
नई दिल्ली:
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने यदि पूर्वी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) सेक्टर स्थित भारतीय क्षेत्र में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाई तो भारत भी वहां तैनात अपने सैनिकों की संख्या में बढ़ोतरी करेगा।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि चीन सीमा पर तैनात लेह स्थित 14 कोर से लेकर पूर्वोत्तर में तैनात तीसरी कोर की सैन्य टुकड़ियां पीएलए के भारतीय क्षेत्र में प्रवेश के किसी भी दुस्साहस को रोकने के लिए पूरी तरह चौकस हैं।
चीन सेना की एक प्लाटून ने गत 15 अप्रैल को भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करके वहां तंबू खड़े कर लिए थे। चीनी सैनिकों ने दावा किया था कि वे अपने क्षेत्र में हैं। इसके बाद भारत ने वहां चीनी सैनिकों के शिविर के पास ही सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) का एक छोटा सैन्य शिविर स्थापित कर दिया था।
सूत्रों ने कहा कि वर्तमान समय में सेना को चीनी सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और ‘गैर आक्रामक रख’ अपनाने को कहा गया है। हालांकि यदि पीएलए अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाती है तो सेना भी वहां अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाएगी।
सूत्रों ने बताया कि दो स्थानों पर करीब 30 चीनी सैनिक हैं। इसमें से तंबू वाले क्षेत्र और एक अन्य स्थान शामिल है जहां दोनों देशों के सैनिक हाथों में बैनर लिए हुए एक-दूसरे के सामने हैं। सूत्रों ने बताया कि चीनी सैनिक पीएलए के बॉर्डर डिफेंस रेजीमेंट के हैं। बार्डर डिफेंस रेजीमेंट चीनी सैनिकों द्वारा खड़े किए गए तंबू वाले स्थान से 25 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।
उन्होंने कहा कि माना जाता है कि चीनी सैनिकों को रसद की आपूर्ति अपनी इकाई से राकी नाला के जरिये हो रही है जो चीन से भारतीय क्षेत्र की ओर बहता है।
सूत्रों ने बताया कि चीनी सैनिक असाल्ट राइफलों से लैस हैं और उनके पास अभी तक कोई भी भारी हथियार नहीं है। उनके पास उनकी गतिविधियों की सहायता के लिए दो छोटे वाहन भी हैं।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय पक्ष चीनी पक्ष के साथ एक फ्लैग मीटिंग के लिए कह सकता है लेकिन इस बारे में अभी निर्णय नहीं हुआ है।
दोनों पक्षों के बीच दो दौर की फ्लैग मीटिंग पहले ही हो चुकी है लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी है क्योंकि चीनी सैनिक अभी तक वहां से नहीं हटें हैं।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि चीन सीमा पर तैनात लेह स्थित 14 कोर से लेकर पूर्वोत्तर में तैनात तीसरी कोर की सैन्य टुकड़ियां पीएलए के भारतीय क्षेत्र में प्रवेश के किसी भी दुस्साहस को रोकने के लिए पूरी तरह चौकस हैं।
चीन सेना की एक प्लाटून ने गत 15 अप्रैल को भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करके वहां तंबू खड़े कर लिए थे। चीनी सैनिकों ने दावा किया था कि वे अपने क्षेत्र में हैं। इसके बाद भारत ने वहां चीनी सैनिकों के शिविर के पास ही सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) का एक छोटा सैन्य शिविर स्थापित कर दिया था।
सूत्रों ने कहा कि वर्तमान समय में सेना को चीनी सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और ‘गैर आक्रामक रख’ अपनाने को कहा गया है। हालांकि यदि पीएलए अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाती है तो सेना भी वहां अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाएगी।
सूत्रों ने बताया कि दो स्थानों पर करीब 30 चीनी सैनिक हैं। इसमें से तंबू वाले क्षेत्र और एक अन्य स्थान शामिल है जहां दोनों देशों के सैनिक हाथों में बैनर लिए हुए एक-दूसरे के सामने हैं। सूत्रों ने बताया कि चीनी सैनिक पीएलए के बॉर्डर डिफेंस रेजीमेंट के हैं। बार्डर डिफेंस रेजीमेंट चीनी सैनिकों द्वारा खड़े किए गए तंबू वाले स्थान से 25 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।
उन्होंने कहा कि माना जाता है कि चीनी सैनिकों को रसद की आपूर्ति अपनी इकाई से राकी नाला के जरिये हो रही है जो चीन से भारतीय क्षेत्र की ओर बहता है।
सूत्रों ने बताया कि चीनी सैनिक असाल्ट राइफलों से लैस हैं और उनके पास अभी तक कोई भी भारी हथियार नहीं है। उनके पास उनकी गतिविधियों की सहायता के लिए दो छोटे वाहन भी हैं।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय पक्ष चीनी पक्ष के साथ एक फ्लैग मीटिंग के लिए कह सकता है लेकिन इस बारे में अभी निर्णय नहीं हुआ है।
दोनों पक्षों के बीच दो दौर की फ्लैग मीटिंग पहले ही हो चुकी है लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी है क्योंकि चीनी सैनिक अभी तक वहां से नहीं हटें हैं।
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