
नई दिल्ली:
अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में एक इतिहास बना, जब भारतीय वायुसेना का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान सुखोई 30 उतरा. ये पहली बार है कि चीन से सटे एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) को अपग्रेड किया गया है.
गौरतलब है कि यहां से चीन की सरहद करीब 80 किलोमीटर दूर है. इस एएलजी का उद्घाटन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू ने किया. इसका सीधा मकसद है जरूरत पड़ने पर भारतीय लड़ाकू विमान यहां से उड़ान भर सकते हैं और किसी भी चुनौती का जवाब दे सकते हैं. बेशक सुखोई को चार दशमलव पांच पीढ़ी का लड़ाकू विमान माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में यह चीन के लड़ाकू विमानों को छकाने में माहिर है.

करीब एक हजार करोड़ की लागत से ऐेसे 10 एएलजी को अपग्रेड किया जा रहा है. सामरिक नजरिए के साथ पासीघाट एएलजी के अपग्रेड होने से इलाके में पर्यटन का भी विकास होगा. इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल 1962 में चीन से युद्ध से पहले हुआ करता था, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया था. अब इसे फिर से अपग्रेड करके दुरुस्त किया गया है.
अरुणाचल के वालौंग, जीरो, अलौंग, मेचूका और पालीघाट एडवांस लैंडिंग ग्राउंड पूरी तरह ऑपरेशनल हो गए हैं और उम्मीद है कि इस साल के अंत तक टूटिंग और तवांग भी ऑपरेशनल हो जाएंगे.
गौरतलब है कि यहां से चीन की सरहद करीब 80 किलोमीटर दूर है. इस एएलजी का उद्घाटन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू ने किया. इसका सीधा मकसद है जरूरत पड़ने पर भारतीय लड़ाकू विमान यहां से उड़ान भर सकते हैं और किसी भी चुनौती का जवाब दे सकते हैं. बेशक सुखोई को चार दशमलव पांच पीढ़ी का लड़ाकू विमान माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में यह चीन के लड़ाकू विमानों को छकाने में माहिर है.

करीब एक हजार करोड़ की लागत से ऐेसे 10 एएलजी को अपग्रेड किया जा रहा है. सामरिक नजरिए के साथ पासीघाट एएलजी के अपग्रेड होने से इलाके में पर्यटन का भी विकास होगा. इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल 1962 में चीन से युद्ध से पहले हुआ करता था, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया था. अब इसे फिर से अपग्रेड करके दुरुस्त किया गया है.
अरुणाचल के वालौंग, जीरो, अलौंग, मेचूका और पालीघाट एडवांस लैंडिंग ग्राउंड पूरी तरह ऑपरेशनल हो गए हैं और उम्मीद है कि इस साल के अंत तक टूटिंग और तवांग भी ऑपरेशनल हो जाएंगे.
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