फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप के दूसरे सेमीफाइनल में आज इंग्लैंड और अर्जेन्टीना की भिड़ंत होगी, लेकिन ये कम ही लोगों को पता होगा कि 8 हजार मील दूर इन देशों के बीच कभी भयंकर दुश्मनी रही है और भीषण युद्ध भी लड़ा गया है. दोनों देशों के बीच दुश्मनी फॉकलैंड द्वीप (Falkland Islands) से जुड़ी है. अर्जेंटीना में इस द्वीप को इसलास मालविनास कहते हैं. फॉकलैंड द्वीप समूह दक्षिण अटलांटिक महासागर में है, जो अर्जेंटीना के तट से करीब 480 किलोमीटर दूर है. ब्रिटेन का इस द्वीप पर 1833 (करीब 200 साल) से कब्जा है, जबकि अर्जेंटीना इसे अपना द्वीप बताता रहा है. 1982 में इस द्वीप को लेकर दोनों देशों के बीच खूनी जंग लड़ी गई.
फॉकलैंड द्वीप (Falkland Islands) का विवाद
स्पेन से आजादी के बाद अर्जेंटीना ने इस द्वीप पर दावा ठोका और 1832 में अपनी सैन्य चौकी बना ली. लेकिन जनवरी 1833 में ब्रिटिश रॉयल नेवी ने अर्जेंटीना के सैनिकों को खदेड़कर अपना सीधा कब्जा कायम कर लिया. 150 साल लंबे विवाद के बाद 1982 में अर्जेन्टीना की ओर से नाकाम हमला किया गया. अर्जेंटीना आज भी ब्रिटेन का यहां अवैध कब्जा मानता है. ब्रिटेन का तर्क है कि वहां 98 फीसदी आबादी ब्रिटिश मूल की है, जिसने जनमत संग्रह में उसके साथ रहने का फैसला किया है.
अर्जेन्टीना और इंग्लैंड का मुकाबला
अर्जेंटीना की सैन्य तानाशाह के जनरल लियोपोल्डो गाल्टिएरी ने ने 2 अप्रैल 1982 को इस द्वीप को कब्जे से छुड़ाने के लिए हमला बोल दिया. कहा जाता है कि देश की गिरती अर्थव्यवस्था और जनता के गुस्से से ध्यान हटाने के लिए उन्होंने ऐसा किया. ब्रिटेन की मुख्य जमीन फॉकलैंड द्वीप से 12800 किमी दूर थी. उस वक्त ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर थीं. आयरन लेडी थैचर इस हमले से डरी नहीं. उन्होंने ब्रिटेन से तुरंत ही ब्रिटिश नौसैना की विशाल टुकड़ी अटलांटिक के लिए रवाना की. HMS हर्मेस और HMS इनविंसिबल युद्धपोतों के साथ 127 जहाजों को लेकर टास्क फोर्स फॉकलैंड की ओर बढ़ी.तीन कमांडो ब्रिगेड और पैराशूट रेजीमेंट भी इसमें शामिल थी.

England vs Argentina
74 दिनों तक चली जंग
ब्रिटेन और अर्जेन्टीना के बीच यह भीषण युद्ध पानी, जमीन और हवाई मोर्चे पर 74 दिनों तक चला. पनडुब्बी और घातक हथियारों के दम पर ब्रिटेन ने अर्जेंटीना की सेना को पीछे हटने को मजबूर कर दिया. अर्जेंटीना की सेना 14 जून 1982 को सरेंडर कर दिया और फॉकलैंड्स फिर से इंग्लैंड के कब्जे में आ गया. युद्ध में अर्जेंटीना के 649 और ब्रिटेन के 255 सैनिक मारे गए. हालांकि इस करारी हार से अर्जेंटीना की सैन्य तानाशाह सरकार गिर गई और वहां लोकतंत्र की बहाली हुई. ब्रिटेन में मार्गरेट थैचर की लोकप्रियता आसमान छूने लगी और वो दोबारा भारी बहुमत से चुनाव जीतकर सत्ता में आईं.
अर्जेंटीना पर मुख्य भूमि पर कभी हुकूमत नहीं कर पाया ब्रिटेन
अर्जेंटीना का रियो डी ला प्लाटा इलाका लंबे समय तक स्पेन साम्राज्य का उपनिवेश रहा, जिसे 1816 में आजादी मिली. 1806 और 1807 के नेपोलियन युद्ध के दौरान जब स्पेन और फ्रांस एक साथ थे तब ब्रिटिश सेना ने ब्यूनस आयर्स (अर्जेंटीना की राजधानी) पर दो बार बड़े हमले किए. 1806 में ब्रिटिश सेना ने ब्यूनस आयर्स पर कब्जा भी कर लिया था, लेकिन अर्जेन्टीना की फौज ने 46 दिनों में उन्हें पीछे हटने को मजबूर किया. 1807 के दूसरे ब्रिटिश हमले भी इंग्लैंड के सैनिकों को आत्मसमर्पण करना पड़ा.

