
नई दिल्ली:
पहली जुलाई की सुबह पहला जत्था जम्मू से बाबा अमरनाथ की पवित्र यात्रा के लिए रवाना होगा। अगर मौसम ठीक रहा तो 1 जुलाई की शाम को ही पहले जत्थे के श्रद्धालु करीब 14000 फुट की ऊंचाई पर बनने वाले हिमलिंग के प्रथम दर्शन करेंगे।
यात्रा में शामिल होने जा रहे लाखों श्रद्धालुओं के लिए लखनपुर से लेकर पवित्र गुफा तक 150 से ज्यादा लंगरों की व्यवस्था स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा की गई है। यही नहीं सेना, पैरामिलेट्री और राज्य पुलिस समेत एक लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी करीब 56 दिनों तक लखनपुर से लेकर गुफा तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा में लगे रहेंगे।
वैसे रोजाना 15 हजार श्रद्धालुओं को पहलगाम तथा बालटाल के रास्ते यात्रा में शामिल होने की अनुमति दी गई है। अभी तक करीब ढाई लाख श्रद्धालुओं ने अपना पंजीकरण करवाया है जबकि 30 जून से ऑन स्पॉट पंजीकरण का ऐलान किया गया है।
जम्मू से लेकर बालटाल तथा पहलगाम तक के यात्रा मार्ग की सुरक्षा को सीआरपीफ के हवाले किया जा चुका है। पहलगाम से गुफा तथा बालटाल से गुफा तक के रास्तों पर सेना और बीएसएफ भी स्थानीय पुलिस का साथ दे रही है। राज्य सरकार के मंत्री से लेकर संतरी तक सभी का ध्यान अब अमरनाथ यात्रा के प्रति ही इसलिए है क्योंकि यह अब धार्मिक से राष्ट्रीय यात्रा का रूप धारण कर चुकी है, जिस कारण आतंकी नजरें भी इस पर टिकी हुई हैं।
आतंकियों के निशाने में होने की वजह से केंद्र की ओर से अतिरिक्त सुरक्षाबलों को अमरनाथ यात्रा मार्ग, गुफा के आसपास के इलाकों और यात्रियों की सुरक्षा की खातिर आधार शिविरों व राजमार्ग पर तैनात किया जा रहा है। अंदाजन एक लाख सुरक्षाकर्मियों को अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए तैनात कर दिया गया है। इसमें वे सैनिक शामिल नहीं हैं, जो रूटीन में आतंकवादग्रस्त क्षेत्रों में अपने आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते रहते हैं।
यात्रा में शामिल होने जा रहे लाखों श्रद्धालुओं के लिए लखनपुर से लेकर पवित्र गुफा तक 150 से ज्यादा लंगरों की व्यवस्था स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा की गई है। यही नहीं सेना, पैरामिलेट्री और राज्य पुलिस समेत एक लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी करीब 56 दिनों तक लखनपुर से लेकर गुफा तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा में लगे रहेंगे।
वैसे रोजाना 15 हजार श्रद्धालुओं को पहलगाम तथा बालटाल के रास्ते यात्रा में शामिल होने की अनुमति दी गई है। अभी तक करीब ढाई लाख श्रद्धालुओं ने अपना पंजीकरण करवाया है जबकि 30 जून से ऑन स्पॉट पंजीकरण का ऐलान किया गया है।
जम्मू से लेकर बालटाल तथा पहलगाम तक के यात्रा मार्ग की सुरक्षा को सीआरपीफ के हवाले किया जा चुका है। पहलगाम से गुफा तथा बालटाल से गुफा तक के रास्तों पर सेना और बीएसएफ भी स्थानीय पुलिस का साथ दे रही है। राज्य सरकार के मंत्री से लेकर संतरी तक सभी का ध्यान अब अमरनाथ यात्रा के प्रति ही इसलिए है क्योंकि यह अब धार्मिक से राष्ट्रीय यात्रा का रूप धारण कर चुकी है, जिस कारण आतंकी नजरें भी इस पर टिकी हुई हैं।
आतंकियों के निशाने में होने की वजह से केंद्र की ओर से अतिरिक्त सुरक्षाबलों को अमरनाथ यात्रा मार्ग, गुफा के आसपास के इलाकों और यात्रियों की सुरक्षा की खातिर आधार शिविरों व राजमार्ग पर तैनात किया जा रहा है। अंदाजन एक लाख सुरक्षाकर्मियों को अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए तैनात कर दिया गया है। इसमें वे सैनिक शामिल नहीं हैं, जो रूटीन में आतंकवादग्रस्त क्षेत्रों में अपने आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते रहते हैं।
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