
नई दिल्ली:
विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची में एक भी भारतीय संस्थान के नहीं होने पर अफसोस जताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारतीय शिक्षण संस्थान तीव्र बदलावों के साथ कदमताल करने में विफल रहे।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन संस्थानों में लचीलापन लाए जाने की जरूरत है ताकि अच्छे शिक्षक उनकी ओर आकर्षित हो सकें और शिक्षण स्तर ऊंचा हो क्योंकि उच्चतर शिक्षा संस्थानों की अक्सर इस बात के लिए आलोचना की जाती है कि यह शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए अनावश्यक सख्त है। उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के सम्मेलन में कहा, ‘हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि हमारे कई शिक्षण संस्थान उपयुक्त स्तर तक नहीं पहुंचे हैं। उनमें से कई ने हाल के वर्ष में हमारे आसपास हुए तीव्र बदलावों के अनुसार अपने को नहीं ढाला, वे बस ऐसे स्नातक पैदा कर रहे हैं जिनकी नौकरियों के बाजार में कोई जरूरत नहीं है।’
उनकी चिंता इस बात से भी है कि दुनिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में एक भी भारतीय विश्वविद्यालय नहीं है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन संस्थानों में लचीलापन लाए जाने की जरूरत है ताकि अच्छे शिक्षक उनकी ओर आकर्षित हो सकें और शिक्षण स्तर ऊंचा हो क्योंकि उच्चतर शिक्षा संस्थानों की अक्सर इस बात के लिए आलोचना की जाती है कि यह शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए अनावश्यक सख्त है। उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के सम्मेलन में कहा, ‘हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि हमारे कई शिक्षण संस्थान उपयुक्त स्तर तक नहीं पहुंचे हैं। उनमें से कई ने हाल के वर्ष में हमारे आसपास हुए तीव्र बदलावों के अनुसार अपने को नहीं ढाला, वे बस ऐसे स्नातक पैदा कर रहे हैं जिनकी नौकरियों के बाजार में कोई जरूरत नहीं है।’
उनकी चिंता इस बात से भी है कि दुनिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में एक भी भारतीय विश्वविद्यालय नहीं है।
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