स्पेन से प्रतिद्वंद्विता में अर्जेन्टीना की मदद
दिलचस्प बात है कि फीफा वर्ल्ड कप फुटबॉल के फाइनल में पहुंचे स्पेन का भी इस कहानी से कनेक्शन है. एक वक्त था जब अर्जेंटीना को ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा भी कहा जाता था. उस वक्त स्पेन भी साम्राज्यवादी देश था. ऐसे में इंग्लैंड ने परोक्ष तौर पर स्पेन के खिलाफ अर्जेंटीना की आजादी की जंग में मदद की थी. ब्रिटेन उन देशों में से एक था जिसने 2 फरवरी 1825 को अर्जेंटीना की स्वतंत्रता को मान्यता दी और दोनों देशों के बीच मैत्री संधि पर हस्ताक्षर हुए.
ब्रिटेन का भारी निवेश
अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था 1930 के दशक तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक थी. ब्रिटेन का भारी निवेश इसकी वजह थी. अर्जेंटीना के विशाल रेलवे नेटवर्क, बंदरगाह, गैस सप्लाई, बैंक और संचार नेटवर्क में ब्रिटिश इंजीनियरों और निवेशकों ने बड़ी भूमिका निभाई थी. अर्जेन्टीना से अनाज के सबसे बड़े खरीदारों में ब्रिटेन पहली पायदान पर था.
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फुटबॉल भी इंग्लैंड की देन
अर्जेंटीना का सबसे पसंदीदा खेल फुटबॉल भी 1867 में ब्रिटिश रेलवे कर्मचारियों की देन है. अर्जेंटीना क्लब जैसे न्यूवेल्स ओल्ड बॉयज और रिवर प्लेट के नाम अंग्रेजी मूल के हैं.अर्जेंटीना में पोलो और रग्बी जैसे खेल भी ब्रिटिश प्रवासियों की ही देन हैं. अर्जेंटीना में 1 लाख से अधिक ब्रिटिश मूल के लोग रहते हैं.
फुटबॉल में इंग्लैंड को पटखनी
फीफा वर्ल्ड कप में दोनों टीमें 3 बार नॉकआउट मुकाबला हुआ है, जिनमें से अर्जेंटीना ने 2 बार बाजी मारी है. उनके बीच अब सेमीफाइनल मुकाबला खेला जाना है.
1966 का वर्ल्ड कप नॉकआउट
लंदन के मशहूर वेंबली स्टेडियम में फुटबॉल इतिहास का सबसे विवादित मैच में से एक अर्जेन्टीना और इंग्लैंड में खेला गया. क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना कैप्टन एंटोनियो रैटिन को रेफरी ने मैदान से बाहर कर दिया था. इंग्लैंड के ज्योफ हर्स्ट ने मैच का इकलौता गोल किया. उसी साल इंग्लैंड पहली और आखिरी बार वर्ल्ड चैंपियन बना था.

1986 का क्वार्टर फाइनल
1982 के फॉकलैंड्स युद्ध के 4 साल बाद दोनों देश के बीच मेक्सिको सिटी में क्वार्टरफाइनल खेला गया. स्टार डिएगो माराडोना के दो जादुई गोलों के साथ अर्जेंटीना ने यह मैच 2-1 से जीता और उस साल वर्ल्ड कप पर कब्जा किया.
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1998 का पेनॉल्टी शूटआउट
फ्रांस के सेंट एटिएने में अर्जेन्टीना और इंग्लैंड का मैच 2-2 की बराबरी पर रहा. मैच के दौरान इंग्लैंड के स्टार खिलाड़ी डेविड बेकहम को अर्जेंटीना के डिएगो शिमियोने को लात मारने के आरोप में रेड कार्ड दिखाकर बाहर किया गया. पेनाल्टी शूटआउट में अर्जेंटीना ने 4-3 से बाजी मारी.
डिएगो माराडोना का 'हैंड्स ऑफ गॉड'
1986 के क्वार्टर-फाइनल मैच के 51वें मिनट में माराडोना का गोल फुटबॉल इतिहास के सबसे विवादित गोल में एक माना जाता है. मैच के दौरान फुटबॉल हवा में उछली. इंग्लैंड के लंबे गोलकीपर पीटर शिल्टन के साथ अर्जेंटीना के स्टार डिएगो माराडोना हवा में उछले.माराडोना ने हेडर मारने का नाटक करते हुए चुपके से अपने बायें हाथ की मुट्ठी से फुटबॉल को पुशकर गोल कर दिया. इंग्लैंड के डिफेंडर्स और गोलकीपर चिल्लाते रहे कि यह हैंडबॉल था, लेकिन रेफरी अली बिन नासेर ने इसे गोल माना. मैच के बाद जब माराडोना से इस गोल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था, यह गोल थोड़ा माराडोना के सिर से और थोड़ा भगवान के हाथ (Hands of God) से हुआ था. तब से इस गोल को हैंड ऑफ गॉड कहा जाता है. हालांकि विवादित गोल के 4 मिनट बाद माराडोना ने इंग्लैंड के 5 डिफेंडर्स और गोलकीपर को छकाते हुए दूसरा गोल किया था, जो सदी का सबसे बेहतर गोल कहा जाता है.
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