
देश भर में फैज अहमद फैज की कविता को लेकर चल रहे विवाद के बीच RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इंदौर में एक न्यास के उद्घाटन कार्यक्रम में अल्लामा इकबार का शेर पढ़ा. उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "हिंदू समाज ने प्राचीन समय से लेकर आज तक कई बातें झेली हैं, तो कई उपलब्धियां हासिल भी की हैं. पिछले पांच हजार वर्षों में आए उतार-चढ़ावों के बावजूद हिंदू समाज के प्राचीन जीवन मूल्य भारत में आज भी प्रत्यक्ष तौर पर देखने को मिलते हैं."उन्होंने कहा, "दुनिया के बाकी देशों के प्राचीन जीवन मूल्य मिट गए. कई देशों का तो नामो-निशान ही मिट चुका है. परंतु हमारे जीवन मूल्य अब तक नहीं बदले हैं. इसलिए इकबाल ने कहा है- "यूनान, मिस्र, रोमां, सब मिट गए जहां से…. कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी."
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भागवत ने आगे कहा, "...और यह बात है- हमारा धर्म. यहां धर्म से तात्पर्य किसी संप्रदाय विशेष से नहीं, बल्कि मनुष्यों के सह अस्तित्व से जुड़े मूल्यों से है. धर्म समन्वित और संतुलित तरीके से जीवन जीने का तरीका है जिसमें महत्व इस बात का है कि हम दूसरों को क्या दे रहे हैं और उनके भले के लिए क्या कर रहे हैं?"संघ प्रमुख ने परोपकार की भावना पर जोर देते हुए कहा कि भौतिकता के तमाम बदलावों के बावजूद भारत में दान की परंपरा हमेशा जीवंत रहनी चाहिए.
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संघ की तरफ से जारी बयान के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत की अगुवाई में संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों की इंदौर में पांच से सात जनवरी के बीच देश के मौजूदा हालात पर चर्चा के लिए बैठक चल रही है. हालांकि बैठक के विषयों को लेकर बयान में कोई जानकारी नहीं दी गई है.गौरतलब है कि संघ का यह विचार मंथन ऐसे समय में यहां हो रहा है, जब संशोधित नागरिकता कानून और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के समर्थन और विरोध में देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं.
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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं