New Delhi:
विपक्षी दलों ने गुरुवार को मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के पीछे किन विदेशी शक्तियों का हाथ है। सरकार ने अन्ना के आंदोलन के पीछे कथित विदेशी शक्तियों का हाथ होने की बात कही थी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता वेंकैया नायडू ने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा, कांग्रेस का बयान न केवल बुरा है, बल्कि वह बेवकूफी भरा भी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को संसद में अन्ना की गिरफ्तारी पर दिए अपने बयान में कहा था, भारत एक अभरती हुई अर्थव्यवस्था है। अब हम विश्व मंच पर एक अहम शख्सियत के रूप में उभर रहे हैं। ऐसी कई ताकतें हैं जो भारत को दुनिया के देशों में उसकी सही जगह पर देखना नहीं चाहती। हमें उनके हाथों की कठपुतली नहीं बनना चाहिए। नायडू ने कहा, प्रधानमंत्री बताएं कि उनके इस कथन का क्या मतलब है। वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी राजा ने कहा, वे कौन सी शक्तियां हैं, जो हमारा विकास रोकने की कोशिश कर रही हैं, प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने भी बुधवार को अन्ना की प्रभावी लोकपाल की मांग में विदेशी शक्तियों का हाथ होने की आशंका जताई थी। अल्वी ने कहा था, हमें सच का पता लगाना होगा कि अमेरिका इस आंदोलन को क्यों समर्थन दे रहा है। अन्ना हजारे ने मंगलवार से यहां जन लोकपाल विधेयक के समर्थन में अनशन की योजना बनाई थी। दिल्ली पुलिस ने उन्हें विरोध-प्रदर्शन की इजाजत देने से पहले उनके सामने कुछ शर्तें रखी थीं। अन्ना हजारे ने इन शर्तों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद मंगलवार को उन्हें व उनकी टीम के अन्य सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया। उन्हें गिरफ्तारी के बाद रिहा भी कर दिया गया, लेकिन उन्होंने जेल से बाहर जाने से मना कर दिया था, लेकिन अब वह यहां रामलीला मैदान में 15 दिन का अनशन शुरू करेंगे।
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