
जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों को अपने कर का ब्योरा देना होगा...
नई दिल्ली:
राकेश नायक पूर्वी दिल्ली में ऑटो पार्ट्स का कारोबार करते हैं. हालांकि कारोबार बढ़िया होने के बावजूद भी वे टैक्स नहीं भरते. गनीमत है कि अभी तक कर अधिकारियों की नज़र में उन पर नहीं पड़ी है. लेकिन ऐसा अब नहीं चल पाएगा. जीएसटी लागू होने के बाद राकेश जैसे अन्य लोगों को अपने कर का ब्योरा देना होगा. वह न तो बिल के बगैर थोक व्यापारी से पार्ट्स खरीद पाएंगे और न ही फुटकर वाले व्यापारी को बेच सकेंगे.
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शनिवार से लागू हो रहा है. हालांकि इसकी जटिल संरचना को लेकर कई व्यापारिक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं. लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसे देश का सबसे बड़ा कर सुधार माना जा रहा है. जीएसटी के लागू होने के बाद वैट, सेवा कर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क जैसे केंद्र व राज्यों के दर्जन भर से अधिक टैक्स समाप्त हो जाएंगे.
दरअसल, इस नए कर ढांचे में फर्म को अपने खरीद-बिक्री का ब्योरा इनवॉइस के रूप में जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करने होंगे. इसके बाद इन बिलों का मिलान किया जाएगा जिसके बाद ही व्यापारियों को इनपुट क्रेडिट मिल पाएगा. इस सबके लिए जरूरी होगा कि सामान बेचने वाला और खरीदने वाला दोनों व्यापारी रजिस्टर्ड हो. अगर कोई व्यापारी रजिस्टर नहीं होगा तो उसको बड़ी फर्म से माल प्राप्त होगा क्योंकि बड़ी फर्म को उसे बेचे गए माल पर इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा. नायक ने कहा कि ऐसी स्थिति में जीएसटी में पंजीकरण कराने के अलावा उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचेगा.
राकेश नायक जैसे लाखों जो अब तक टैक्स देने से बचते रहे हैं उन्हें जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स का भुगतान करना होगा नहीं तो उनका कारोबार ठप पड़ने की पूरी संभावना है. ऐसा होने पर सरकार के राजस्व में भी खासी वृद्धि होगी. देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी.
विश्व की मुख्य अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत का टैक्स -जीडीपी अनुपात काफी कम है इसलिए सरकार को राजस्व बढ़ाने की जरूरत है. भारत में टैक्स-जीडीपी अनुपात मात्र 16.6 प्रतिशत है जो विकसित देशों के समूह ओईसीडी के 34 प्रतिशत के मुकाबले लगभग आधा ही है. इसलिए विशेषज्ञों का अनुमान है कि जीएसटी लागू होने के बाद भारत के टैक्स-जीडीपी अनुपात में चार प्रतिशत तक बढ़ सकता है.
वहीं, सरकार का मानना है कि जीएसटी से कंपनियों को लगभग 14 बिलियन डॉलर की बचत होगी क्योंकि इससे उन्हें अपने वेयरहाउस और आपूर्ति श्रृंखला को और दक्ष बनाने की जरूरत होगी. कंपनियां अब राज्य दर राज्य परिचालन करने के बजाय केंद्रीय रूप से काम कर सकेंगे. जानकारों की मानें तो जीएसटी का असंगठित क्षेत्र पर विपरीत असर पड़ सकता है क्योंकि ज्यादातर असंगठित क्षेत्र की ज्यादातर इकाइयां टैक्स सिस्टम में रजिस्टर नहीं हैं.
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शनिवार से लागू हो रहा है. हालांकि इसकी जटिल संरचना को लेकर कई व्यापारिक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं. लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसे देश का सबसे बड़ा कर सुधार माना जा रहा है. जीएसटी के लागू होने के बाद वैट, सेवा कर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क जैसे केंद्र व राज्यों के दर्जन भर से अधिक टैक्स समाप्त हो जाएंगे.
दरअसल, इस नए कर ढांचे में फर्म को अपने खरीद-बिक्री का ब्योरा इनवॉइस के रूप में जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करने होंगे. इसके बाद इन बिलों का मिलान किया जाएगा जिसके बाद ही व्यापारियों को इनपुट क्रेडिट मिल पाएगा. इस सबके लिए जरूरी होगा कि सामान बेचने वाला और खरीदने वाला दोनों व्यापारी रजिस्टर्ड हो. अगर कोई व्यापारी रजिस्टर नहीं होगा तो उसको बड़ी फर्म से माल प्राप्त होगा क्योंकि बड़ी फर्म को उसे बेचे गए माल पर इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा. नायक ने कहा कि ऐसी स्थिति में जीएसटी में पंजीकरण कराने के अलावा उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचेगा.
राकेश नायक जैसे लाखों जो अब तक टैक्स देने से बचते रहे हैं उन्हें जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स का भुगतान करना होगा नहीं तो उनका कारोबार ठप पड़ने की पूरी संभावना है. ऐसा होने पर सरकार के राजस्व में भी खासी वृद्धि होगी. देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी.
विश्व की मुख्य अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत का टैक्स -जीडीपी अनुपात काफी कम है इसलिए सरकार को राजस्व बढ़ाने की जरूरत है. भारत में टैक्स-जीडीपी अनुपात मात्र 16.6 प्रतिशत है जो विकसित देशों के समूह ओईसीडी के 34 प्रतिशत के मुकाबले लगभग आधा ही है. इसलिए विशेषज्ञों का अनुमान है कि जीएसटी लागू होने के बाद भारत के टैक्स-जीडीपी अनुपात में चार प्रतिशत तक बढ़ सकता है.
वहीं, सरकार का मानना है कि जीएसटी से कंपनियों को लगभग 14 बिलियन डॉलर की बचत होगी क्योंकि इससे उन्हें अपने वेयरहाउस और आपूर्ति श्रृंखला को और दक्ष बनाने की जरूरत होगी. कंपनियां अब राज्य दर राज्य परिचालन करने के बजाय केंद्रीय रूप से काम कर सकेंगे. जानकारों की मानें तो जीएसटी का असंगठित क्षेत्र पर विपरीत असर पड़ सकता है क्योंकि ज्यादातर असंगठित क्षेत्र की ज्यादातर इकाइयां टैक्स सिस्टम में रजिस्टर नहीं हैं.
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