
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली:
सोशल मीडिया पर छेड़छाड़ की शिकार केरल की महिला एक्टर के वीडियो अपलोड होने से रोकने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की गई है. एक एनजीओ प्रज्ज्वला ने यह मांग की है. केरल पुलिस ने भी कहा है कि महिला एक्टर का वीडियो बनाया गया है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गूगल और फेसबुक से पूछा कि कितने मामलों में वो अमेरिकी कानूनी एजेंसियों से सहयोग करते हैं? रेप वीडियो अपलोड होने से रोकने के लिए उनके पास क्या मैकेनिज्म है ?
दरअसल एनजीओ ने कहा था कि ये कंपनियां अमेरिकी कानून का सहयोग करते हैं तो भारत मे क्यों नहीं करते. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि क्या सोशल मीडिया पर सेक्स वीडियो अपलोड होने से रोके जा सकते हैं? सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सर्च इंजनों से कहा कि जब तक अपलोड हुए वीडियो को हटाया जाए, तब तक वक्त लग जाता है और ऐसे में उस शख्स की साख चली जाती है, जिसका वीडियो होता है. ऐसे में क्या ये संभव है कि पहले ही इन्हें रोक दिया जाए ना कि बाद में उपचार हो.
हालांकि गूगल की ओर से कहा गया कि ये संभव नहीं है क्योंकि हर मिनट 400 घंटे के वीडियो अपलोड होते हैं. ऐसे में कंपनी को वीडियो की छानबीन करने के लिए पांच लाख लोगों की जरूरत होगी. गूगल के वकील ने कहा कि ये संभव नहीं है कि अपलोड होने वाले सभी वीडियो की जांच की जाए. अगर नोडल एजेंसी के जरिए कोई शिकायत आए तो कंपनी कार्रवाई कर सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आजकल कोई भी कुछ भी वीडियो अपलोड कर सकता है और लोग इसके लिए बिल्कुल नहीं घबराते. ऐसे में पीडि़त की साख को खतरा होता है ना कि अपलोड करने वाले को. वहीं केंद्र में ऐसे मामलों से निपटने के लिए नोडल एजेंसी का गठन किया जा रहा है.
दरअसल रेप के जो वीडियो सोशल साइट पर मौजूद है उस पर कैसे रोक कैसे लगाई जा सकती है, और उन्हें सोशल मीडिया पर डालने वालों के ख़िलाफ़ क्या क्या कार्रवाई हुई है, सुप्रीम कोर्ट इस बाबत सुनवाई कर रहा है.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सर्च इंजन गूगल, याहू और माइक्रोसाफ्ट को नोटिस जारी कर पूछा था कि ऐसे वीडियो को अपलोड होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं.
दरअसल एनजीओ प्रज्ज्वला ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू को एक पत्र के साथ दुष्कर्म के दो वीडियो वाली पैन ड्राइव भेजी थी. ये वीडियो वॉट्स ऐप पर वायरल हुए थे. कोर्ट ने पत्र पर स्वतः संज्ञान लेकर सीबीआई को जांच करने व दोषियों को पकड़ने का आदेश दिया था.
दरअसल एनजीओ ने कहा था कि ये कंपनियां अमेरिकी कानून का सहयोग करते हैं तो भारत मे क्यों नहीं करते. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि क्या सोशल मीडिया पर सेक्स वीडियो अपलोड होने से रोके जा सकते हैं? सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सर्च इंजनों से कहा कि जब तक अपलोड हुए वीडियो को हटाया जाए, तब तक वक्त लग जाता है और ऐसे में उस शख्स की साख चली जाती है, जिसका वीडियो होता है. ऐसे में क्या ये संभव है कि पहले ही इन्हें रोक दिया जाए ना कि बाद में उपचार हो.
हालांकि गूगल की ओर से कहा गया कि ये संभव नहीं है क्योंकि हर मिनट 400 घंटे के वीडियो अपलोड होते हैं. ऐसे में कंपनी को वीडियो की छानबीन करने के लिए पांच लाख लोगों की जरूरत होगी. गूगल के वकील ने कहा कि ये संभव नहीं है कि अपलोड होने वाले सभी वीडियो की जांच की जाए. अगर नोडल एजेंसी के जरिए कोई शिकायत आए तो कंपनी कार्रवाई कर सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आजकल कोई भी कुछ भी वीडियो अपलोड कर सकता है और लोग इसके लिए बिल्कुल नहीं घबराते. ऐसे में पीडि़त की साख को खतरा होता है ना कि अपलोड करने वाले को. वहीं केंद्र में ऐसे मामलों से निपटने के लिए नोडल एजेंसी का गठन किया जा रहा है.
दरअसल रेप के जो वीडियो सोशल साइट पर मौजूद है उस पर कैसे रोक कैसे लगाई जा सकती है, और उन्हें सोशल मीडिया पर डालने वालों के ख़िलाफ़ क्या क्या कार्रवाई हुई है, सुप्रीम कोर्ट इस बाबत सुनवाई कर रहा है.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सर्च इंजन गूगल, याहू और माइक्रोसाफ्ट को नोटिस जारी कर पूछा था कि ऐसे वीडियो को अपलोड होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं.
दरअसल एनजीओ प्रज्ज्वला ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू को एक पत्र के साथ दुष्कर्म के दो वीडियो वाली पैन ड्राइव भेजी थी. ये वीडियो वॉट्स ऐप पर वायरल हुए थे. कोर्ट ने पत्र पर स्वतः संज्ञान लेकर सीबीआई को जांच करने व दोषियों को पकड़ने का आदेश दिया था.
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