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हरियाणा के तीनों लालों के 'लाल' BJP में, जानें बंसीलाल की बहू किरण चौधरी ने क्यों थामा बीजेपी का हाथ

कांग्रेस से इस्तीफे में किरण चौधरी ने आरोप लगाया कि हरियाणा कांग्रेस एक आदमी की पार्टी बन गई है. उन्होंने बिना नाम लिए हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर इशारा किया. पार्टी को व्यक्तिगत जागीर के रूप में चलाया जा रहा है. मेरे जैसे ईमानदार लोगों की पार्टी में कोई जगह नहीं है.

हरियाणा के तीनों लालों के 'लाल' BJP में, जानें बंसीलाल की बहू किरण चौधरी ने क्यों थामा बीजेपी का हाथ
Haryana News: किरण चौधरी ने आखिर क्यों छोड़ी कांग्रेस....

हरियाणा (Haryana News) के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की बहू किरण चौधरी (Kiran Choudhary ) और उनकी बेटी व पूर्व सासंद श्रुति चौधरी आज बीजेपी में शामिल हो गई हैं. इसके साथ ही बीजेपी के साथ एक अजब संयोग भी बन गया. दरअसल, हरियाणा के तीनों लालों के 'लाल' बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. यानी देवीलाल, भजनलाल, बंसीलाल की पीढ़ियां अब बीजेपी से जुड़ गई हैं. भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई, रेणुका बिश्नोई और भव्य बिश्नोई बीजेपी में हैं ही और देवीलाल के बेटे रणजीत चौटाला भी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. एक बंसीलाल का परिवार ही बचा था तो उनकी बहू किरण चौधरी और पोती श्रुति चौधरी भी आज बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं. बता दें कि हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस विधायक दल की नेता रह चुकीं और तोशाम की विधायक किरण चौधरी और उनकी पूर्व सांसद बेटी श्रुति चौधरी ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी संग बढ़ रही हैं. 

कांग्रेस में प्रतिष्ठित लोगों को नहीं मिल रहा सम्मान : सीएम नायब सैनी

हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस में परिवारवाद चरम पर है. कांग्रेस में जो प्रतिष्ठित लोग हैं,जिन्हें सम्मान नहीं मिल रहा उन्हें अब कांग्रेस में घुटन हो रही है. भूपेंद्र सिंह हुड्डा बेटे के लिए लगे हुए हैं. कांग्रेस में प्रतिष्ठित लोगों को किनारे लगा दिया गया है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस से कई बड़े नेता जाने वाले हैं. कांग्रेस में एक ही परिवार की चलती है. बड़े नेताओं की बलि दी जा रही है. झूठ बोलो और भाग जाओ की रणनीति कांग्रेस अपना रही है.

40 साल बाद आखिर क्यों छोड़नी पड़ी कांग्रेस

रिपोर्ट्स के मुताबिक- किरण चौधरी ने मल्लिकार्जुन खरगे को भेजे अपने इस्तीफे में आरोप लगाया कि हरियाणा कांग्रेस एक आदमी की पार्टी बन गई है. उन्होंने बिना नाम लिए हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर इशारा किया. पार्टी को व्यक्तिगत जागीर के रूप में चलाया जा रहा है. मेरे जैसे ईमानदार लोगों की पार्टी में कोई जगह नहीं है. मेरी आवाज दबाकर मुझे अपमानित किया गया. मेरे खिलाफ साजिश रजी गई, हालांकि मेरा उद्देश्य हमेशा राज्य और देश के लोगों की सेवा करना रहा है. उन्होंने त्यागपत्र में लिखा कि मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रही हूं. मैं पिछले 4 दशकों से कांग्रेस पार्टी की एक वफादार सदस्य रही हूं. इन 40 सालों में मैंने पार्टी और लोगों के लिए जीवन समर्पित किया जिनका मैं प्रतिनिधित्व करती हूं. मैं आधुनिक हरियाणा के निर्माता बंसीलाल और मेरे स्वर्गीय पति चौधरी सुरेंद्र सिंह की समृद्ध विरासत का भी प्रतिनिधित्व करती हूं.  

बेटी ने लगाया दुर्व्यवहार का आरोप

वहीं किरण चौधरी की बेटी और पूर्व सांसद श्रुति चौधरी ने भी हरियाणा कांग्रेस में दुर्व्यवहार का आरोप लगाया. श्रुति ने कहा कि हरियाणा में कांग्रेस पार्टी स्वार्थी हो गई है और अब मेरे लिए आगे बढ़ने का समय है ताकि मैं अपने लोगों के हितों को बनाए रख सकूं.

