
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली:
मेडिकल एंट्रेस टेस्ट नीट (NEET) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, 'जो छात्र नीट प्रथम चरण में बैठे थे उन्हें दूसरे चरण के नीट में बैठने की इजाजत नहीं दी जा सकती बल्कि जो छात्र प्रथम चरण के नीट में नहीं बैठ सके थे उन्हें दूसरे चरण के नीट में बैठने की इजाजत दी जा सकती है।'
दो फेज में नीट आयोजित करवाने का आदेश दिया था...
28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई और एमसीआई को एक मई और 24 जुलाई को दो फेज में NEET आयोजित करने का आदेश दिया था। पीठ ने इस बात के भी संकेत दिए थे कि वह सिर्फ मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए राज्यों को दाखिले की प्रक्रिया के लिए अपनी परीक्षा लेने की अनुमति देने पर विचार कर सकती है। अदालत ने कहा था, 'जो छात्र राज्यों द्वारा आयोजित परीक्षा में बैठ चुके हैं या बैठने वाले हैं उसके संबंध में मुद्दे का राज्य के कानूनों के अनुरूप सॉलीसीटर जनरल को सुनने के बाद फैसला किया जाएगा।' अपने अंतरिम आदेश में न्यायालय ने निजी कॉलेजों के अलग से प्रवेश परीक्षा लेने के बारे में अपने पुराने रुख को दोहराया।
कोर्ट ने कहा था कि 'यह स्पष्ट किया जाता है कि एमबीबीएस या बीडीएस की पढ़ाई के लिए किसी निजी कॉलेज या एसोसिएशन या किसी निजी, डीम्ड विश्वविद्यालय को कोई परीक्षा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।' संक्षिप्त सुनवाई के दौरान मेडिकल काउन्सिल ऑफ इंडिया जिसने पहले कुछ राज्यों की याचिकाओं का विरोध किया था जिसमें उन्होंने अपनी प्रवेश परीक्षा को जारी रखने की अनुमति मांगी थी, उसने हालांकि अदालत से कहा कि उन्हें सिर्फ इस साल के लिए अनुमति दी जा सकती है।
दो फेज में नीट आयोजित करवाने का आदेश दिया था...
28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई और एमसीआई को एक मई और 24 जुलाई को दो फेज में NEET आयोजित करने का आदेश दिया था। पीठ ने इस बात के भी संकेत दिए थे कि वह सिर्फ मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए राज्यों को दाखिले की प्रक्रिया के लिए अपनी परीक्षा लेने की अनुमति देने पर विचार कर सकती है। अदालत ने कहा था, 'जो छात्र राज्यों द्वारा आयोजित परीक्षा में बैठ चुके हैं या बैठने वाले हैं उसके संबंध में मुद्दे का राज्य के कानूनों के अनुरूप सॉलीसीटर जनरल को सुनने के बाद फैसला किया जाएगा।' अपने अंतरिम आदेश में न्यायालय ने निजी कॉलेजों के अलग से प्रवेश परीक्षा लेने के बारे में अपने पुराने रुख को दोहराया।
कोर्ट ने कहा था कि 'यह स्पष्ट किया जाता है कि एमबीबीएस या बीडीएस की पढ़ाई के लिए किसी निजी कॉलेज या एसोसिएशन या किसी निजी, डीम्ड विश्वविद्यालय को कोई परीक्षा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।' संक्षिप्त सुनवाई के दौरान मेडिकल काउन्सिल ऑफ इंडिया जिसने पहले कुछ राज्यों की याचिकाओं का विरोध किया था जिसमें उन्होंने अपनी प्रवेश परीक्षा को जारी रखने की अनुमति मांगी थी, उसने हालांकि अदालत से कहा कि उन्हें सिर्फ इस साल के लिए अनुमति दी जा सकती है।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं