
सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो
नई दिल्ली:
PNB स्कैम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका का केंद्र सरकार ने विरोध किया. केंद्र सरकार की ओर से एजी ने कहा कि मामले की FIR दर्ज हो चुकी है और गिरफ्तारी हो रही है. वहीं याचिकाकर्ता ने केंद्र के रुख का विरोध किया और कहा कि ये आम लोगों से जुडा मामला है. इस पर कोर्ट को सुनवाई करनी चाहिए. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में दखल देने से इंकार किया. कोर्ट में सुनवाई के दौरान अच्छी खासी गहमागहमी हुई. कोर्ट ने कहा कि ये जनहित नहीं पब्लिसिटी इंटरेस्ट याचिका लगती है.
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याचिकाकर्ता ने इसका विरोध किया तो कहा कि लोगों की भावनाएं जुडी हैं. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि हमें लगता है कि इस मामले में सरकार को जांच करने देनी चाहिए. ये जनहित याचिका का मिसयूज है. मीडिया में खबर आती है और लोग याचिका लेकर आ जाते हैं. याचिकाकर्ता ने कहा कि ये अपमानजनक बात है. सरकार को इसके लिए जवाबदेह होना चाहिए. हजारों किसानों को परेशान किया जा रहा है और सरकार ने एक व्यक्ति को जाने दिया.
चीफ जस्टिस ने गुस्से में कहा कि भाषणबाजी का कोई असर कोर्ट पर नहीं पड़ेगा. कानून पर बात की जानी चाहिए. किसी भी देश में ऐसा नहीं होता कि एजी की बात ना सुनी जाए. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा कि इस मामले में 16 मार्च को अपना पक्ष रखे कि वो क्यों इसका विरोध कर रही है. फिलहाल कोर्ट ने कोई नोटिस जारी नही किया. वकील विनीत ढांडा ने याचिका में कहा है कि इस मामले में पंजाब नेशनल बैंक के वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज कर कारवाई की जाए.
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केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि नीरव मोदी को जल्द दो महीने के भीतर प्रत्यार्पण किया जाए. दस करोड रुपये से ऊपर के बैंक लोन के लिए गाइडलाइन बनाई जाए. जो लोग लोन डिफाल्टर हैं उनकी संपत्ति तुरंत सीज करने जैसे नियम बनाए जाएं. एक एक्सपर्ट पैनल का गठन हो जो बैंकों द्वारा 500 करोड और उससे ज्यादा के लोन का अध्ययन कर कोर्ट को दे और इसे सार्वजनिक किया जाए. ललित मोदी, विजय माल्या आदि का उदाहरण देते हुए याचिका में ये भी कहा गया है कि बड़े लोगों को राजनीतिक लोगों का सरंक्षण प्राप्त होता है इसलिए वे पकड़ में नहीं आते जबकि गरीब किसानों की संपत्ति जब्त कर ली जाती है जिससे उन्हें खुदकुशी करनी पड़ती है. याचिका में कहा गया है कि इस तरह के घोटालों ने देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है. सुप्रीम कोर्ट में एक और जनहित याचिका में कहा गया कि इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक SIT की टीम का गठन किया जाए. साथ ही ये भी मांग की गई कि जांच की निगरानी खुद सुप्रीम कोर्ट करे.
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याचिकाकर्ता ने इसका विरोध किया तो कहा कि लोगों की भावनाएं जुडी हैं. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि हमें लगता है कि इस मामले में सरकार को जांच करने देनी चाहिए. ये जनहित याचिका का मिसयूज है. मीडिया में खबर आती है और लोग याचिका लेकर आ जाते हैं. याचिकाकर्ता ने कहा कि ये अपमानजनक बात है. सरकार को इसके लिए जवाबदेह होना चाहिए. हजारों किसानों को परेशान किया जा रहा है और सरकार ने एक व्यक्ति को जाने दिया.
चीफ जस्टिस ने गुस्से में कहा कि भाषणबाजी का कोई असर कोर्ट पर नहीं पड़ेगा. कानून पर बात की जानी चाहिए. किसी भी देश में ऐसा नहीं होता कि एजी की बात ना सुनी जाए. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा कि इस मामले में 16 मार्च को अपना पक्ष रखे कि वो क्यों इसका विरोध कर रही है. फिलहाल कोर्ट ने कोई नोटिस जारी नही किया. वकील विनीत ढांडा ने याचिका में कहा है कि इस मामले में पंजाब नेशनल बैंक के वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज कर कारवाई की जाए.
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केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि नीरव मोदी को जल्द दो महीने के भीतर प्रत्यार्पण किया जाए. दस करोड रुपये से ऊपर के बैंक लोन के लिए गाइडलाइन बनाई जाए. जो लोग लोन डिफाल्टर हैं उनकी संपत्ति तुरंत सीज करने जैसे नियम बनाए जाएं. एक एक्सपर्ट पैनल का गठन हो जो बैंकों द्वारा 500 करोड और उससे ज्यादा के लोन का अध्ययन कर कोर्ट को दे और इसे सार्वजनिक किया जाए. ललित मोदी, विजय माल्या आदि का उदाहरण देते हुए याचिका में ये भी कहा गया है कि बड़े लोगों को राजनीतिक लोगों का सरंक्षण प्राप्त होता है इसलिए वे पकड़ में नहीं आते जबकि गरीब किसानों की संपत्ति जब्त कर ली जाती है जिससे उन्हें खुदकुशी करनी पड़ती है. याचिका में कहा गया है कि इस तरह के घोटालों ने देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है. सुप्रीम कोर्ट में एक और जनहित याचिका में कहा गया कि इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक SIT की टीम का गठन किया जाए. साथ ही ये भी मांग की गई कि जांच की निगरानी खुद सुप्रीम कोर्ट करे.