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हरिद्वार में सूखी गंगा की धारा, लोगों में खजाना ढूंढने की मची होड़, जानिए क्यों हुआ ऐसा

हर की पौड़ी पर गंगाजल की पर्याप्त मात्रा के लिए यूपी सिंचाई विभाग की ओर से बांध लगाने का काम किया जा रहा है, अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही हर की पौड़ी पर पर्याप्त मात्रा में गंगा स्नान के लायक पानी उपलब्ध कराया जाएगा.

हरिद्वार में सूखी गंगा की धारा, लोगों में खजाना ढूंढने की मची होड़, जानिए क्यों हुआ ऐसा
साफ सफाई के लिए गंग नहर के पानी को रोक दिया जाता है.
  • हर साल दशहरे से दीपावली तक यूपी सिंचाई विभाग गंग नहर का पानी रोककर गंगा की सफाई और मेंटेनेंस करता है
  • जलस्तर कम होने से सिक्के बीनने वाले लोग नदी के निचले हिस्से से सिक्के और धातु सामग्री निकालते हैं
  • सिक्के बीनना गरीब परिवारों के लिए आजीविका का साधन बन गया है, जिससे वे अपने छोटे खर्चों को पूरा करते हैं

हर साल दशहरे से लेकर दीपावली तक यूपी सिंचाई विभाग द्वारा गंग नहर के पानी को रोक दिया जाता है. इस दौरान गंगा की साफ सफाई और मेंटेनेंस का काम चलता है. गंगा में सालभर श्रद्धालु आस्था के साथ सिक्के चढ़ाते हैं. कोई मनोकामना पूरी होने की उम्मीद में तो कोई पूजा पाठ के दौरान गंगा में सिक्का अर्पित करता है. सामान्य दिनों में गंगा की तेज धारा में इन सिक्कों को तलाशना आसान नहीं होता, लेकिन गंग नहर बंद होने के बाद जलस्तर कम होने और कई जगहों पर नदी का निचला हिस्सा दिखाई देने से सिक्के बीनने वालों को मौका मिल जाता है. यही वजह है कि इन दिनों बड़ी संख्या में लोग गंगा के अलग-अलग हिस्सों में सिक्के तलाशते नजर आ रहे हैं. सिक्कों के अलावा इन लोगों को सोने, चांदी, पीतल और कई धातुओं की वस्तुएं भी मिल जाती हैं.

लोगों के लिए गंग नहर की बंदी केवल पानी का प्रवाह रुकने का समय नहीं, बल्कि सालभर में मिलने वाला एक ऐसा अवसर है, जिसका वे इंतजार करते हैं. गंगा में उतरकर सिक्के इकट्ठा करना इनकी आजीविका का साधन बन गया है. दिनभर की मेहनत के बाद जितने सिक्के मिल जाते हैं, उनसे होने वाली कमाई से घर के छोटे मोटे खर्च पूरे करने में मदद मिलती है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह कमाई बहुत बड़ी मानी जाती है.

हर की पौड़ी पर गंगा में सिक्के बिनने के लिए आए स्थानीय युवक अमित कुमार ने बताया कि गंगा बंदी के दौरान उन्हें सिक्कों के अलावा सोना और चांदी भी मिलता है. हरिद्वार में गंगा बंदी के दौरान करीब एक हजार लोग सिक्के बिनने के लिए आते हैं. यह सब कृपा मां गंगा की है, उन्हें भी एक चांदी की अंगूठी मिली है.

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गंगाजी सूखने के बाद हर की पौड़ी सूनी पड़ी हुई है, लेकिन सिक्के बिनने वाले लोगों की भीड़ जमा है. इन्हें गंगा से कई कीमती धातुएं मिल जाती है. ये लोग गंगा बंदी का इंतजार करते हैं. देश के कई राज्यों से लोग यहां सिक्के बिनने के लिए हर साल आते हैं.

गंगा को मोक्षदायिनी और जीवनदायिनी कहा जाता है. करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होने के साथ ही गंगा अनेक लोगों की रोजी रोटी का सहारा भी है. सामान्य दिनों में घाटों पर पूजा पाठ, फूल प्रसाद और अन्य छोटे मोटे कामों से लोगों को रोजगार मिलता है, जबकि गंगनहर की बंदी के दौरान सिक्के बीनने वाले लोगों के लिए नदी का सूखा होना कमाई का जरिया बन जाता है.

पंडित संतोष पांडे ने बताया कि मां गंगा के न होने से हर की पौड़ी पर काम बहुत कम हो गया है. वार्षिक गंगा बंदी के बाद उनका काम तो नहीं चल रहा है लेकिन सिक्के बिनने वालों के लिए मां गंगा किसी वरदान से कम नहीं है. मां गंगा हरिद्वार में सभी का कल्याण करती हैं, इसलिए गंगा सूखने के बाद भी कई लोगों की आजीविका चला रही हैं.

पंडित दीप अधिकारी ने भी गंगा बंदी के कारण श्रद्धालु न होने के चलते चिंता व्यक्त की और बताया कि मां गंगा जब हर की पौड़ी पर बहती हैं तो पंडित, तीर्थ पुरोहित, फूल, प्रसाद और माला बेचने वालों की रोजी रोटी चलाती हैं. लेकिन जब गंगा बंदी होती है तो गरीब लोगों का भी घर चलाती हैं. लेकिन वर्तमान समय में हरकी पैडी से रौनक गायब है.

वहीं हर की पौड़ी पर गंगाजल की पर्याप्त मात्रा के लिए यूपी सिंचाई विभाग की ओर से बांध लगाने का काम किया जा रहा है, अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही हर की पौड़ी पर पर्याप्त मात्रा में गंगा स्नान के लायक पानी उपलब्ध कराया जाएगा.

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