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This Article is From Jun 15, 2014

सरकार ने विदेशों में कालाधन जमा करने वालों का नाम बताने से किया इनकार

सरकार ने विदेशों में कालाधन जमा करने वालों का नाम बताने से किया इनकार
नई दिल्ली:

विदेशों में जमा कालेधन को देश में वापस लाने की पहल के बीच केंद्र सरकार ने विभिन्न देशों के साथ दोहरे कराधान बचाव समझौते के गोपनीयता प्रावधानों का जिक्र करते हुए विदेशी बैंकों में खाता रखने वाले भारतीयों का ब्योरा देने से इनकार किया है।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत राजस्व विभाग के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने कहा, 'विदेशी प्राधिकरणों से विदेशी बैंकों में खाताधारक भारतीयों के बारे में प्राप्त जानकारी दोहरे कराधान बचाव समझौते के तहत प्राप्त हुई है। संधि के प्रावधानों में यह गोपनीयता संबंधी बातें हैं।'

'इसलिए विभाग को प्राप्त ब्योरे की जानकारी नहीं दी जा सकती है क्योंकि इसे सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8 (1) (ए) और धारा 8 (1) (एफ) के तहत छूट प्राप्त है।'

विभाग ने कहा, 'उसे उच्चतम न्यायालय से ऐसा कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है जिसमें उसे सूचना को सार्वजनिक करने की बात कही गई हो जो भारत सरकार के पास है तथा आवेदक ने जिनका ब्योरा मांगा है।'

सूचना के अधिकार के तहत हिसार स्थित आरटीआई कार्यकर्ता रमेश वर्मा ने सरकार से विदेशी बैंकों में कालाधन जमा करने वाले लोगों का ब्यौरा मांगा था, जिनकी जानकारी भारत सरकार के पास है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने करीब तीन साल तक प्रतिरोध करने के बाद हाल ही में उच्चतम न्यायालय को 18 व्यक्तियों के नामों की जानकारी दी थी, जिन्होंने कथित रूप से जर्मनी के लिंकेस्टाइन में एलएसटी बैंक में कालाधन जमा कर रखा था और जिनके खिलाफ आय कर विभाग ने मुकदमा शुरू किया है।

केंद्र सरकार ने सीलबंद लिफाफे में उन लोगों के नाम भी दिए थे जिनके खिलाफ आठ मामलों में कर चोरी का कोई सबूत नहीं मिला है।

सरकार ने न्यायमूर्ति एचएल दत्तू, न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर की तीन सदस्यीय खंडपीठ से अनुरोध किया था कि इन नामों को सार्वजनिक नहीं किया जाए। जर्मनी के कर विभाग के अधिकारियों से एलजीटी बैंक में भारतीय खाताधारकों के नाम सरकार को 2009 में ही मिल गए थे।

न्यायालय ने इन लोगों के नाम बताने का आदेश 2011 में दिया था। बावजूद इसके सरकार ने ऐसा नहीं किया था और इसके कारण उसे न्यायालय की नाराजगी झेलनी पड़ी थी।

सरकार ने हलफनामे में कहा है कि एलजीटी बैंक में 12 ट्रस्टियों एवं इकाइयों के खातों में जमा अथवा बकाया धनराशि के बारे में मिली राशि की जानकारी दोहरे कराधान से बचाव के बारे में भारत-जर्मन संधि के तहत मार्च 2009 में जर्मनी के कर अधिकारियों से मिली थी।

सरकार के हलफनामे के अनुसार, इसमें भारतीय मूल के 26 व्यक्ति शामिल थे। इन 26 मामलों में से 18 में आय कर विभाग ने जांच पूरी करके 17 मामलों में मुकदमा शुरू किया है। हलफनामे के अनुसार इनमें से एक करदाता की मृत्यु हो चुकी है।

केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नयी सरकार बनने के बाद उसने कालाधन से जुड़े मामले की पड़ताल के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम बी शाह के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

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