
सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में पुलिस की एफआईआर कई खुलासे कर रही है। एनडीटीवी को मिली इस एफआईआर में खुलासा हुआ है कि सुनंदा के शरीर पर मिले 15 जख्म मौत से 12 घंटे से 4 दिनों के बीच के हैं।
साल 2015 के पहले दिन दर्ज हुई इस एफआईआर में सुंनदा पुष्कर की मौत से जुड़े कई खुलासे हैं, इसमें सुंनदा की मौत से लेकर एफआईआर दर्ज होने तक का सिलसिलेवार ब्योरा है।
एफआईआर में सुनंदा केस में वक्त-वक्त पर आई मेडिकल रिपोर्ट का भी जिक्र है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, सुनंदा के शरीर पर चोट के 15 निशान हैं, जो मौत से 12 घंटे से 4 दिनों के बीच के हैं। पुलिस के सामने सवाल यह है कि 15 जनवरी के बीच किन हालातों में ये जख्म लगे। एफआईआर में और भी जानकारियां हैं। इनमें जख्म नंबर 10 इंजेक्शन का निशान है, जबकि जख्म नंबर 12 दांत से काटने का, लेकिन 1 मई 2014 को सीएफएसएल की रिपोर्ट में न तो इंजेक्शन के बारे में जानकारी मिली और न ही दांत से काटे जाने का सलाइवा मिला, सवाल यहीं खत्म नहीं होते।
27 सितंबर 2014 को विसरा पर राय दी कि मौत की वजह जहर से हुई। विसरा में इथाइल अल्कोहल, कैफीन, एसीटोमिनोफिन और कोटिनन के अंश मिले, लेकिन जहर की पहचान नहीं हुई।
इसी कारण 5 नवंबर 2014 को मेडिकिल बोर्ड ने खुद होटल जाकर जांच की और फिर से जांच के बाद 29 दिसंबर को बोर्ड ने रिपोर्ट में साफ किया कि मौत जहर से और आप्राकृतिक तरीके से हुई। जहर मुंह के जरिये दिया गया, लेकिन इंजेक्शन से भी इनकार नहीं किया।
इसी मामले में पुलिस नारायण सिंह समेत उन तमाम लोगों से पूछताछ में जुटी है, जो मौत से 4 दिन पहले तक सुनंदा के साथ थे।
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