
दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन पहचान
नई दिल्ली:
दिल्ली में हर साल सबसे ज्यादा गरीब तबके के निवास वाले इलाकों से हजारों बच्चे गायब हो जाते हैं। इनमें से कई बच्चों के मां-बाप के पास उनकी तस्वीर तक नहीं होती। अब पुलिस ने 'ऑपरेशन पहचान' शुरू किया है जिसके तहत वह खुद बच्चों और उनके घरवालों की तस्वीरें खींचकर पूरा डेटा तैयार कर रही है।
पश्चिम बिहार इलाके की मीरा बाग झुग्गी में हो रही फोटोग्राफी के पीछे एक खास मकसद है। आप चाहें तो इसे दिल्ली पुलिस का फोटो सेशन कह लें, जहां डंडे भांजने वाली पुलिस कैमरे पर हाथ आजमा रही है।
अपनी पत्नी और 4 साल की बेटी के साथ आए मोहम्मद हुसैन थोड़े शरमाए- घबराए से दिखे, हालांकि थोड़ी ही देर में उनका फैमिली फोटो सेशन हो गया। यह सब इसलिए है कि बदकिस्मती से परिवार का कोई सदस्य और खासकर बच्चों की गुमशुदगी की हालत में पुलिस रिकार्ड में एक फोटो मौजूद रहेगा। मोहम्मद हुसैन का कहना है कि वह पुलिस की इस मुहिम से बहुत खुश हैं और उम्मीद करते हैं कि कभी उनकी बच्ची खो भी जाए तो पुलिस उसे जल्दी खोज निकालेगी।
मनोज भी अपने पूरे परिवार के साथ आए। जब पुलिस ने उनकी पत्नी से पति का नाम पूछा तो वह शरमा गई। इनके लिए फैमिली फोटो एक यादगार लम्हा है। मनोज और उसकी पत्नी ने बताया कि शादी के बाद पहली बार उनकी फौमिली फोटो खींची गई है। उनके पास अपनी बच्ची की कोई तस्वीर नहीं थी।
ऑपरेशन पहचान के तहत दिल्ली पुलिस फोटो की एक कॉपी बच्चों के घरवालों को देती है, जबकि दूसरी कॉपी और बच्चे के परिवार की जानकारी से भरा एक फार्म अपने पास रखती है।
ज्वाइंट कमिश्नर दीपेंद्र पाठक के मुताबिक यह मुहिम गुमशुदा बच्चों को खोजने में बेहद मददगार होगी, क्योंकि ऐसा कई बार होता है जब हमारे पास बच्चों से जुड़ा कोई सबूत नहीं होता। ऑपरेशन पहचान पूरी दिल्ली में चलाया जा रहा है। कैमरों से लैस पुलिस बच्चों के फोटो एलबम बनाने में जुटी है।
पश्चिम बिहार इलाके की मीरा बाग झुग्गी में हो रही फोटोग्राफी के पीछे एक खास मकसद है। आप चाहें तो इसे दिल्ली पुलिस का फोटो सेशन कह लें, जहां डंडे भांजने वाली पुलिस कैमरे पर हाथ आजमा रही है।
अपनी पत्नी और 4 साल की बेटी के साथ आए मोहम्मद हुसैन थोड़े शरमाए- घबराए से दिखे, हालांकि थोड़ी ही देर में उनका फैमिली फोटो सेशन हो गया। यह सब इसलिए है कि बदकिस्मती से परिवार का कोई सदस्य और खासकर बच्चों की गुमशुदगी की हालत में पुलिस रिकार्ड में एक फोटो मौजूद रहेगा। मोहम्मद हुसैन का कहना है कि वह पुलिस की इस मुहिम से बहुत खुश हैं और उम्मीद करते हैं कि कभी उनकी बच्ची खो भी जाए तो पुलिस उसे जल्दी खोज निकालेगी।
मनोज भी अपने पूरे परिवार के साथ आए। जब पुलिस ने उनकी पत्नी से पति का नाम पूछा तो वह शरमा गई। इनके लिए फैमिली फोटो एक यादगार लम्हा है। मनोज और उसकी पत्नी ने बताया कि शादी के बाद पहली बार उनकी फौमिली फोटो खींची गई है। उनके पास अपनी बच्ची की कोई तस्वीर नहीं थी।
ऑपरेशन पहचान के तहत दिल्ली पुलिस फोटो की एक कॉपी बच्चों के घरवालों को देती है, जबकि दूसरी कॉपी और बच्चे के परिवार की जानकारी से भरा एक फार्म अपने पास रखती है।
ज्वाइंट कमिश्नर दीपेंद्र पाठक के मुताबिक यह मुहिम गुमशुदा बच्चों को खोजने में बेहद मददगार होगी, क्योंकि ऐसा कई बार होता है जब हमारे पास बच्चों से जुड़ा कोई सबूत नहीं होता। ऑपरेशन पहचान पूरी दिल्ली में चलाया जा रहा है। कैमरों से लैस पुलिस बच्चों के फोटो एलबम बनाने में जुटी है।
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