
प्रतीकात्मक फोटो.
नई दिल्ली:
अब वाहनों व अन्य यूनिटों की तरह पटाखों के प्रदूषण के भी मानक तय होंगे. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पटाखों के मानक तय करने की प्रक्रिया जारी है. बोर्ड ने कहा कि 15 सितंबर तक मानक तय कर लिए जाएंगे.
वहीं मानक तय होने तक सुप्रीम कोर्ट ने पटाखा निर्माताओं को पटाखों बनाने में लिथियम, लेड, मरक्यूरी, एंटीमोनी व आर्सेनिक का इस्तेमाल न करने के आदेश जारी किए हैं.
जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को सुनवाई के दौरान पाया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास ऐसा कोई मानक नहीं है कि पटाखों से कितना वायु प्रदूषण होता है. बोर्ड के सदस्य सचिव एबी अकोलकर ने बताया कि मानक 15 सितंबर तक तय कर लिए जाएंगे.
यह भी पढ़ें - दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री और स्टॉक रखने पर रोक जारी रहेगी : सुप्रीम कोर्ट
गौरतलब है पिछले साल 25 नवंबर को दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में पटाखों की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पूरे एनसीआर में पटाखों की बिक्री के लिए कोई नया लाइसेंस नहीं देने और पहले से जारी लाइसेंस को निलंबित करने के आदेश दिए थे.
इसके साथ कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, CPCB तीन महीने में रिपोर्ट दाखिल कर बताए कि पटाखों में किस तरह की सामग्री इस्तेमाल किया जा रही है.'
यह भी पढ़ें - तिरुपति : पटाखा गोदाम में आग लगी, दो बच्चों की मौत, एक घायल
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के खिलाफ तीन बच्चों की याचिका पर यह फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले ही संकेत दिया था कि दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर रोक लग सकती है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जिस तरह ड्रिंक करने वालों को बस बहाना चाहिए. सुख हो या दुःख उन्हें तो बस ड्रिंक करने का मौका चाहिए. ठीक उसी तरह पटाखों को लेकर भी लोग यही करते हैं.
अधिकारों को लेकर लोगों का सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाना कोई नहीं बात नहीं है, लेकिन यह अपने तरह का अलग मामला है जब 6 से 14 महीने के बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर साफ हवा में सांस लेने के अधिकार की मांग करते हुए निर्देश देने की मांग की थी.
VIDEO : आतिशबाजी से प्रदूषण
इस याचिका में मांग की गई थी कि दशहरा और दीवाली जैसे त्योहारों पर पटाखों की ब्रिकी पर रोक लगाई जाए. इन बच्चों अर्जुन गोपाल, आरव भंडारी और जोया राव की ओर से उनके पिताओं ने दायर जनहित याचिका में कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के चलते हालात खराब हो रहे हैं. दिल्ली में त्योहार के वक्त पटाखों की वजह से कई बीमारियां भी हो रही हैं. इसके अलावा रोक के बावजूद खुले में मलबा भी फेंका जा रहा है. इसके साथ ही राजधानी के आसपास करीब 500 टन फसलों के अवशेष जलाए जाते हैं. इतना ही नहीं ट्रकों की वजह से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है और इनकी वजह से फेंफड़े संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट कोई ठोस दिशा निर्देश जारी करे और प्रदूषण पर रोक लगाए.
वहीं मानक तय होने तक सुप्रीम कोर्ट ने पटाखा निर्माताओं को पटाखों बनाने में लिथियम, लेड, मरक्यूरी, एंटीमोनी व आर्सेनिक का इस्तेमाल न करने के आदेश जारी किए हैं.
जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को सुनवाई के दौरान पाया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास ऐसा कोई मानक नहीं है कि पटाखों से कितना वायु प्रदूषण होता है. बोर्ड के सदस्य सचिव एबी अकोलकर ने बताया कि मानक 15 सितंबर तक तय कर लिए जाएंगे.
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गौरतलब है पिछले साल 25 नवंबर को दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में पटाखों की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पूरे एनसीआर में पटाखों की बिक्री के लिए कोई नया लाइसेंस नहीं देने और पहले से जारी लाइसेंस को निलंबित करने के आदेश दिए थे.
इसके साथ कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, CPCB तीन महीने में रिपोर्ट दाखिल कर बताए कि पटाखों में किस तरह की सामग्री इस्तेमाल किया जा रही है.'
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सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के खिलाफ तीन बच्चों की याचिका पर यह फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले ही संकेत दिया था कि दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर रोक लग सकती है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जिस तरह ड्रिंक करने वालों को बस बहाना चाहिए. सुख हो या दुःख उन्हें तो बस ड्रिंक करने का मौका चाहिए. ठीक उसी तरह पटाखों को लेकर भी लोग यही करते हैं.
अधिकारों को लेकर लोगों का सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाना कोई नहीं बात नहीं है, लेकिन यह अपने तरह का अलग मामला है जब 6 से 14 महीने के बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर साफ हवा में सांस लेने के अधिकार की मांग करते हुए निर्देश देने की मांग की थी.
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इस याचिका में मांग की गई थी कि दशहरा और दीवाली जैसे त्योहारों पर पटाखों की ब्रिकी पर रोक लगाई जाए. इन बच्चों अर्जुन गोपाल, आरव भंडारी और जोया राव की ओर से उनके पिताओं ने दायर जनहित याचिका में कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के चलते हालात खराब हो रहे हैं. दिल्ली में त्योहार के वक्त पटाखों की वजह से कई बीमारियां भी हो रही हैं. इसके अलावा रोक के बावजूद खुले में मलबा भी फेंका जा रहा है. इसके साथ ही राजधानी के आसपास करीब 500 टन फसलों के अवशेष जलाए जाते हैं. इतना ही नहीं ट्रकों की वजह से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है और इनकी वजह से फेंफड़े संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट कोई ठोस दिशा निर्देश जारी करे और प्रदूषण पर रोक लगाए.
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