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This Article is From Oct 09, 2020

कोरोना से ठीक हुए कई मरीजों को हो रही न्‍यूरोलॉजिकल समस्‍या, लकवे के भी हो रहे शिकार

48 साल के तिरुपति स्वामी 8 अगस्त को कोविड पॉज़िटिव हुए थे, तबीयत बिगड़ने के बाद जब 19 अगस्त को मुंबई के wockhardt हॉस्पिटल में भर्ती हुए तब पता चला निगेटिव तो हो गए हैं लेकिन ब्रेन स्ट्रोक यानी लकवा के कारण ब्रेन का बायां हिस्सा डैमेज हुआ है.

कोरोना से ठीक हुए कई मरीजों को हो रही न्‍यूरोलॉजिकल समस्‍या, लकवे के भी हो रहे शिकार
कोविड-19 से ठीक हुए कई पेशेंट्स में स्‍ट्रोक और न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्‍लम देखी गई हैं (प्रतीकात्‍मक फोटो)
मुंंबई:

Corona Pandemic: एक रिसर्च में हाल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इसके अनुसार, हॉस्पिटल में भर्ती 5 में से 4 कोविड-19 (Covid-19) मरीज़ों में न्यूरोलॉजिकल यानी दिमाग़ का रोग देखा जा रहा है. कई मरीज़ स्ट्रोक यानी लकवे का शिकार हो रहे हैं और इनमें से एक तिहाई मरीज़ों को बोलने में दिक़्क़त हो रही है. कोविड -19 के कारण 40% मरीज़ों में ये परेशानी लम्बी और गंभीर रूप में है. ऐसे ही एक मरीज ने डॉक्‍टर को बताया कि उनके गले से आवाज नहीं निकल रही और बोलने में समस्‍या आ रही है. डॉक्‍टर ने उन्‍हें दिलासा देते हुए कहा कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा.

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48 साल के तिरुपति स्वामी 8 अगस्त को कोविड पॉज़िटिव हुए थे, तबीयत बिगड़ने के बाद जब 19 अगस्त को मुंबई के wockhardt हॉस्पिटल में भर्ती हुए तब पता चला निगेटिव तो हो गए हैं लेकिन ब्रेन स्ट्रोक यानी लकवा के कारण ब्रेन का बायां हिस्सा डैमेज हुआ है. डॉक्टर बताते हैं कि कोविड के कारण होने वाला लकवा ज़्यादा गंभीरहै और इनमें से एक तिहाई मरीज़ों को बोलने में दिक़्क़त हो रही है. अटक-अटक कर मुंह से बाहर आ पाते हैं.

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फोर्टिस हॉस्टिपल के डॉ पवन ओझा के अनुसार, ‘'जो कोविड से होने वाला स्ट्रोक है, वो बिना कोविड के स्ट्रोक से अलग है. ज़्यादा सीवियर है, जिससे ब्रेन को ज़्यादा डैमेज हो रही है. ये मरीज़ 40-50 साल के बीच वाले हैं. इनको जो हम स्ट्रोक वाली नॉर्मल दवा दे रहे हैं लेकिन उससे अच्छे रिज़ल्ट नहीं दिख रहे. इसलिए इन मरीज़ों में डिसएबिलिटी (अक्षमता) और मॉर्टैलिटी रेट (मृत्‍यु दर) भी ज़्यादा है. कई मरीज़ों में स्ट्रोक के लक्षण, कोविड से ठीक होने के बाद भी दिखे हैं. इनमें अधिकतर 50 वर्ष तक की उम्र वाले है, इनमें से क़रीब एक तिहाई मरीज़ों में स्पीच की दिक़्क़त है. जैसे क्या कहना है ठीक से बोल नहीं पाते, शब्दों का चुनाव ठीक से नहीं कर पाते. या आप जो इन्हें कह रहे हैं इन्हें ठीक से समझ नहीं आता.'' इसी क्रम में ब्रेन के वरिष्ठ डॉक्टर बताते हैं कि कई मरीज़ स्ट्रोक के बाद ठीक हो तो रहे हैं लेकिन 40% मरीज़ों की दिमाग़ी तकलीफ़ लंबी और गंभीर दिख रही है. ये महामारी नई है और इस वायरस से जुड़ी तकलीफ़ें भी! स्टडी जारी है, इसका प्रभाव समझने में वक़्त लगेगा... 

Wockhardt हॉस्पिटल के कन्सल्टंट न्यूरोलोजिस्ट डॉ प्रशांत मखीजा ने कहा, "मिस्टर स्वामी के केस में उनके ब्रेन के लेफ़्ट साइड में क्लॉट था. और हमारे ब्रेन का लैंग्विज फ़ंक्शन लेफ़्ट से कंट्रोल होता है इसलिए उनको बोलने की समस्या हो रही थी. एक बात अच्छी थी कि उनकी म्यूज़िकल स्किल काफ़ी अच्छी है उनको गाने का शौक़ है. ये जानते हुए हमने स्पीच थेरेपी की सलाह दी. ये अलग स्पीच थेरेपी होती है जिसे हम मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी बोलते हैं वो हमने उनको एड्वाइस की."

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