
कोलकाता:
रिटेल क्षेत्र में एफडीआई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर यूपीए सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी ससंद के शीतकालीन सत्र में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी।
ममता ने इस मसले पर यूपीए के सहयोगी दलों और वामपंथी दलों का समर्थन मांगा। उन्होंने यह भी बताया कि वह बीजेपी से वार्ता करने को तैयार हैं। एक प्रेस वार्ता में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा, संसद में हमारी पार्टी के संसदीय नेता सुदीप बंधोपाध्याय शीतकालीन सत्र के पहले दिन अविश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे।
ममता ने कहा, हमने सरकार को सत्ता से बाहर करने और चुनावों के जरिये नई सरकार के गठन के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा, मैं अन्य राजनीतिक दलों से हमारे प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील करती हूं। यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी अपने पूर्व सहयोगी दल बीजेपी से समर्थन मांगेगी, उन्होंने कहा, अगर कोई हमसे बात करना चाहता है, तो हम तैयार हैं।
ममता ने कहा, राजनीतिक दल राजनीतिक दलों से बात कर सकते हैं। इसमें कोई धार्मिक मसला शामिल नहीं है। यह धार्मिक मामला या गठबंधन का मामला नहीं है। यह ऐसा मसला है, जिसमें भ्रष्टाचार शामिल है, जिसके खिलाफ हमें लड़ना है। ममता ने कहा, हम सीपीएम और अन्य वामपंथी दलों से भी इस मसले पर बात करने को तैयार हैं। हमारे संसदीय दल के नेता सुदीप बंधोपाध्याय इस संबंध में उनसे बात करेंगे। उन्होंने कहा कि डीएमके ने भी मंत्रिमंडल से दूर रहने का फैसला ले लिया था और खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर उनका भी विरोध है।
ममता ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में समाजवादी पार्टी और बसपा के शरीक होने में कोई बुराई नहीं है। इस मुद्दे पर ममता ने कहा, यह एक शिष्टाचार है। इसमें कुछ गलत नहीं है। पर मैं सपा और बसपा से अपील करती हूं कि वह हमारे प्रस्ताव का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि सपा और बसपा बाहरी सहयोगी हो सकते हैं, पर इसका मतलब यह नहीं है कि जब आम लोगों के हित संकट में होंगे, तो सरकार की जनविरोधी फैसलों को भी वह स्वीकार कर लेंगे।
ममता ने पहले कहा था कि राज्य सरकारों और राजनीतिक दलों को काबू में करने के लिए सरकार 'सीबीआई की छड़ी' का प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा, हमें सीबीआई के जरिये धमकाने का कोई फायदा नहीं है। क्षेत्रीय दलों के समर्थन के बारे में ममता ने कहा, हमारे भी कई क्षेत्रीय सहयोगी हैं और उनकी भी भूमिका हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यूपीए की पूर्व सहयोगी पार्टी बाबू लाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक भी तृणमूल कांग्रेस के साथ है। इस दल के संसद में दो सदस्य हैं। ममता ने कहा, यह सरकार आम आदमी के खिलाफ है। हम अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे, जिससे पता चलेगा कि सरकार के जनविरोधी फैसलों पर किस दल का क्या रुख है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्ताव के स्वीकार किए जाने के लिए उन्हें 50 लोकसभा सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
ममता ने इस मसले पर यूपीए के सहयोगी दलों और वामपंथी दलों का समर्थन मांगा। उन्होंने यह भी बताया कि वह बीजेपी से वार्ता करने को तैयार हैं। एक प्रेस वार्ता में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा, संसद में हमारी पार्टी के संसदीय नेता सुदीप बंधोपाध्याय शीतकालीन सत्र के पहले दिन अविश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे।
ममता ने कहा, हमने सरकार को सत्ता से बाहर करने और चुनावों के जरिये नई सरकार के गठन के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा, मैं अन्य राजनीतिक दलों से हमारे प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील करती हूं। यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी अपने पूर्व सहयोगी दल बीजेपी से समर्थन मांगेगी, उन्होंने कहा, अगर कोई हमसे बात करना चाहता है, तो हम तैयार हैं।
ममता ने कहा, राजनीतिक दल राजनीतिक दलों से बात कर सकते हैं। इसमें कोई धार्मिक मसला शामिल नहीं है। यह धार्मिक मामला या गठबंधन का मामला नहीं है। यह ऐसा मसला है, जिसमें भ्रष्टाचार शामिल है, जिसके खिलाफ हमें लड़ना है। ममता ने कहा, हम सीपीएम और अन्य वामपंथी दलों से भी इस मसले पर बात करने को तैयार हैं। हमारे संसदीय दल के नेता सुदीप बंधोपाध्याय इस संबंध में उनसे बात करेंगे। उन्होंने कहा कि डीएमके ने भी मंत्रिमंडल से दूर रहने का फैसला ले लिया था और खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर उनका भी विरोध है।
ममता ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में समाजवादी पार्टी और बसपा के शरीक होने में कोई बुराई नहीं है। इस मुद्दे पर ममता ने कहा, यह एक शिष्टाचार है। इसमें कुछ गलत नहीं है। पर मैं सपा और बसपा से अपील करती हूं कि वह हमारे प्रस्ताव का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि सपा और बसपा बाहरी सहयोगी हो सकते हैं, पर इसका मतलब यह नहीं है कि जब आम लोगों के हित संकट में होंगे, तो सरकार की जनविरोधी फैसलों को भी वह स्वीकार कर लेंगे।
ममता ने पहले कहा था कि राज्य सरकारों और राजनीतिक दलों को काबू में करने के लिए सरकार 'सीबीआई की छड़ी' का प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा, हमें सीबीआई के जरिये धमकाने का कोई फायदा नहीं है। क्षेत्रीय दलों के समर्थन के बारे में ममता ने कहा, हमारे भी कई क्षेत्रीय सहयोगी हैं और उनकी भी भूमिका हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यूपीए की पूर्व सहयोगी पार्टी बाबू लाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक भी तृणमूल कांग्रेस के साथ है। इस दल के संसद में दो सदस्य हैं। ममता ने कहा, यह सरकार आम आदमी के खिलाफ है। हम अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे, जिससे पता चलेगा कि सरकार के जनविरोधी फैसलों पर किस दल का क्या रुख है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्ताव के स्वीकार किए जाने के लिए उन्हें 50 लोकसभा सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
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