प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली:
मवेशियों की खरीद बिक्री से जुड़े केंद्र सरकार के नए नियम से उत्तर पूर्वी राज्यों में राजनीतिक तूफ़ान बढ़ रहा है. इस फैसले से नाराज़ गारो हिल्स के नेता बर्नार्ड मराक ने बीजेपी से इस्तीफ़ा दे दिया है. उधर भारत सरकार ने अधिसूचना में संशोधान की मांग पर विचार शुरू कर दिया है. मांस के लिए मवेशियों की खरीद बिक्री रोकने वाली केंद्र सरकार की अधिसूचना से नाराज़ होकर बीजेपी से इस्तीफा देने वाले गारो हिल्स के नेता बर्नार्ड मराक ने बीजेपी पर ईसाइयों और आदिवासी लोगों की भावनाओं से खेलने का आरोप लगाया है. मराक ने कहा कि बीफ विवाद पर बीजेपी ने मेघालय के लोगों की भावना से खिलावाड़ किया है. ये इस्तीफा मेघालय में सरकारी फ़ैसले को लेकर बढ़ती नाराज़गी दिखाता है.
गारो हिल्स के गारोबाढ़ा मवेशी बाज़ार में ये नाराज़गी देखी जा सकती है. मवेशी कारोबारी मोस्ता कबीर कहते हैं, "ये हमारे जीवनयापन का सवाल है...प्रतिबंध लगाने से हमारी रोजी-रोटी छिन जाएगी. ये हमारी सामाजिक संस्कृति का हिस्सा है." कारोबारी अमिनुल इस्लाम का मानना है कि पिछले 40 साल से इस बाज़ार में ये व्यापार चल रहा है, अगर इस ट्रेड को बंद किया गया तो उनका काफी नुकसान होगा.
पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने गुरुवार को इस बारे में पीएमओ के अफ़सरों से बात की. माना जा रहा है कि अधिसूचना के कुछ प्रावधानों की भाषा बदली जा सकती है. भैसों को अधिसूचना के दायरे से बाहर रखने पर भी सरकार विचार कर रही है. उधर दिल्ली में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, "क्या किसानों की मंडी में बूचड़खाने से जुड़े कारोबारी खरीद कर सकते हैं या नहीं - अधिसूचना का वास्ता सिर्फ इतने भर से है. मवेशवियों के स्लॉटर को लेकर अलग-अलग राज्यों के अपने-अपने कानून हैं और इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा."
सरकार पर राज्य सरकारों की तरफ से, राजनीतिक दलों की तरफ से, चमड़ा उद्योग की तरफ से दबाव बढ़ रहा है. मेघालय में मीट कारोबारी हड़ताल पर जाने की धमकी दे रहे हैं. सरकार को इस विवाद को और बढ़ने से रोकने के लिए जल्दी पहल करनी होगी.
(साथ में अखिलेश शर्मा...)
गारो हिल्स के गारोबाढ़ा मवेशी बाज़ार में ये नाराज़गी देखी जा सकती है. मवेशी कारोबारी मोस्ता कबीर कहते हैं, "ये हमारे जीवनयापन का सवाल है...प्रतिबंध लगाने से हमारी रोजी-रोटी छिन जाएगी. ये हमारी सामाजिक संस्कृति का हिस्सा है." कारोबारी अमिनुल इस्लाम का मानना है कि पिछले 40 साल से इस बाज़ार में ये व्यापार चल रहा है, अगर इस ट्रेड को बंद किया गया तो उनका काफी नुकसान होगा.
पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने गुरुवार को इस बारे में पीएमओ के अफ़सरों से बात की. माना जा रहा है कि अधिसूचना के कुछ प्रावधानों की भाषा बदली जा सकती है. भैसों को अधिसूचना के दायरे से बाहर रखने पर भी सरकार विचार कर रही है. उधर दिल्ली में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, "क्या किसानों की मंडी में बूचड़खाने से जुड़े कारोबारी खरीद कर सकते हैं या नहीं - अधिसूचना का वास्ता सिर्फ इतने भर से है. मवेशवियों के स्लॉटर को लेकर अलग-अलग राज्यों के अपने-अपने कानून हैं और इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा."
सरकार पर राज्य सरकारों की तरफ से, राजनीतिक दलों की तरफ से, चमड़ा उद्योग की तरफ से दबाव बढ़ रहा है. मेघालय में मीट कारोबारी हड़ताल पर जाने की धमकी दे रहे हैं. सरकार को इस विवाद को और बढ़ने से रोकने के लिए जल्दी पहल करनी होगी.
(साथ में अखिलेश शर्मा...)
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