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This Article is From Oct 21, 2016

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा भारतीय डॉक्टर बना वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन का अध्यक्ष

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा भारतीय डॉक्टर बना वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन का अध्यक्ष
नई दिल्ली: दुनियाभर के डॉक्टरों की शीर्ष आचार संस्था वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन (डब्ल्यूएमए) का अध्यक्ष शुक्रवार को एक ऐसे भारतीय डॉक्टर को बनाया गया है, जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, और उनके खिलाफ कानूनी मामले लंबित होने की वजह से उनकी नियुक्ति पर विवाद चल रहा है.

डब्ल्यूएमए द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि डॉ केतन देसाई ने शुक्रवार को एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में ताइवान में हुई उसकी वार्षिक बैठक के दौरान उद्घाटन भाषण दिया. वह 2016/17 के लिए एसोसिएशन के अध्यक्ष रहेंगे.

वर्ष 2009 में डब्ल्यूएमए के भावी अध्यक्ष चुने जाने के वक्त से डॉ केतन देसाई के खिलाफ षड्यंत्र रचने तथा भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं. लंबित मामलों के संदर्भ में डॉ केतन देसाई ने कोई भी गलत काम किया होने से इंकार किया है. उन्होंने उन सवालों के जवाब नहीं दिए, जो रॉयटर ने उन्हें ईमेल के ज़रिये भेजे थे.

जब रॉयटर ने इसी सप्ताह डब्ल्यूएमए से डॉ केतन देसाई की कानूनी स्थिति पर अपडेट के बारे में पूछा, डब्ल्यूएमए प्रवक्ता नाइजेल डंकन ने कहा कि एसोसिएशन को इस बारे में कुछ और नहीं कहना है.

डंकन ने कहा, "मुझे नहीं लगता, जो हम पहले कह चुके हैं, उसके अलावा हमें कुछ और कहना है..." उन्होंने डॉ केतन देसाई के खिलाफ जारी कानूनी केसों पर भी कोई जवाब नहीं दिया, और न ही इस बात को उत्तर दिया कि हालिया महीनों में उन्हें इन केसों के बारे में क्या बताया गया है.

नई दिल्ली में वर्ष 2010 में दर्ज हुए एक मामले में डॉ केतन देसाई पर एक मेडिकल कॉलेज से दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेने की साज़िश में कथित रूप से शामिल होने को लेकर भ्रष्टाचार तथा आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप लगाए गए हैं.

जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि डॉ देसाई ने मेडिकल काउंसिल से अधिक छात्रों को दाखिला देने की अनुमति हासिल करने में मेडिकल कॉलेज की मदद की. पिछले साल जब कॉलेज (जो इस मामले में प्रतिवादी नहीं है) से संपर्क किया गया, उन्होंने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया.

डॉ देसाई को उसी साल जेल भेज दिया गया था, और डब्ल्यूएमए अध्यक्ष के रूप में उनका पेश किया जाना निलंबित कर दिया गया. उन्हें बाद में ज़मानत पर रिहा किया गया. वर्ष 2013 में डब्ल्यूएमए ने भी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की तरफ से आश्वासन मिलने के बाद डॉ देसाई की अध्यक्ष पद पर दावेदारी पर लगे निलंबन को हटा दिया. डॉ देसाई आईएमए के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

इसी सप्ताह रॉयटर द्वारा भेजे गए सवालों का आईएमए ने भी कोई जवाब नहीं दिया है.

रॉयटर द्वारा की गई और पिछले साल जुलाई में प्रकाशित की गई जांच से पता चलता है कि आईएमए ने गलत तरीके से डब्ल्यूएमए को बताया था कि डॉ देसाई के खिलाफ लगे आरोप वापस ले लिए गए हैं. इस जानकारी को बड़े डॉक्टर संगठनों ने सच मानकर स्वीकार कर लिया. पिछले साल आईएमए ने कहा था कि उन्होंने डब्ल्यूएमए को कभी गुमराह नहीं किया.

डब्ल्यूएमए ने कहा था कि उन्होंने रॉयटर द्वारा प्रकाशित लेख में उठाए गए सवालों को 'बहुत गंभीरता' से लिया था, और उनकी जांच कराई जाएगी. बाद में, अक्टूबर, 2015 में डब्ल्यूएमए ने बिना कोई कारण बताए डॉ देसाई को अध्यक्ष बनाने का अपना फैसला बरकरार रख लिया.

सीबीआई के एक सूत्र ने इसी सप्ताह बताया कि नई दिल्ली वाला मामला अब भी जारी है, हालांकि वह सुप्रीम कोर्ट में की गई अपील के पेंडिंग होने की वजह से लंबित है. सूत्र ने बताया कि डॉ देसाई को जिला जज की अदालत में सुनवाई के दौरान हाज़िर होना पड़ता है.

3 अगस्त का एक कोर्ट दस्तावेज़ बताता है कि यूरोलॉजिस्ट डॉ देसाई ने उस तारीख पर कोर्ट से गैरहाज़िर होने की अनुमति बीमारी के आधार पर मांगी थी. मामले में अगली सुनवाई 4 नवंबर को होनी है.

© Thomson Reuters 2016

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