यूपी चुनाव : 35 साल से विधायक और मंत्री सतीश महाना के खिलाफ सपा ने युवा नेता को उतारा, कड़ी टक्कर

मालूम हो कि कानपुर को देश की औद्योगिक राजधानी कहा जाता था. लेकिन अब यहां कि ज्यादातर फैक्ट्रियां या तो बंद हो चुकी है या किसी और शहर में शिफ्ट हो चुकी है. हालांकि कानपुर बीजेपी का साथ दे रहा है पर इस बार हर सीट पर बीजेपी को कड़ी चुनौती मिल रही है.

कानपुर:

कानपुर को बीजेपी का गढ़ कहा जाता है. 2017 में बीजेपी ने यहां 10 में से 7 सीटें जीती थीं. लेकिन इस बार यहां की महाराजपुर सीट पर लड़ाई दिलचस्प है. यहां यूपी सरकार में मंत्री सतीश महाना पिछले 35 साल से विधायक हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी ने 36 साल के युवा सिख को महाना के खिलाफ मैदान में उतारा है. सतीश महाना लगातार 7 बार से यहां से जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं और हर बार जीत का अंतर पिछली बार से ज्यादा रहा है. लेकिन इस बार यहां का मुकाबला दिलचस्प होता दिख रहा है. यहां से सपा ने महाना के किले में सेंध लगाने के लिए 36 साल के फतेह बहादुर को मैदान में उतारा है. फतेह बहादुर यहां सड़कों पर लोगों के पैर छूकर वोट मांग रहे हैं. 

आपको बता दें कि, फतेह बहादुर को सपा से टिकट मिलने की कहानी भी बहुत दिलचस्प है, वो पिछले साल 2 अक्टूबर को सतीश महाना के घर बाहर बेरोजगारी को लेकर गुलाब लेकर प्रदर्शन करने गए थे. लेकिन अभद्रता और गुंडागर्दी का आरोप लगाकर फतेह बहादुर पर 'गुंडा एक्ट' लगाकर जेल में डाल दिया गया. फतेह बहादुर इसी का दुखड़ा रोते हुए लोगों से बेरोजगारी के मुद्दे पर वोट मांग रहे हैं. लेकिन जब NDTV ने मंत्री सतीश महाना से बेरोजगारी पर बात की, तो उन्होंने कहा कि यूपी में बेरोजगारी है ही नहीं.

NDTV से बात करते हुए फतेह बहादुर सिंह ने कहा कि, "भैया वो मंत्री हैं तो ऊपर हैं. हम जमीन पर हैं. हम 2 अक्टूबर को गुलाब लेकर गए थे. लेकिन हमें जेल में डलवा दिया गया."

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मालूम हो कि कानपुर को देश की औद्योगिक राजधानी कहा जाता था. लेकिन अब यहां कि ज्यादातर फैक्ट्रियां या तो बंद हो चुकी है या किसी और शहर में शिफ्ट हो चुकी है. हालांकि कानपुर बीजेपी का साथ दे रहा है पर इस बार हर सीट पर बीजेपी को कड़ी चुनौती मिल रही है.