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This Article is From Jan 27, 2015

ओबामा के साथ 'मन की बात' में पीएम मोदी ने युवकों से किया दुनिया को एक करने का आह्वान

ओबामा के साथ 'मन की बात' में पीएम मोदी ने युवकों से किया दुनिया को एक करने का आह्वान
फाइल फोटो
नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा फिर एक ही मंच पर दिखे। इस बार मौका था ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित होने वाला प्रधानमंत्री का 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम। यह पहला मौका था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत के प्रधानमंत्री के साथ किसी विशेष रेडियो प्रोग्राम में भाग लिया हो।

इस प्रोग्राम में दोनों नेताओं ने ऑल इंडिया रेडियो के श्रोताओं के कई सवालों के जवाब दिए। सवाल उनके निजी ज़िन्दगी से जुड़े थे और सामाजिक मसलों से भी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले बराक का मतलब समझाया। मोदी ने कहा, 'स्वाहिली भाषा में बराक का मतलब है वह जिसे आशिर्वाद प्राप्त है 'One who is blessed'।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान कम्युनिस्टों के 'दुनिया के मजदूरों एक हो' की तर्ज पर 'युवकों दुनिया को एक करो' का नारा दिया। ओबामा और मोदी से किए गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा, 'एक जमाने में खासकर कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रेरित लोग दुनिया का आह्वान करते थे और कहते थे, 'दुनिया के मजदूरों एक हो' यह नारा कई दशकों तक चलता रहा, लेकिन मैं समझता हूं आज के युवा की जो शक्ति है और जो उसकी पहुंच है, उसे देखते हुए मैं यही कहूंगा, 'युवकों दुनिया को एक करो।' मैं समझता हूं उनमें यह ताकत है और वह ये कर सकते हैं।'

इसके बाद पीएम मोदी ने रख दिया ओबामा के सामने पहला सवाल। कहा एक श्रोता जानना चाहते हैं कि वह अमेरिका वापस जाकर भारत दौरे का अपना अनुभव अपनी बेटियों को कैसे बताएंगे। जवाब में ओबामा ने कहा, 'उनके स्कूल खुले हैं इसलिए वह भारत नहीं आ पाई... मुझे उम्मीद है कि वह मेरे भारत के अगले दौरे के दौरान यहां आने के लिए ज़िद ज़रूर करेंगी। हो सकता है कि मेरे कार्यकाल के दौरान नहीं पर उसके बाद वह ज़रूर उसके बाद भारत आना चाहेंगी'।

पीएम मोदी ने जवाब में कहा, 'मेरा आपको निमंत्रण है। राष्ट्रपति के कार्यकाल में भी आएं या राष्ट्रपति कार्यकाल के बाद भी आएं। भारत आपका और आपकी बेटियों का स्वागत करने को इच्छुक है।

बेटियों के बाद स्वास्थ्य का मसला उठा। ओबामा बोले, फास्ट फुड ज़्यादा हो गया है, शारीरिक मेहनत कम हो गई है- सब मोटे हो रहे हैं। उनकी नज़र में यह ग्लोबल समस्या बन चुकी है और इसके खिलाफ मुहीम छेड़ना ज़रूरी है।

फिर यह रेडियो संवाद आगे बढ़ता रहा... सपनों पर, नौजवानों पर, विवेकानंद पर, मार्क्स पर और बेंजामिन फ्रैंकलीन पर। और इनके बीच ये दिखता रहा कि बराक ओबामा और नरेंद्र मोदी की अपनी केमिस्ट्री भी जमी हुई है। दोनों ने एक-दूसरे की तारीफ़ भी की।

आखिर में प्रधानमंत्री ने कहा उनकी और ओबामा के बीच जो बात हुई है उसकी एक ई-बुक निकाली जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने श्रोताओं से भी गुजारिश की कि वह अपने विचार साझा करें। जो सौ सबसे अच्छे सुझाव होंगे उनको ई-बुक में सम्मिलित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोग #YESWECAN के हैशटैग के साथ अपने सुझाव दे सकते हैं।

इस पूरे कार्यक्रम में दोनों नेताओं ने अपना फोकस व्यक्तिगत पहलुओं और सामाजिक मसलों पर केंद्रित रखा। ज़ाहिर है, इस रेडियो प्रोग्राम के ज़रिये मंशा लोगों से सीधे जुड़ने की थी, उनके साथ सीधे संवाद बनाने की थी।

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