
नई दिल्ली:
चाहे प्लेन में उड़ना हो या फिर सड़क पर किसी पब्लिक वाहन में सफर करना, यह दोनों ही अब कम से कम एक मायने में तो बुरी तरह खतरनाक हैं। पिछले दिनों मीडिया में आई कुछ खबरों में बताया गया कि कैसे भारत में प्लेन उड़ाने के लिए पायलट को सर्टिफिकेट हासिल करने में केवल 35 मिनट लग रहे हैं!
अनुपम वर्मा नामक शख्स के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स आई थीं कि पायलट का लाइसेंस प्राप्त करना किस तरह से मजाक बना हुआ है। वर्मा ने अपना सर्टिफिकेट दिखाते हुए बताया था कि पायलट का लाइसेंस हासिल करने के लिए उसे केवल को-पायलट की सीट पर 35 मिनट बैठना पड़ा! वहीं, केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि देश के 25 से 30 फीसदी ड्राइविंग लाइसेंस बोगस हैं। ऐसे में आम आदमी तो क्या खास आदमी के लिए भी ट्रैवलिंग वाया हवा और वाया सड़क का भगवान ही मालिक है!
गडकरी ने कहा है कि सरकार ने इस तंत्र में पारदर्शिता लाने एवं उसे भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए नये मोटर वाहन अधिनियम का प्रस्ताव रखा है। गडकरी ने संवाददाताओं से कहा, ‘ड्राइविंग लाइसेंस पर स्थिति यह है कि देश में 25-30 फीसदी ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी हैं। इसलिए सरकार ने विकसित देशों- अमेरिका, कनाडा, जापान, जर्मनी और सिंगापुर के नमूनों को पढ़ने तथा राज्यों से परामर्श करने एवं आम लोगों से सूचनाएं संग्रहित करने के बाद नया मोटर वाहन अधिनियम प्रस्तावित किया है।’
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कानून में लाइसेंस जारी करना कंप्यूटर आधारित हो जाएगा और उपग्रहों से जुड़ा होगा। यदि पात्र उम्मीदवारों को लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में यातायात नियमों के उल्लंघन का रिकॉर्ड करने के लिए उपग्रहों से जुड़े कैमरे लगाये जाएंगे और जो उल्लंघनकर्ता जुर्माने को चुनौती देते हैं, उन्हें, यदि अपराध साबित होता है तो दुगना जुर्माना भरना पड़ेगा।
अनुपम वर्मा की बात करें तो वह एक गरीब किसान के घर में जन्मे और सरकारी सब्सिडी के रुपयों से उन्होंने कमर्शल जेट उड़ाना सीखा। उन्होंने कहा कि क्या होगा अगर इमर्जेंसी आ जाए.. तब मैं यह भी नहीं जानता होऊंगा कि प्लेन को कहां उतारना है और करना क्या है...। 25 साल के वर्मा ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि उन्हें जहाज उड़ाने का समुचित अनुभव नहीं दिया जा रहा है तो उन्होंने ट्रेनिंग स्कूल पर उसके पैसे लौटाने के लिए केस कर दिया।
अनुपम वर्मा नामक शख्स के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स आई थीं कि पायलट का लाइसेंस प्राप्त करना किस तरह से मजाक बना हुआ है। वर्मा ने अपना सर्टिफिकेट दिखाते हुए बताया था कि पायलट का लाइसेंस हासिल करने के लिए उसे केवल को-पायलट की सीट पर 35 मिनट बैठना पड़ा! वहीं, केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि देश के 25 से 30 फीसदी ड्राइविंग लाइसेंस बोगस हैं। ऐसे में आम आदमी तो क्या खास आदमी के लिए भी ट्रैवलिंग वाया हवा और वाया सड़क का भगवान ही मालिक है!
गडकरी ने कहा है कि सरकार ने इस तंत्र में पारदर्शिता लाने एवं उसे भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए नये मोटर वाहन अधिनियम का प्रस्ताव रखा है। गडकरी ने संवाददाताओं से कहा, ‘ड्राइविंग लाइसेंस पर स्थिति यह है कि देश में 25-30 फीसदी ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी हैं। इसलिए सरकार ने विकसित देशों- अमेरिका, कनाडा, जापान, जर्मनी और सिंगापुर के नमूनों को पढ़ने तथा राज्यों से परामर्श करने एवं आम लोगों से सूचनाएं संग्रहित करने के बाद नया मोटर वाहन अधिनियम प्रस्तावित किया है।’
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कानून में लाइसेंस जारी करना कंप्यूटर आधारित हो जाएगा और उपग्रहों से जुड़ा होगा। यदि पात्र उम्मीदवारों को लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में यातायात नियमों के उल्लंघन का रिकॉर्ड करने के लिए उपग्रहों से जुड़े कैमरे लगाये जाएंगे और जो उल्लंघनकर्ता जुर्माने को चुनौती देते हैं, उन्हें, यदि अपराध साबित होता है तो दुगना जुर्माना भरना पड़ेगा।
अनुपम वर्मा की बात करें तो वह एक गरीब किसान के घर में जन्मे और सरकारी सब्सिडी के रुपयों से उन्होंने कमर्शल जेट उड़ाना सीखा। उन्होंने कहा कि क्या होगा अगर इमर्जेंसी आ जाए.. तब मैं यह भी नहीं जानता होऊंगा कि प्लेन को कहां उतारना है और करना क्या है...। 25 साल के वर्मा ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि उन्हें जहाज उड़ाने का समुचित अनुभव नहीं दिया जा रहा है तो उन्होंने ट्रेनिंग स्कूल पर उसके पैसे लौटाने के लिए केस कर दिया।
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