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खुद बॉलीवुड से जुड़े लोग फ़िल्मी हस्तियों की मुखबिरी करते हैं; फ़िल्म हस्तियों की जानकारी गैंगस्टर तक पहुंचाई

90 के दशक में बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड का रिश्ता कितना गहरा था? पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने ऐसे किस्से सुनाए हैं जो फिल्मी दुनिया की एक अलग तस्वीर दिखाते हैं.

खुद बॉलीवुड से जुड़े लोग फ़िल्मी हस्तियों की मुखबिरी करते हैं; फ़िल्म हस्तियों की जानकारी गैंगस्टर तक पहुंचाई
90 के दशक का काला सच: बॉलीवुड से ही गैंगस्टरों तक पहुंचती थी जानकारी
NDTV
  • प्रदीप शर्मा ने बताया कैसे बॉलीवुड तक पहुंचा था अंडरवर्ल्ड का नेटवर्क
  • 'डी' लॉकेट पहनते थे लोग, प्रदीप शर्मा ने सुनाए 90 के दशक के किस्से
  • अजीत दीवानी हत्याकांड से लेकर प्रीति जिंटा तक, प्रदीप शर्मा के बड़े खुलासे
मुंबई:

टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद एक बार फिर गैंगस्टर का जिक्र फिल्म इंडस्ट्री में होने लगा है. ये दाउद के दौर के याद दिलाते हैं. क्योंकि 90 के दशक में मुंबई अंडरवर्ल्ड का खौफ सिर्फ कारोबारी जगत तक सीमित नहीं था, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री भी उसकी चपेट में थी. पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने एक इंटरव्यू में उस दौर की कई परतें खोलते हुए बताया कि गैंगस्टरों को बॉलीवुड की अंदरूनी जानकारी देने वाले लोग फिल्म जगत से ही जुड़े होते थे. उन्होंने कहा कि अंडरवर्ल्ड फिल्मों के ओवरसीज राइट्स, म्यूजिक राइट्स और वित्तीय मामलों तक में दखल देता था. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि बॉलीवुड के अधिकांश लोग डर के कारण पुलिस का साथ नहीं देते थे.

90 के दशक में दाऊद गैंग का था जबरदस्त खौफ

प्रदीप शर्मा के मुताबिक 90 का दशक ऐसा दौर था जब अंडरवर्ल्ड की तूती बोलती थी. उन्होंने कहा कि दाऊद इब्राहिम और डी-कंपनी का प्रभाव इतना अधिक था कि लोग "डी" नाम के लॉकेट, अंगूठियां और ब्रेसलेट तक पहनते थे. उनके अनुसार उस समय डी-गैंग से जुड़ाव को कई लोग प्रतिष्ठा की तरह देखते थे. हालांकि उन्होंने कहा कि गैंगस्टर आखिरकार अपराधी और ठग ही थे, जिनका मुख्य मकसद किसी भी तरह पैसा कमाना था, चाहे वह वसूली हो या नशे का कारोबार.

बॉलीवुड के भीतर से जाती थी जानकारी

प्रदीप शर्मा ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में कुछ ऐसे लोग मौजूद थे जो गैंगस्टरों को लगातार सूचनाएं पहुंचाते थे. फिल्मी सितारों, फिल्म कारोबार, ओवरसीज राइट्स और म्यूजिक राइट्स से संबंधित जानकारी अंडरवर्ल्ड तक पहुंचाई जाती थी. उन्होंने दावा किया कि यदि किसी निर्माता या कलाकार ने उनकी बात नहीं मानी तो उसे धमकाया जाता था और कई मामलों में फायरिंग तक की जाती थी. शर्मा ने कहा कि अबू सलेम तक जानकारी पहुंचाने वाले कुछ लोग इंडस्ट्री में सक्रिय थे. उनके मुताबिक गैंगस्टर ऊपर बैठकर उन्हीं लोगों की दी गई सूचनाओं पर भरोसा करते थे. यही लोग कई बार समझौते कराने का भी काम करते थे.

अजीत दीवानी हत्याकांड का भी किया जिक्र

प्रदीप शर्मा ने कहा कि अभिनेत्री मनीषा कोइराला के सेक्रेटरी अजीत दीवानी की हत्या के मामले को उन्होंने ही सुलझाया था. उन्होंने बताया कि उस दौर में अबू सलेम फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लगभग हर व्यक्ति को वसूली के लिए फोन करता था. अभिनेता और अभिनेत्रियों के फोन अक्सर उनके मैनेजर रिसीव करते थे, लेकिन जब लोगों ने दुबई से आने वाले कॉल उठाने बंद कर दिए तो डर का संदेश देने के लिए अजीत दीवानी की हत्या कर दी गई. उनके अनुसार बॉलीवुड से जुड़े लोग गैंगस्टरों के लिए आसान निशाना माने जाते थे क्योंकि वे लगातार शूटिंग और यात्रा में व्यस्त रहते थे.

कैसे टूटा अंडरवर्ल्ड का नेटवर्क?

प्रदीप शर्मा ने बताया कि मुंबई पुलिस ने गैंग के भीतर अपने स्रोत विकसित किए. कई गैंग सदस्यों को ही मुखबिर बना लिया गया था. उनके मुताबिक अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों की अंदरूनी जानकारी पहले ही मिल जाती थी और इसी कारण कई हमलों को अंजाम देने से पहले ही अपराधियों तक पहुंचा जा सकता था.

प्रीति जिंटा ने दिखाया साहस

शर्मा ने "चोरी चोरी चुपके चुपके" मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कई फिल्मी हस्तियों ने अदालत में अपने पुराने बयानों का समर्थन नहीं किया. हालांकि उन्होंने विशेष रूप से अभिनेत्री प्रीति जिंटा की सराहना करते हुए कहा कि एक महिला होने के बावजूद उन्होंने निडरता से पुलिस का सहयोग किया और अपने बयान पर कायम रहीं. प्रदीप शर्मा ने कहा कि प्रीति जिंटा के बयान के आधार पर ही फिल्म फाइनेंसर भरत शाह की गिरफ्तारी संभव हो सकी. उन्होंने कहा कि कई बड़े नाम बाद में पीछे हट गए, जिसके पीछे उनकी अपनी मजबूरियां रही होंगी.

बड़े सितारे नहीं थे शामिल

प्रदीप शर्मा ने कहा कि अंडरवर्ल्ड के साथ फिल्म इंडस्ट्री के शीर्ष अभिनेता और अभिनेत्रियां सीधे तौर पर शामिल नहीं थे. उनके अनुसार कभी-कभार निचले स्तर के कुछ लोग या छोटे कलाकार ऐसे नेटवर्क से जुड़े दिखते थे, लेकिन पूरी इंडस्ट्री को इसमें शामिल नहीं माना जा सकता.

आज के दौर में बदल चुका है अपराध का तरीका

उन्होंने कहा कि अब शूटरों को विदेशों या जेलों से बैठकर हायर किया जाता है और सोशल मीडिया भी अपराधियों के संपर्क का एक माध्यम बन चुका है. हालांकि उनका मानना है कि मुंबई पुलिस बदलते दौर की चुनौतियों से निपटने में सक्षम है और आधुनिक अपराध से निपटने के लिए अपनी रणनीतियां लगातार विकसित कर रही है.

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