
कोच्चि:
केरल उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश ने सूर्यनेल्ली सामूहिक बलात्कार मामले में यह कहकर 35 आरोपियों को बरी करने के अपने फैसले का बचाव करके विवाद शुरू कर दिया कि पीड़िता का बाल वेश्यावृत्ति में इस्तेमाल किया गया था और उसके साथ बलात्कार नहीं हुआ था।
राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन पर इस मामले में कथित रूप से शामिल होने के आरोप हैं। न्यायमूर्ति आर बसंत को मलयालम टेलीविजन चैनल पर यह कहते हुए दिखाया गया, ‘यह साबित करने के पर्याप्त सबूत थे कि लड़की का इस्तेमाल बाल वेश्यावृत्ति में किया गया जो कि बलात्कार नहीं है।’ न्यायमूर्ति बसंत उस दो न्यायाधीशों वाली पीठ में शामिल थे जिसने वर्ष 2005 में इस मामले के आरोपियों को बरी किया था।
विवाद शुरू होने के बाद न्यायमूर्ति बसंत ने बाद में कहा कि उनका बयान छुपे कैमरे का इस्तेमाल करके रिकार्ड किया गया।
न्यायमूर्ति बसंत ने कहा कि उन्होंने कैमरे पर टेलीविजन पत्रकार से बात करने से इनकार कर दिया था लेकिन वहां पर कोई छुपा कैमरा था। उन्होंने कहा, ‘मैं उसमें फंस गया। मुझे पता है कि मैंने क्या कहा है। मैं यही कह सकता हूं कि फैसले को देखिये।’ उन्होंने कहा कि वह केवल फैसले से उद्धृत कर रहे थे और यह एक अनौपचारिक बातचीत थी।
राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन पर इस मामले में कथित रूप से शामिल होने के आरोप हैं। न्यायमूर्ति आर बसंत को मलयालम टेलीविजन चैनल पर यह कहते हुए दिखाया गया, ‘यह साबित करने के पर्याप्त सबूत थे कि लड़की का इस्तेमाल बाल वेश्यावृत्ति में किया गया जो कि बलात्कार नहीं है।’ न्यायमूर्ति बसंत उस दो न्यायाधीशों वाली पीठ में शामिल थे जिसने वर्ष 2005 में इस मामले के आरोपियों को बरी किया था।
विवाद शुरू होने के बाद न्यायमूर्ति बसंत ने बाद में कहा कि उनका बयान छुपे कैमरे का इस्तेमाल करके रिकार्ड किया गया।
न्यायमूर्ति बसंत ने कहा कि उन्होंने कैमरे पर टेलीविजन पत्रकार से बात करने से इनकार कर दिया था लेकिन वहां पर कोई छुपा कैमरा था। उन्होंने कहा, ‘मैं उसमें फंस गया। मुझे पता है कि मैंने क्या कहा है। मैं यही कह सकता हूं कि फैसले को देखिये।’ उन्होंने कहा कि वह केवल फैसले से उद्धृत कर रहे थे और यह एक अनौपचारिक बातचीत थी।
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