- दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ नई मुहिम, प्रदर्शन के आधार पर होगा भुगतान
- 40 लोकेशन पर वायु गुणवत्ता सुधारने की तैयारी
- स्मॉग टावर के बाद अब नई रणनीति, दिल्ली सरकार का बड़ा प्रयोग
दिल्ली सरकार ने बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 104 करोड़ रुपये की नई योजना तैयार की है. इसके तहत राजधानी के 40 प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट्स पर निजी कंपनियों को हवा की गुणवत्ता सुधारने की जिम्मेदारी दी जाएगी. योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कंपनियों को भुगतान केवल तभी मिलेगा वे सरकार की शर्तों पर खरी उतरेंगी. कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, खान मार्केट, प्रमुख बस अड्डों और अस्पतालों समेत कई व्यस्त क्षेत्रों को इस परियोजना में शामिल किया गया है. यह दिल्ली के प्रदूषण नियंत्रण का अब तक का सबसे बड़ा परिणाम-आधारित प्रयोग माना जा रहा है.
इस शर्त को पूरा करने के आधार पर होगा भुगतान
दिल्ली सरकार की इस नई योजना में निजी कंपनियों को सीधे भुगतान नहीं किया जाएगा. कंपनियों को उस दिन का भुगतान मिलेगा जब उनके द्वारा लगाई गई तकनीक पीएम2.5 और पीएम10 में कम से कम 20 फीसदी की कमी दर्ज कराएगी. यदि कोई कंपनी लगातार दो महीने तक लक्ष्य हासिल नहीं कर पाती है तो नोटिस और जवाब का अवसर देने के बाद उसका अनुबंध समाप्त किया जा सकता है. इस मॉडल को परिणाम आधारित भुगतान प्रणाली के रूप में देखा जा रहा है.
पहले भी हो चुके हैं कई प्रयोग
दिल्ली में इससे पहले भी खुले स्थानों पर एयर प्यूरीफायर और हवा साफ करने के उपकरणों का परीक्षण किया जा चुका है. साल 2023 में आनंद विहार बस टर्मिनल पर, 2024 में खान मार्केट के पास ताज एम्बेसडर होटल और न्यू मोती बाग क्षेत्र में तथा जनवरी 2025 में जंगपुरा के एक पेट्रोल पंप पर आउटडोर एयर प्यूरीफायर का परीक्षण किया गया था. इन मशीनों में निजी कंपनी यूमेंडस टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित तकनीक का उपयोग किया गया था.
मई में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पश्चिमी दिल्ली के सतगुरु राम सिंह मार्ग पर लगाए गए 21 फिल्टरलेस एयर प्यूरीफायर और अन्य परीक्षण उपकरणों का निरीक्षण भी किया था.
स्मॉग टावर से नहीं मिले अपेक्षित परिणाम
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अनुसार आनंद विहार परीक्षण के दौरान पीएम2.5 में औसतन 30 प्रतिशत और पीएम10 में 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी. हालांकि इसका असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित रहा. वहीं 2021 में कनॉट प्लेस में लगाए गए स्मॉग टावर के परिणाम उतने उत्साहजनक नहीं रहे.
संसदीय समिति की एक रिपोर्ट में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की राय दर्ज है कि भविष्य की आउटडोर एयर-क्लीनिंग परियोजनाओं के लिए स्मॉग टावरों पर विचार नहीं किया जाना चाहिए. नई योजना में भी स्मॉग टावर अनिवार्य नहीं हैं. बाबा खड़क सिंह मार्ग, जहां स्मॉग टावर स्थित है, वे स्थान भी नई परियोजना की सूची में शामिल है.
40 हिस्सों में बांटा गया पूरा प्रोजेक्ट
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने पूरी परियोजना को 40 पैकेजों में बांटा है. हर पैकेज की अनुमानित लागत 2.6 करोड़ रुपये रखी गई है. प्रत्येक स्थान के लिए सबसे कम पात्र बोली लगाने वाली कंपनी का चयन होगा. हालांकि एक कंपनी को अधिकतम 10 स्थानों का ही काम दिया जा सकेगा.
इन इलाकों को किया गया शामिल
इस योजना के तहत कनॉट प्लेस, खान मार्केट, चांदनी चौक, डिफेंस कॉलोनी, प्रमुख बस अड्डों, अस्पतालों, पर्यटन स्थलों और दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है. प्रत्येक स्थल का क्षेत्रफल लगभग एक से डेढ़ एकड़ रखा गया है. कंपनियां अलग-अलग प्रदूषण नियंत्रण तकनीकें प्रस्तावित कर सकती हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षा मानकों को पूरा करना होगा.
स्वतंत्र एजेंसी करेगी मूल्यांकन
उपकरण इंस्टॉल होने के बाद एक स्वतंत्र एजेंसी क्षेत्र के भीतर और बाहर प्रदूषण स्तर की तुलना करेगी. उसी आधार पर यह तय होगा कि कंपनी लक्ष्य हासिल कर पाई या नहीं. भुगतान मासिक आधार पर किया जाएगा और केवल उन्हीं दिनों को माना जाएगा जब दोनों प्रदूषकों में 20 प्रतिशत कमी दर्ज की जाएगी.
एक साल का होगा अनुबंध
प्रारंभिक अनुबंध एक वर्ष के लिए होगा. बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों का अनुबंध बाद में एक-एक वर्ष के लिए दो बार बढ़ाया जा सकता है. इसके लिए पिछले वर्ष में कम से कम 300 दिनों तक सफल प्रदर्शन का रिकॉर्ड होना जरूरी होगा.
कौन कर सकता है आवेदन?
टेंडर के अनुसार बोली लगाने वाली कंपनियों का औसत वार्षिक कारोबार कम से कम एक करोड़ रुपये होना चाहिए. साथ ही उन्हें समान प्रकार की परियोजनाओं का अनुभव भी दिखाना होगा. सफल कंपनी को 3 प्रतिशत का परफॉर्मेंस बैंक गारंटी जमा करनी होगी, जबकि प्रत्येक साइट के लिए 5 लाख रुपये की बोली सुरक्षा राशि भी निर्धारित की गई है.
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