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This Article is From Nov 05, 2015

थम नहीं रहा विरोध, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ने भी लौटाया नेशनल अवार्ड

थम नहीं रहा विरोध, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ने भी लौटाया नेशनल अवार्ड
फाइल फोटो
नई दिल्‍ली: देश में बढ़ती असहिष्‍णुता लेकर लेखकों-साहित्‍यकारों को विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा। इस सूची में ताजा नाम मशहूर लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय का शामिल हुआ है। अरुंधति ने गुरुवार को कहा कि वैचारिक क्रूरता के खिलाफ राजनीतिक आंदोलन में शरीक होकर वे अपना नेशनल अवार्ड लौटाते हुए 'गर्व' महसूस कर रही हैं।

अखबार 'इंडियन एक्‍सप्रेस' में प्रकाशित एक लेख में उन्‍होंने कहा, 'यदि हमारे पास स्‍वतंत्रता से बोलने का अधिकार नहीं है, तो हम बौद्धिक कुपोषण से ग्रस्‍त मूर्खों के देश से भरे समाज में तब्‍दील होकर रह जाएंगे।'  55 साल की अरुंधति ने वर्ष 1989 में फिल्‍म 'इन विच ऐनी गिव्‍स इट दोज वंस' के लिए नेशनल अवार्ड जीता था। वे अपनी पुस्‍तक 'द गॉड ऑफ स्‍माल थिंग्‍स' के लिए बुकर पुरस्‍कार भी जीत चुकी हैं। अरुंधति ने लिखा, 'मैं इस बात से बहुत खुश हूं कि मेरे पास एक नेशनल अवार्ड है जिसे लौटाकर मैं लेखकों, फिल्‍मकारों और शिक्षाविदों की ओर से वैचारिक क्रूरता के खिलाफ चलाए जा रहे राजनीतिक आंदोलन का हिस्‍सा बन सकती हूं।'


 

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