- दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का पहला चरण यानी ग्रैप 1 लागू कर दिया गया है
- ग्रैप 1 में तंदूर में कोयला और लकड़ी का उपयोग बंद कर करना होगा
- डीजल जनरेटर का सामान्य बिजली आपूर्ति के लिए उपयोग प्रतिबंधित होगा.
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ग्रैप 1 लागू कर दिया गया है. दिल्ली सरकार के पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसकी जानकारी दी है. GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान. यह एक ऐसा सिस्टम है, जिसे दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने पर लागू किया जाता है. प्रदूषण के स्तर के हिसाब से इसके चार चरण होते हैं.
- GRAP-1: AQI 201 से 300 के बीच (खराब)
- GRAP-2: AQI 301 से 400 के बीच (बहुत खराब)
- GRAP-3: AQI 401 से 500 के बीच (गंभीर)
- GRAP-4: AQI 450 से ऊपर (अत्यंत गंभीर)
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GRAP-1 में क्या-क्या बदलेगा?
GRAP-1 लागू होने के बाद प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्ती बढ़ेगी. जैसे कि होटल, रेस्टोरेंट और खुले खाने-पीने की दुकानों में तंदूर के लिए कोयला और लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. वहां केवल गैस, बिजली या साफ ईंधन वाले उपकरणों का उपयोग होगा. डीजल जनरेटर का इस्तेमाल सामान्य बिजली सप्लाई के लिए नहीं किया जा सकेगा. इन्हें केवल जरूरी या आपात स्थिति में ही चलाने की अनुमति होगी.
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण को लेकर क्या कहा?
पर्यावरण मंत्री सिरसा ने प्रदूषण पर कहा, "दिल्ली कई सालों से गंभीर एयर पॉल्यूशन से जूझ रही है. पिछली सरकार बहाने बनाती रही, लेकिन हमने प्रदूषण से निपटने के लिए शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म, दोनों तरह के उपाय अपनाए हैं. हमारी कोशिशों में जनता की भागीदारी ने अहम भूमिका निभाई है. हम प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार के साथ मिलकर काम करते हुए 11-पॉइंट एक्शन प्लान लागू कर रहे हैं. हमारा फोकस धूल कम करने, इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने, गाड़ियों से होने वाले एमिशन को कंट्रोल करने और प्रदूषण के लोकल सोर्स की पहचान करने पर है."
पार्किंग चार्ज होगा दोगुना
उन्होंने कहा, "हमने आज ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज I लागू किया. पिछले दो-तीन सालों में पहली बार, हम सीजन के बाद के स्टेज में GRAP लागू कर पाए हैं. 1 नवंबर से, बिना वैलिड पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट वाली गाड़ियों को फ्यूल नहीं दिया जाएगा. मेट्रो पार्किंग सुविधाओं को छोड़कर, पूरी दिल्ली में पार्किंग चार्ज दोगुना कर दिया जाएगा. हम MCD और दिल्ली सरकार के ऑफिसों के लिए काम के घंटे अलग-अलग करेंगे और गाड़ियों की आवाजाही कम करने के लिए वर्क-फ्रॉम-होम की व्यवस्था भी करेंगे."
सिरसा ने कहा, "बाहर कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ के कामों पर रोक रहेगी. खुले में तोड़-फोड़ का काम 30 नवंबर तक बंद रहेगा. खुले में जलाने पर भी पूरी तरह से रोक है. हमने धूल के प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए पूरी दिल्ली में 608 एंटी-स्मॉग गन और 1,150 मिस्ट-स्प्रे यूनिट लगाई हैं. कंस्ट्रक्शन से जुड़े प्रदूषण पर नजर रखने के लिए एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) बनाया गया है. हम गाड़ियों से होने वाले एमिशन को कम करने के लिए AI-बेस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का भी इस्तेमाल कर रहे हैं."
क्लाउड सीडिंग कर रहे: दिल्ली सरकार
उन्होंने कहा, "हम लोकल प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान करने और टारगेटेड एक्शन लेने के लिए IIT मद्रास के साथ टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं. हमारे 'वायु रक्षक' 250 वार्डों में ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे हैं, प्रदूषणक्लाउड सीडिंग के सोर्स की पहचान कर रहे हैं और ज़रूरी एक्शन के लिए अधिकारियों को नियमों के उल्लंघन की रिपोर्ट कर रहे हैं. हमने लगाए गए पेड़ों की ग्रोथ और हेल्थ पर नज़र रखने के लिए उन्हें जियो-टैग भी किया है. इसके अलावा, हमने कमज़ोर तबके की मदद करने की अपनी कोशिशों के तहत हीटर बांटे हैं और अटल कैंटीन खोली हैं. हम IIT कानपुर के साथ पर काम कर रहे हैं और उम्मीद है कि आर्टिफिशियल बारिश से दिल्ली में प्रदूषण का लेवल कम करने में मदद मिल सकती है."
मंत्री सिरसा ने कहा, "मैं दिल्ली के लोगों से अपील करता हूं कि वे प्रदूषण के खिलाफ इस लड़ाई में एक्टिव रूप से हिस्सा लें. खुले में जलाने से बचें, कारपूलिंग अपनाएं और सरकार के प्रदूषण कंट्रोल के तरीकों का सपोर्ट करें. प्रदूषण से अकेले सरकार नहीं निपट सकती. दिल्ली की हवा को साफ बनाने के लिए लोगों का हिस्सा लेना जरूरी है."
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