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असम में चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, खरगे की रैली के दौरान दिग्गज नेता का इस्तीफा

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे की रैली के दौरान वरिष्ठ नेता सूर्यकांत सरकार ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने संगठनात्मक मुद्दों और भेदभाव का आरोप लगाया.

असम में चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, खरगे की रैली के दौरान दिग्गज नेता का इस्तीफा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कछार में रैली को संबोधित किया.

असम चुनाव का प्रचार अभियान खत्म होने से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत सरकार ने सोमवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. यह घटना तब हुई, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कछार जिले में रैली को संबोधित कर रहे थे. सूर्यकांत सरकार ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए पार्टी के अंदरूनी कामकाज और नेतृत्व से गहरी नाराजगी जताई है. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे इस्तीफा पत्र में कहा कि वे 'भारी मन' से यह कदम उठा रहे हैं.

पत्र में लिखा- भारी मन से पद छोड़ रहा हूं.

सरकार ने आरोप लगाया कि संगठनात्मक मुद्दों को बार-बार उठाने के बावजूद पार्टी नेतृत्व की तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया गया. उनकी ईमानदारी और लगातार प्रतिबद्धता के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया. उन्होंने कुछ पदाधिकारियों में जवाबदेही की कमी पर भी निराशा जताई और भेदभाव का आरोप लगाया. कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे अपने इस्तीफे में सूर्यकांत सरकार ने कहा कि वह भारी मन से पद छोड़ रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि संगठनात्मक मुद्दों को उठाने की बार-बार की कोशिश पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. उनकी ईमानदारी और लगातार प्रतिबद्धता के बावजूद पार्टी नेतृत्व की तरफ से समस्याओं के समाधान की कोशिश नहीं की गई.

"मेरे बैकग्राउंड की वजह से नजरंदाज किया"

सरकार ने कुछ पदाधिकारियों में जवाबदेही की कमी पर भी निराशा जताई और दावा किया कि उनकी चिंताओं को सही अहमियत नहीं दी गई. उन्होंने भेदभाव की ओर भी इशारा करते हुए कहा, "कई बार ऐसा लगा कि एक अनुसूचित समुदाय के सदस्य के तौर पर उनके बैकग्राउंड की वजह से उनके मुद्दों को नजरअंदाज किया गया."

संगठन की कार्यशैली पर लगाए आरोप

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के कामकाज पर सवाल उठाते हुए सूर्यकांत सरकार ने आरोप लगाया, "खासकर बराक घाटी में, संगठनात्मक नियुक्तियां और अहम फैसले, मेरिट और जमीनी स्तर के योगदान के अलावा दूसरी बातों से प्रभावित हो रहे थे. इन हालात को देखते हुए पार्टी के साथ जुड़े रहना काफी मुश्किल होता जा रहा था."  उन्होंने अपने समर्थकों और मतदाताओं का शुक्रिया अदा किया और कहा कि उनका भरोसा और हौसला ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है.

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