नई शिक्षा नीति में चीनी भाषा का कोई उल्लेख नहीं, जबकि ड्राफ्ट में थी शामिल

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रमेश पोखरियाल द्वारा इस सप्ताह शुरू किए गए एनईपी के फाइनल संस्करण में कोरियाई, रूसी, पुर्तगाली और थाई उदाहरणों की लिस्ट में शामिल किया गया है.

नई शिक्षा नीति में चीनी भाषा का कोई उल्लेख नहीं, जबकि ड्राफ्ट में थी शामिल

नई दिल्ली:

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में माध्यमिक स्कूल के छात्रों के लिए ऐच्छिक भाषाओं की सूची में चीनी भाषा को शामिल नहीं किया गया है. इस कोर्स में छात्र दुनिया की संस्कृतियों के बारे में जानने और वैश्विक ज्ञान को बढ़ाने के लिए हितों और आकांक्षाओं के अनुसार अध्ययन कर सकते हैं. पिछले साल अंग्रेजी में जारी एनईपी के एक ड्राफ्ट में फ्रांसीसी, जर्मन, स्पेनिश और जापानी के साथ-साथ चीनी भाषाओं को सूचीबद्ध किया गया था. जो कि इच्छुक छात्रों के लिए उपलब्ध भाषाओं के उदाहरण के रूप में वर्णित थी. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रमेश पोखरियाल द्वारा इस सप्ताह शुरू किए गए एनईपी के फाइनल संस्करण में कोरियाई, रूसी, पुर्तगाली और थाई उदाहरणों की लिस्ट में शामिल किया गया है.

इस समय यह स्पष्ट नहीं है कि यदि स्कूलों द्वारा प्रस्तुत की जा सकने वाली विदेशी भाषाओं के उदाहरणों की सूची में से चीनी का बहिष्कार का मतलब है कि यह स्कूल स्तर पर उपलब्ध नहीं होगा. उदाहरणों की सूची में से चीनी भाषा को शामिल नहीं किया जाना बीजिंग के साथ बढ़ते सैन्य और आर्थिक तनाव के बीच उठाया गया कदम है. जून महीने में भारत सरकार ने 59 चीनी मोबाइल फोन एप्लिकेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था जिसमें बेहद लोकप्रिय वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म TikTok भी शामिल है. 

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सरकार ने कहा कि एप्स को "उपलब्ध जानकारी के मद्देनजर ब्लॉक किया गया था क्योंकि वे सभी तरह की एक्टिविटी में लगे हुए थे. यह फैसला भारत की संप्रभुता और अखंडता देखते हुए लिया गया है. इस सप्ताह भी सरकार ने 47 चीनी ऐप्स को बैन किया है. ऐसा बताया जा रहा है कि इन ऐप्स का प्रतिबंधित ऐप्स के क्लोन के रूप में संचालन किया जा रहा था. पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों द्वारा 20 भारतीय सैनिकों के मारे जाने के तुरंत बाद चीनी सामान पर बैन लगाए जाने की मांग उठी और सरकार ने इस पर कार्रवाई भी की. गलवान हिंसा के कारण दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव में तेजी से वृद्धि हुई. व्यापक स्तर की सैन्य वार्ता के बाद, जुलाई में दोनों पक्षों द्वारा दो किलोमीटर की दूरी पर सेना को हटाने पर सहमत हुए. 

भारत द्वारा चीनी सामान पर प्रतिबंध को चीन ने डब्ल्यूटीओ नियमों का उल्लंघन बताया. 15 जून के बॉर्डर पर हिंसा के बाद से चीन विरोधी भावना उतपन्न हो रही है. चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए देशभर से आवाज उठी, जो कथित तौर पर भारत को लगभग 60 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात करते हैं, और यहां तक कि चीनी भोजन परोसने वाले रेस्तरां का भी बहिष्कार करने की मांग उठी. यह मांग केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले द्वारा की गई.


क्या स्कूली कोर्स में अब चीनी भाषा नहीं?

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