
प्रतीकात्मक फोटो
शिमला:
बर्फबारी होने के कारण रविवार को रोहतांग दर्रे में महिलाओं और बच्चों सहित 350 से अधिक लोग करीब आठ घंटे तक फंसे रहे। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कर्मचारियों को बर्फ हटाने के अभियान में लगाए जाने के बाद रोहतांग दर्रे में फंसे लोगों को देर शाम केलोंग से मनाली पहुंचाया गया।
सीएसके कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर वरिन्दर सिंह ने रोहतांग से फोन पर बताया, ‘ तापमान अचानक काफी नीचे आने से हमें भयावह स्थिति का सामना करना पड़ा। तापमान शून्य से चार-पांच अंक नीचे आ गया था, लेकिन सौभाग्य से देर शाम सड़क खोल दी गई और हम रोहतांग दर्रा से निकलने में कामयाब रहे।’ सिंह ने कहा कि सड़क से बर्फ पहले हटाई जा सकती थी, लेकिन विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी थी और हमें अपनी पीड़ा बताने के लिए अधिकारियों को बार-बार फोन करना पड़ा।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
सीएसके कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर वरिन्दर सिंह ने रोहतांग से फोन पर बताया, ‘ तापमान अचानक काफी नीचे आने से हमें भयावह स्थिति का सामना करना पड़ा। तापमान शून्य से चार-पांच अंक नीचे आ गया था, लेकिन सौभाग्य से देर शाम सड़क खोल दी गई और हम रोहतांग दर्रा से निकलने में कामयाब रहे।’ सिंह ने कहा कि सड़क से बर्फ पहले हटाई जा सकती थी, लेकिन विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी थी और हमें अपनी पीड़ा बताने के लिए अधिकारियों को बार-बार फोन करना पड़ा।
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