श्रुति की टिकट काटकर कांग्रेस भी नहीं जीत पाई चुनाव, लगाया भीतरघात का आरोप

किरण चौधरी कांग्रेस की कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष हैं और तोशाम से विधायक है. उनकी बेटी श्रुति भिवानी महेंद्रगढ़ सीट से सांसद रह चुकी हैं. बताया जा रहा है कि नाराजगी इस बात की भी है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने श्रुति का टिकट काटकर राव दान सिंह को दिलवाया. हालांकि भिवानी से राव दान सिंह चुनाव नहीं जीत पाए.  राव दान सिंह ने भितरखात का आरोप भी किरण पर लगाया था, वहीं किरण का कहना था कि टिकट का बंटवारा सही होता तो इस सीट से कांग्रेस जीत सकती थी. इसी बात की नाराजगी के चलते दोनों के बीच खाई बढ़ गई. किरण चौधरी का जन्म भी दिल्ली कैंट में हुआ था.वह हरियाणा के झज्जर के गोछी गांव के ब्रिग्रेडियर आत्मा सिंह अहलावत और सरला देवी की बेटी हैं. वह वकील और राजनीतिज्ञ हैं. उनके दो भाई बहन हैं, अशोक चौधरी और अनुराधा चौधरी. 

दिल्ली की राजनीति से भी रहा है किरण चौधरी का खास कनेक्शन

किरण चौधरी दिल्ली से भी चुनाव लड़ चुकी है. 1993 में उन्होंने दिल्ली कैंट विधानसभा से चुनाव लड़ा था, जो कि वह हार गई थीं. इसके बाद उन्होंने 1998 में वहीं से चुनाव लड़ा जो कि वह जीत गई थीं. 1998 से 2003 तक वह दिल्ली विधानसभा की उपाध्यक्ष रहीं. 2003 में भी उन्होंने दिल्ली कैंट से चुनाव लड़ा जिसे वह हार गई थीं. 2004 में वह हरियाणा से कांग्रेस की ओर से राज्यसभा का चुनाव हार गईं. 2005 तोशाम से विधायकी का उपचुनाव वह जीत गईं. 2019 तक वह तोशाम से लगातार विधायकी का चुनाव जीत रही हैं.  किरण चौधरी का जन्म भी दिल्ली कैंट में हुआ था. वह हरियाणा के झज्जर के गोछी गांव के ब्रिग्रेडियर आत्मा सिंह अहलावत और सरला देवी की बेटी हैं. वह वकील और राजनीतिज्ञ हैं. उनके दो भाई बहन हैं, अशोक चौधरी और अनुराधा चौधरी. 

राज्यसभा चुनाव के बाद ही बीजेपी में जाने की लगने लगी थी अटकलें

हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले भी किरण चौधरी के बीजेपी में जाने की अटकलें थीं, लेकिन तब उन्हें श्रुति चौधरी को भिवानी-महेंद्रगढ़ से टिकट मिलने की उम्मीद थी, जो बाद में टूट गई. उन्हें सैलजा-किरण-रणदीप गुट की मजबूत नेता माना जाता है. साथ ही किरण चौधरी एक जाट नेता भी हैं, जिसके जरिए बीजेपी हरियाणा में जाट वोटरों को साधने की भी जुगत में है. पिछले दिनों राज्यसभा में अजय माकन की हार का जिम्मेदार हुड्डा ग्रुप की ओर से किरण चौधरी को ठहराया गया, जिसमें बीजेपी को फायदा हुआ था. तभी से उनके बीजेपी में जाने की अटकलें तेज हो गई थीं. ये भी कहा जा रहा है कि बीजेपी में उनकी एंट्री का श्रेय पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर को भी जाता है.

बंसीलाल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं किरण

बता दें कि किरण चौधरी के पति 59 वर्षीय सुरेंद्र सिंह की उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में आपातकालीन लैंडिंग के दौरान एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में प्रसिद्ध उद्योगपति और ऊर्जा मंत्री ओम प्रकाश जिंदल के साथ मृत्यु हो गई थी. बंसीलाल के परिवार की विरासत बहू किरण चौधरी और बेटी श्रुति चौधरी ही आगे बढ़ा रहे हैं.

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