क्या भारत कोरोनावायरस के नए स्वरूप से सुरक्षित है?

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. पॉल ने कहा, ‘‘अब तक उपलब्ध आंकड़ों, विश्लेषण के आधार पर कहा जा सकता है कि हमें घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन और सतर्क रहना पड़ेगा. हमें समग्र प्रयासों से इस नई चुनौती से निपटना होगा.'

नई दिल्ली:

ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस के नए स्वरूप  (New Coronavirus strain) ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया है. यह बेहद संक्रामक है. भारत में भी सरकार इसे लेकर अलर्ट है. केंद्र सरकार ने इस बावत चेतावनी जारी की है और पिछले एक महीने में ब्रिटेन से आनेवाले यात्रियों की निगरानी की जा रही है. भारत ने भी ब्रिटेन से आने वाली फ्लाइट्स पर रोक लगा दी है.

इस बीच, नीति आयोग (NITI Ayog) के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी के पॉल (Dr. V K Paul) ने कहा कि देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के नए स्वरूप से घबराने की कोई जरूरत नहीं है. एनडीटीवी से खास बातचीत में उन्होंने कहा, "अब तक उपलब्ध आंकड़ों और जिनोमिक एनालिसिस के आधार पर कहा जा सकता है कि देश में घबराने की कोई बात नहीं लेकिन हमें सतर्क रहना पड़ेगा." पॉल ने कहा, "ब्रिटेन में आए संक्रमण के इस स्वरूप को देखते हुए हमने देश में निगरानी सघन कर दी है और ऐहतियातन कई कदम उठाए हैं लेकिन फिलहाल इस स्ट्रेन के कोई संकेत नहीं मिले हैं." उन्होंने कहा कि हमलोग फिलहाल वेट एंड वाच की स्थिति में हैं.

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स्ट्रेन की भयावहता पर डॉ. पॉल ने कहा, "यह पहले के वायरस से ज्यादा संक्रामक है. एक तरीके से कह सकते हैं कि यह ‘सुपर स्प्रेडर' है लेकिन इससे मृत्यु, अस्पताल में भर्ती होने या गंभीर रूप से बीमार होने का खतरा नहीं बढ़ता है. चिंता की बात सिर्फ यही है कि यह तेजी से फैलता है लेकिन हमें घबराने की जरूरत नहीं है." उन्होंने कहा कि अगर देश में नए स्वरूप का संक्रमण आता है तब ऐसी स्थिति में हमें अस्पतालों में अधिक बेड बढ़ाने होंगे. समाज में भी संक्रमण बढ़ने की आशंका गहरा सकती है. इसलिए उस पर भी सघनता से काम करने होंगे.

पॉल ने कहा कि ब्रिटेन और भारत के बीच अलग-अलग मौसम की स्थिति है, इसलिए संक्रमण की स्थितियां भी अलग-अलग हो सकती हैं लेकिन हमारे वैज्ञानिक दूसरे देशों से मिल रहे इनपुट के आधार पर काम कर रहे हैं और उसपर नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने कहा कि अगर यह संक्रमण फैलता है तब भी हमें घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे सिर्फ संक्रमण फैल सकता है, उससे मौत की दर प्रभावित नहीं हो सकती है.

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डॉ. पॉल ने कहा कि लोगों को संक्रमण से बचने के लिए पहले से बताए गए दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारें खासकर खुद प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री लोगों से संक्रमण से बचाव की अपील कर रहे हैं. इसलिए लोगों को कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए. पॉल ने कहा कि कई वैक्सीन निर्माता कंपनियां वैक्सीन बनाने और उसका लाइसेंस पाने की प्रक्रिया में हैं. उस पर आईसीएमआर और ड्रग कंट्रोलर समेत कई वैज्ञानिकों की नजर है लेकिन हमें यह नहीं मानना चाहिए कि बहुत जल्द करोड़ों वैक्सीन मिल जाएंगे और हम सभी टीका लगा सकेंगे. उन्होंने कहा कि इसमें वक्त लगेगा. 

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टीका कब तक आएगा? इस सवाल पर डॉ. पॉल ने कहा कि इसकी तारीख बताकर हम वैज्ञानिकों पर कोई दवाब नहीं डालना चाहते हैं लेकिन यह बहुत जल्द उपलब्ध होगा क्योंकि यह अंतिम प्रक्रिया में है. उन्होंने कहा कि हम इस दिशा में आशावादी हैं. उन्होंने कहा कि जब तक वैज्ञानिक इसे लोगों के लिए सुरक्षित नहीं बता देते तब तक हम इसे आमजनों को नहीं लगाने की इजाजत दे सकते हैं.


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