नई दिल्ली:
खुद को भ्रष्टाचार का स्रोत बताए जाने से आहत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विपक्ष की नेता को चुनौती दी कि वह पिछले 41 सालों के उनके सार्वजनिक जीवन के दौरान की उनके और परिवार के सदस्यों की संपत्ति की जांच करा लें और अगर इसमें गलती पाई जाती है तो वह उनका (सुषमा) कोई भी फैसला मानने को तैयार हैं। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लोकसभा में कल चर्चा की शुरूआत करने वाले भाजपा के मुरली मनोहर जोशी के आरोपों का जवाब देते हुए मनमोहन सिंह ने सदन में कहा, प्रधानमंत्री के रूप में पिछले सात साल में निसंदेह मैंने कुछ गलतियां की होंगी। किससे गलती नहीं होती? गलती करना मानव स्वभाव है लेकिन भ्रष्टाचार के षड़यंत्र में शामिल होने का मुझ पर आरोप लगाए जाने का मैं दृढ़ता से खंडन करता हूं। उन्होंने कल हुई चर्चा का जवाब देते हुए आज कहा,मैं इस सदन में कहना चाहता हूं कि देश की सेवा में मैंने 41 साल सार्वजनिक जीवन में बिताए हैं। सार्वजनिक जीवन के इन 41 सालों में 20 साल संसद में रहते हुए मैंने अपने काबलियत के अनुरूप देश की सेवा करने का प्रयास किया। सिंह ने कहा कि देश का सम्मान बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने तरीके से थोड़ा बहुत योगदान किया है और ऐसे में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने से वह आहत हुए हैं। उन्होंने कहा, मैं इतना कहना चाहूंगा कि अगर मैंने कोई गलत काम किया है तो मैं विपक्ष की नेता को निमंत्रण देता हूं कि पिछले 41 सालों में मेरे और मेरे परिवार द्वारा अर्जित संपत्ति की वह जांच कर लें, अगर वह यह पाएं कि मैंने या मेरे परिवार के किसी सदस्य ने यह संपत्ति अर्जित करने में सार्वजनिक पद का इस्तेमाल किया है तो मैं उनका कोई भी फैसला मानने को तैयार हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक वित्त मंत्री के रूप में जब उन्होंने अपना कार्यभार संभाला तो उन्हें एक ऐसी अर्थव्यवस्था मिली जो दीवालिया थी। विदेशी मुद्रा कोष पूरी तरह खाली था। देश की रिण साख गंभीर संदेह के घेरे में थी। उन्होंने कहा,हमने अर्थव्यवस्था को बदल दिया... हमने यह सुनिश्चित किया कि यह दीवालिया अर्थव्यवस्था जो हमें विरासत में मिली है , विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाए। मनमोहन ने कहा कि विपक्षी सदस्य चाहे जो कहें, आज सचाई यह है कि भारत का पूरे विश्व में सम्मान है और यह हमारी अर्थव्यवस्था के मजबूत होने, हमारी राजनीति और हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण हुआ है। प्रधानमंत्री जिस समय विपक्ष के आरोपों का जवाब दे रहे थे उन पर यह आरोप लगाने वाले जोशी सदन में मौजूद नहीं थे। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी सदन में थे लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री के पलट वारों पर मौन साधे रखा।