
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटनाएं रोकने और सड़क सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध में 25 दिशानिर्देश जारी किए है. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश जारी किए गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन राज्यों ने अब तक सड़क सुरक्षा नीति नहीं बनाई है, वे 31 जनवरी, 2018 तक यह काम कर लें. सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से आशा की जाती है कि वे गंभीरता और ईमानदारी से इस पॉलिसी का अनुपालन करेंगे. दिल्ली, असम, त्रिपुरा, नागालैंड आदि ने अब तक नीति नहीं बनाई है.
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कोर्ट ने सभी केंद्रशासित प्रदेशों को 31 जनवरी, 2018 तक सड़क सुरक्षा परिषद का गठन करने का निर्देश दिया है. समय-समय पर परिषद द्वारा कानून का पुनर्परीक्षण किया जाएगा और उचित कदम उठाया जाएगा. सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को 31 जनवरी, 2018 तक लीड एजेंसी बनाने का निर्देश दिया गया है. लीड एजेंसी राज्य सड़क सुरक्षा परिषद के सचिवालय के तौर पर काम करेगी. एजेंसी लाइसेंस, वाहनों के पंजीकरण, सड़क सुरक्षा, वाहनों के फीचर, इमीशन नॉर्म्स समेत अन्य मसलों पर परिषद से समन्वय बनाकर काम करेगी.
कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को 31 मार्च, 2018 तक सड़क सुरक्षा फंड के गठन का निर्देश दिया है. ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से प्राप्त जुर्माने की राशि से यह फंड तैयार किया जाएगा. अदालत ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को 31 मार्च, 2018 तक सड़क सुरक्षा एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया ह. कोर्ट ने पाया कि इस मसले पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का रवैया उदासीन है.
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सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को 31 जनवरी 2018 तक जिला राज्य सुरक्षा कमेटी का गठन करने का निर्देश दिया है.कोर्ट ने कहा है कि सड़क दुर्घटनाओं की एक बड़ी वजह खराब सड़कें और अनुचित डिजाइन होना है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को सड़कों पर खतरनाक स्पॉट की पहचान करना और सड़कों के डिजाइन को दुरुस्त करने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर ऑडिट जरूरी है. क्वालीफाइड ऑडिटर से ऑडिट कराया जाए. पांच किमी या इससे अधिक की नई सड़क परियोजनाओं में डिजाइन का ध्यान रखा जाए.
कोर्ट ने कहा कि राज्य व केंद्रशासित प्रदेश लेन ड्राइविंग संबंधी अधिसूचना का पालन करें. राज्य और राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्पेशल पेट्रोल फोर्स का गठन हो. यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखी जाए. कैमरे सहित अन्य चीजों का इस्तेमाल किया जाए.
VIDEO : सड़क सुरक्षा क लिए जागरूकता
अदालत ने राज्य बोर्ड को एक अप्रैल, 2018 से सड़क सुरक्षा शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए कहा है. कोर्ट ने कहा है कि हर जिले में कम से कम एक ट्रॉमा सेंटर हो और यूनिवर्सल एक्सीडेंट हेल्पलाइन नंबर हो. न्यायालय ने स्थाई सड़क सुरक्षा सेल का 31 जनवरी 2018 तक गठन करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि सभी पब्लिक सर्विस वाहनों में जीपीएस जल्द लगाए जाएं. कोर्ट का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में हजारों की जान बच सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन राज्यों ने अब तक सड़क सुरक्षा नीति नहीं बनाई है, वे 31 जनवरी, 2018 तक यह काम कर लें. सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से आशा की जाती है कि वे गंभीरता और ईमानदारी से इस पॉलिसी का अनुपालन करेंगे. दिल्ली, असम, त्रिपुरा, नागालैंड आदि ने अब तक नीति नहीं बनाई है.
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कोर्ट ने सभी केंद्रशासित प्रदेशों को 31 जनवरी, 2018 तक सड़क सुरक्षा परिषद का गठन करने का निर्देश दिया है. समय-समय पर परिषद द्वारा कानून का पुनर्परीक्षण किया जाएगा और उचित कदम उठाया जाएगा. सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को 31 जनवरी, 2018 तक लीड एजेंसी बनाने का निर्देश दिया गया है. लीड एजेंसी राज्य सड़क सुरक्षा परिषद के सचिवालय के तौर पर काम करेगी. एजेंसी लाइसेंस, वाहनों के पंजीकरण, सड़क सुरक्षा, वाहनों के फीचर, इमीशन नॉर्म्स समेत अन्य मसलों पर परिषद से समन्वय बनाकर काम करेगी.
कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को 31 मार्च, 2018 तक सड़क सुरक्षा फंड के गठन का निर्देश दिया है. ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से प्राप्त जुर्माने की राशि से यह फंड तैयार किया जाएगा. अदालत ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को 31 मार्च, 2018 तक सड़क सुरक्षा एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया ह. कोर्ट ने पाया कि इस मसले पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का रवैया उदासीन है.
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सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को 31 जनवरी 2018 तक जिला राज्य सुरक्षा कमेटी का गठन करने का निर्देश दिया है.कोर्ट ने कहा है कि सड़क दुर्घटनाओं की एक बड़ी वजह खराब सड़कें और अनुचित डिजाइन होना है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को सड़कों पर खतरनाक स्पॉट की पहचान करना और सड़कों के डिजाइन को दुरुस्त करने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर ऑडिट जरूरी है. क्वालीफाइड ऑडिटर से ऑडिट कराया जाए. पांच किमी या इससे अधिक की नई सड़क परियोजनाओं में डिजाइन का ध्यान रखा जाए.
कोर्ट ने कहा कि राज्य व केंद्रशासित प्रदेश लेन ड्राइविंग संबंधी अधिसूचना का पालन करें. राज्य और राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्पेशल पेट्रोल फोर्स का गठन हो. यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखी जाए. कैमरे सहित अन्य चीजों का इस्तेमाल किया जाए.
VIDEO : सड़क सुरक्षा क लिए जागरूकता
अदालत ने राज्य बोर्ड को एक अप्रैल, 2018 से सड़क सुरक्षा शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए कहा है. कोर्ट ने कहा है कि हर जिले में कम से कम एक ट्रॉमा सेंटर हो और यूनिवर्सल एक्सीडेंट हेल्पलाइन नंबर हो. न्यायालय ने स्थाई सड़क सुरक्षा सेल का 31 जनवरी 2018 तक गठन करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि सभी पब्लिक सर्विस वाहनों में जीपीएस जल्द लगाए जाएं. कोर्ट का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में हजारों की जान बच सकती है.
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