के बाद पार्टी के ढांचे में बड़ा बदलाव आया. ‘ब्रांड मोदी' के उदय के साथ पार्टी ने एक केंद्रीकृत नेतृत्व मॉडल अपनाया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा आधार बन गया.
हाईकमांड के साथ समन्वय
वर्तमान में बीजेपी के राज्य स्तरीय नेता अपनी भूमिका को ‘स्वतंत्र शक्ति केंद्र' के बजाय ‘संगठन के विस्तारक' के रूप में निभा रहे हैं. पिछले एक दशक में ऐसा कोई बड़ा उदाहरण नहीं मिला है जब किसी राज्य नेता ने खुले तौर पर केंद्रीय नेतृत्व को चुनौती दी हो.
यह भी पढ़ें- कोलकाता के न्यू मार्केट में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर लेकर निकाली विजय यात्रा, लगे तोड़फोड़ के आरोप
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान को लंबे कार्यकाल के बाद केंद्र में लाना हो, गुजरात में पूरी कैबिनेट बदलना हो या उत्तराखंड में हार के बावजूद धामी को दोबारा मौका देना... ऐसे फैसले बताते हैं कि पार्टी का नियंत्रण पूरी तरह केंद्रीय नेतृत्व के पास है.
नए दौर के पांच चेहरे
1. योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश)
योगी आदित्यनाथ को वर्तमान समय में बीजेपी का सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय चेहरा माना जाता है. उनकी स्वतंत्र हिंदुत्व छवि और मजबूत जनाधार उन्हें अन्य मुख्यमंत्रियों से अलग बनाता है. अगर वे अगला विधानसभा चुनाव जीतकर हैट्रिक बनाते हैं, तो उनकी राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका और मजबूत हो सकती है.
2. देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र)
फडणवीस को बीजेपी का आधुनिक प्रशासनिक चेहरा माना जाता है. जटिल सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों वाले महाराष्ट्र में उन्होंने संतुलन और विकास की राजनीति के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है. 2029 के लोकसभा चुनाव में राज्य का प्रदर्शन उनकी नेतृत्व क्षमता की बड़ी परीक्षा होगा.
3. हिमंता बिस्वा सरमा (असम)
सरमा ने न सिर्फ असम बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व में बीजेपी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. एक कुशल रणनीतिकार और आक्रामक नेता के रूप में उनकी पहचान है. कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद उन्होंने संगठन को नई ऊर्जा दी है.
यह भी पढ़ें- बंटा हिंदू बंगाली वोट, SIR की चोट-'मिनी इंडिया' भवानीपुर से मनोरंजन भारती ने बताए ममता की हार के 5 कारण
4. सम्राट चौधरी (बिहार)
बिहार में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी का कार्यकाल अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन उन्हें पार्टी के भविष्य के क्षत्रप के रूप में देखा जा रहा है. उन्हें प्रशासन और संगठन के बीच बेहतर तालमेल साबित करना होगा.
5. सुवेंदु अधिकारी (पश्चिम बंगाल)
सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में बीजेपी के उभरते हुए सबसे बड़े चेहरे हैं. ममता बनर्जी को लगातार दो बार चुनावी हार देने के बाद उनका कद काफी बढ़ गया है. वे राज्य में भाजपा की ऐतिहासिक सफलता के प्रमुख सूत्रधार माने जा रहे हैं.
‘किंग' नहीं, मजबूत ‘वजीर'
आज की बीजेपी में क्षेत्रीय नेता पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, बल्कि उनकी भूमिका बदल गई है. वे अब ‘किंग' के बजाय ‘वजीर' की भूमिका में अधिक दिखाई देते हैं, जो अपने राज्य में मजबूत हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय नेतृत्व के साथ एकजुट होकर काम करते हैं.
दरअसल, बीजेपी का कैडर आधारित ढांचा और वैचारिक अनुशासन किसी भी नेता को पार्टी से बड़ा बनने की अनुमति नहीं देता. यही कारण है कि नए क्षत्रप पार्टी के ढांचे के भीतर रहते हुए अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं. आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नए चेहरे बीजेपी के राष्ट्रीय विस्तार और 2029 के लक्ष्य को हासिल करने में कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं