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दिल्ली-NCR में अगले साल से इन वाहनों का नहीं होगा रजिस्ट्रेशन, प्रदूषण कम करने को लेकर CAQM का बड़ा फैसला

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने उत्तर भारत में स्मॉग और प्रदूषण की मुख्य वजह यानी 'पराली जलाने' की प्रथा को समाप्त करने के लिए भी एक सख्त रणनीति तैयार की है.

दिल्ली-NCR में अगले साल से इन वाहनों का नहीं होगा रजिस्ट्रेशन, प्रदूषण कम करने को लेकर CAQM का बड़ा फैसला
  • दिल्ली-एनसीआर में 2027 से नए CNG और डीजल ऑटो का पंजीकरण बंद कर इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर को अनिवार्य किया जाएगा
  • पराली जलाने की रोकथाम के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 2026 तक जीरो टॉलरेंस नीति लागू की जाएगी
  • छोटे किसानों को मुफ्त आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराई जाएगी और रखरखाव के लिए स्थानीय रिपेयर सेंटर बनाए जाएंगे
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नई दिल्ली:

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए CAQM ने बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्र में अब सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ही चलेंगे. दिल्ली में 2027 से नए CNG/डीजल ऑटो का रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगा. वायु प्रदूषण रोकने को लेकर सख्ती करते हुए ये ई-3 व्हीलर नीति लागू होगी.

CAQM का बड़ा आदेश

  • दिल्ली-NCR में L5 इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर ही होंगे रजिस्टर्ड
  • NCR में इलेक्ट्रिक ऑटो और मालवाहक वाहनों को बढ़ावा
  • 2027 से दिल्ली, 2028 से HVD जिलों में सिर्फ ई-3 व्हीलर रजिस्ट्रेशन
  • NCR में प्रदूषण रोकने के लिए बड़ा कदम, इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर अनिवार्य
  • दिल्ली-NCR में ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगी प्राथमिकता
  • CAQM की नई गाइडलाइन- चरणबद्ध तरीके से लागू होगी ई-ऑटो नीति
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दिल्ली-NCR को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए CAQM का बड़ा एक्शन प्लान

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने उत्तर भारत में स्मॉग और प्रदूषण की मुख्य वजह यानी 'पराली जलाने' की प्रथा को समाप्त करने के लिए भी एक सख्त रणनीति तैयार की है. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लिए अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी.

मुख्य लक्ष्य: 2026 तक पराली का पूर्ण उन्मूलन

पिछले वर्षों के अनुभवों के आधार पर, CAQM ने Section 12 के तहत राज्यों को अगस्त 2026 तक अपनी तैयारी पूरी करने का निर्देश दिया है.

एक्शन प्लान के मुख्य बिंदु -

डिजिटल मैपिंग: हर गांव के प्रत्येक खेत की मैपिंग की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसान पराली का प्रबंधन कैसे करेगा (इन-सीटू, एक्स-सीटू या फसल विविधीकरण)

विशेष पराली प्रोटेक्शन फोर्स: जिला और ब्लॉक स्तर पर पुलिस, प्रशासन और कृषि विभाग की स्पेशल फोर्स तैनात होगी, जो पराली जलाने की घटनाओं पर सीधी नजर रखेगी.

नोडल अधिकारियों की तैनाती: हर 100 किसानों (हॉटस्पॉट गांवों में 50) पर एक समर्पित अधिकारी होगा, जो जमीनी स्तर पर समाधान सुनिश्चित करेगा.

आधुनिक मशीनरी (CRM): पुरानी और खराब मशीनों को बदलकर नई मशीनों की खरीद अगस्त 2026 तक पूरी की जाएगी. छोटे और सीमांत किसानों को मुफ्त मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी.

रियल-टाइम ट्रैकिंग: घटनाओं की निगरानी के लिए एक वेब डैशबोर्ड और मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा.

एक्स-सीटू मैनेजमेंट: पराली को चारे या ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने के लिए बैलर और भंडारण सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा.

सख्त कार्रवाई: पराली जलाने पर न केवल भारी जुर्माना (पर्यावरण मुआवजा) लगेगा, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' भी दर्ज की जाएगी.

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किसानों के लिए सहायता और बुनियादी ढांचा

सरकार सख्ती के साथ-साथ बुनियादी ढांचे पर भी जोर दे रही है:-

कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC): छोटे किसानों को मशीनरी की सुविधा आसानी से मिल सकेगी.
रिपेयर सेंटर: मशीनों के रखरखाव के लिए स्थानीय स्तर पर केंद्रों की स्थापना की जाएगी.
जागरुकता अभियान: किसानों को पराली प्रबंधन के फायदों और सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी

सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मिशन पर नजर रखे हुए है. दिल्ली और राजस्थान सहित सभी संबंधित राज्यों को अपनी प्रगति रिपोर्ट मासिक आधार पर पेश करनी होगी.

विशेषज्ञों का मत

मशीनरी की समय पर उपलब्धता, मजबूत सप्लाई चेन और सख्त निगरानी के संयोजन से ही दिल्ली-NCR की हवा को साफ बनाया जा सकता है. 2026 का लक्ष्य स्पष्ट है, अब इसकी सफलता राज्यों द्वारा निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करती है.

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दिल्ली-एनसीआर में वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) के बिना चलने वाले वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 की धारा 12 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:

  1. 1 अक्टूबर, 2026 से, एनसीआर के सभी ईंधन स्टेशनों पर उन वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा जिनके पास स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) प्रणाली, अन्य प्रौद्योगिकी-आधारित प्रवर्तन प्रणालियों या किसी अन्य निर्धारित तंत्र के माध्यम से पहचाने गए वैध पीयूसीसी नहीं हैं.
  2. चिकित्सा आपात स्थिति, कानून व्यवस्था संबंधी कार्य, आपदा राहत अभियान या दिल्ली सरकार या संबंधित एनसीआर राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित अन्य स्थितियों जैसी असाधारण परिस्थितियों में छूट दी जा सकती है.
  3. दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और एनसीआर राज्यों में संबंधित अधिकारी निर्देश के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए एएनपीआर कैमरा सिस्टम सहित उपयुक्त प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रवर्तन प्रणालियों की स्थापना, एकीकरण और संचालन सुनिश्चित करेंगे.


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