उत्तर प्रदेश में भाजपा की ऐतिहासिक वापसी हुई है. तीन दशकों में पहली बार, राजनीतिक रूप से भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्य यूपी में एक पार्टी फिर से चुनकर सत्ता में आई है, जो अगामी लोकसभा चुनावों के लिए भी एक संकेत है. भाजपा ने पांच में से चार राज्यों में जीत हासिल की, वहीं पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की "सुनामी" आज के चुनाव परिणामों की दूसरी बड़ी कहानी है.
नतीजे आने के बाद उत्तराखंड को छोड़कर हर राज्य में भाजपा को सकारात्मक बढ़त मिली है, जहां उसके वोट बैंक में 2 फीसदी से भी कम की गिरावट देखने को मिली है.
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वहीं जहां कांग्रेस का चार राज्यों में खराब प्रदर्शन देखने को मिलता तो वहीं उत्तराखंड में पार्टी को बढ़त मिली है. हालांकि कांग्रेस को उत्तराखंड में वापसी या कम से कम करीबी मुकाबले की उम्मीद थी, लेकिन 70 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी को 18 सीटें ही हासिल हो सकीं, जबकि भाजपा आसानी से बहुमत (48) प्राप्त कर सकी. कांग्रेस न केवल पंजाब हार गई, बल्कि सभी राज्यों में भी बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा.

उत्तर प्रदेश में गैर-समाजवादी पार्टी विपक्ष यानी मायावती की बसपा, कांग्रेस और अन्य के वोटों में 18% की गिरावट आई. लेकिन यह सब वोट समाजवादी पार्टी को नहीं गए बल्कि इसमें से लगभग 4% भाजपा के पास गया और 14% समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगियों के पास गया.
अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के अलावा विपक्ष को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन सभी का वोट अन्य विपक्षी दलों को नहीं मिला. भाजपा की सबसे बड़ी जीत पश्चिमी, उत्तरपूर्वी, दोआब और बुंदेलखंड क्षेत्र में हुई, जो सबसे पिछड़ा था. यहां पार्टी की जीत 12 से 15 फीसदी के भारी अंतर से हुई है.

वहीं समाजवादी पार्टी ने रोहिलखंड, पूर्व और अवध क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया.
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