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6 राज्य, 2100 किलोमीटर की लंबाई... डानकुनी-सूरत फ्रेट कॉरिडोर से बदल जाएगी तस्वीर, तेजी से शुरू हुआ काम

इस कॉरिडोर के बनने से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों का लाभ होगा. इससे पूर्वी और पश्चिमी भारत के बीच माल ढुलाई तेज और आसान हो जाएगी. मालगाड़ियों का समय कम लगेगा और मौजूदा रेलवे लाइनों पर भीड़ कम होगी. लॉजिस्टिक्स ज्यादा तेज और प्रभावी बनेगी. 

6 राज्य, 2100 किलोमीटर की लंबाई... डानकुनी-सूरत फ्रेट कॉरिडोर से बदल जाएगी तस्वीर, तेजी से शुरू हुआ काम
पूर्वी और पश्चिमी भारत को जोड़ने वाले फ्रेट कॉरिडोर का काम तेजी से शुरू हो गया है.
  • डानकुनी-सूरत फ्रेट कॉरिडोर परियोजना की लंबाई लगभग 2100 किलोमीटर होगी और यह छह राज्यों को जोड़ेगी.
  • यह फ्रेट कॉरिडोर पश्चिम बंगाल से गुजरात तक माल ढुलाई को तेज और सुविधाजनक बनाएगा.
  • रेलवे बोर्ड ने इस परियोजना को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं.
नई दिल्ली:

Dankuni-Surat Freight Corridor: परिवहन के लिए भारत में रेल को सर्वसुलभ साधन माना जाता है. लोगों की आवाजाही के साथ-साथ माल ढुलाई में भी रेलवे का बड़ा नेटवर्क है. इससे कारोबारियों का काम भी बड़ी आसानी से हो पाता है. इसी साल भारत सरकार ने बजट में एक नए फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की. घोषणा के 12वें दिन इस फ्रेट कॉरिडोर पर तेजी से काम शुरू हो गया है. बनने के बाद यह कॉरिडोर पूर्वी और पश्चिमी भारत के बीच माल ढुलाई को आसान बनाएगा. हम बात कर रह हैं कि डानकुनी-सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की. 2100 किलोमीटर की लंबाई वाले डानकुनी-सूरत फ्रेट कॉरिडोर से भारत के 6 राज्य जुड़ेंगे. गुरुवार को रेलवे बोर्ड ने इस कॉरिडोर से जुड़े काम को तेज रफ्तार से करने का निर्देश दिया है.

डानकुनी-सूरत फ्रेट कॉरिडोर को तय समय में पूरा करने का निर्देश

भारतीय रेलवे ने डानकुनी-सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को तेजी से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की. परियोजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026 में की गई थी.रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को इसे तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं. यह नया फ्रेट कॉरिडोर लगभग 2,100 किमी लंबा होगा.यह कॉरिडोर डानकुनी (पश्चिम बंगाल) से सूरत (गुजरात) तक बनेगा.

इस कॉरिडोर के बनने से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों का लाभ होगा. इससे पूर्वी और पश्चिमी भारत के बीच माल ढुलाई तेज और आसान हो जाएगी. मालगाड़ियों का समय कम लगेगा और मौजूदा रेलवे लाइनों पर भीड़ कम होगी. लॉजिस्टिक्स ज्यादा तेज और प्रभावी बनेगी. 

डानकुनी-सूरत फ्रेट कॉरिडोर की तकनीकी विशेषताएं 

  • उच्च क्षमता वाली विद्युतीकरण प्रणाली
  • कोई लेवल क्रॉसिंग नहीं यानी रास्ते में फाटक नहीं होंगे, जिससे सुरक्षा बढ़ेगी
  • आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम, जैसे कवच, ताकि सुरक्षा और ट्रेन संचालन बेहतर हो सके

नई लागत और समयसीमा के अनुसार अपडेट होगी DPR

परियोजना की डीपीआर को नई लागत और समयसीमा के अनुसार अपडेट किया जाएगा. कॉरिडोर को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर एक साथ काम शुरू किया जाएगा ताकि तेजी से निर्माण हो सके. हर हिस्से के लिए अलग कोर टीम बनाई जाएगी जो मौके पर रहकर काम की निगरानी करेगी. निर्माण शुरू होने से पहले की सभी प्रक्रियाओं को तेज किया जा रहा है.

ठेके से जुड़े दस्तावेज भी साथ-साथ तैयार किए जा रहे हैं ताकि देरी न हो. जरूरत के अनुसार मैनपावर का आकलन किया जा रहा है. रेलवे बोर्ड को हर हफ्ते प्रगति की रिपोर्ट दी जाएगी. 

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