
ज़की-उर-रहमान लखवी की फाइल फोटो
नई दिल्ली:
भारत सरकार ने पाकिस्तान से पूछा है कि मुंबई में हुए हमले के मास्टरमाइंड यानी ज़की-उर-रहमान लखवी की बेल किस शख्स या फिर संस्था ने करवाई है।
एनडीटीवी इंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक लखवी की बेल का पैसा यानी पांच लाख रुपये जिसने भी भरे हैं वो अंतरराष्ट्रिय कानून के खिलाफ है क्योंकि लखवी की बेल संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय किये गए कानूनों के खिलाफ है। वो इसलिय क्योंकि लश्कर ए तैयबा को संयुक्त राष्ट्र ने एक आतंकवादी गुट करार दिया है।
एक सीनियर अफसर ने कहा, 'लखवी के सारे बैंक एकाउंट्स और सब जायदाद जब्त की जा चुकी है इसलिए ये पैसा किसी और ने भरा है। भारत सरकार ये जानना चाहती है कि आखिर किस ने उसके लिए मुचलका भरा है।'
भारत इस्लामाबाद को एक कूटनीतिक नोट भेजकर सवाल करेगा कि लखवी ने कैसे दो मुचलकों पर 10-10 लाख रूपये जमा किए तथा कौन इन मुचलकों के लिए आगे आया।
हालांकि रॉ का मानना है कि ये मुचलके आईएसआई ने भरे हैं। इस बारे में रॉ ने कैबिनेट सचिव को आगाह भी किया है। इस बीच भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र को लखवी की रिहाई को लेकर पाकिस्तान पर दबाब बनाने को कहा है। भारत का मानना है कि लखवी की रिहाई संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय किये कानूनों का उल्लंघन है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत सरकार के स्थायी दूत अशोक ने यूनाइटेड नेशंस सैंक्शन कमेटी के जीम मक्ले को चिट्ठी लिख कर कहा है कि लखवी की रिहाई संयुक्त राष्ट्र के 1267 रिजोल्यूशन के खिलाफ है। इस रिजोल्यूशन के तहत सैंक्शंस उन सभी लोगों या फिर संस्थाओं पर लागू होता है जिनका वास्ता आतंकवादी गुटों के साथ है। चिट्ठी में ये भी लिखा है कि बेल का पैसा सैंक्शन्स कमिटी द्वारा निर्धारित कानूनों के खिलाफ है।
वैसे भारत ही नहीं अमेरिका, इंग्लैंड, रूस, फ्रांस और जर्मनी भी लखवी की रिहाई को लेकर चिंतित हैं और इन सबने पाकिस्तान से उसे दुबारा गिरफ्तार करने को कहा है।
55 साल का लखवी लश्कर ए तैयबा के चीफ हाफिज सईद का रिश्तेदार है। लखवी को 25 नवंबर 2009 को गिरफ्तार किया गया था लेकिन 9 अप्रैल को कोर्ट ने उसे रिहा कर दिया।
एनडीटीवी इंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक लखवी की बेल का पैसा यानी पांच लाख रुपये जिसने भी भरे हैं वो अंतरराष्ट्रिय कानून के खिलाफ है क्योंकि लखवी की बेल संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय किये गए कानूनों के खिलाफ है। वो इसलिय क्योंकि लश्कर ए तैयबा को संयुक्त राष्ट्र ने एक आतंकवादी गुट करार दिया है।
एक सीनियर अफसर ने कहा, 'लखवी के सारे बैंक एकाउंट्स और सब जायदाद जब्त की जा चुकी है इसलिए ये पैसा किसी और ने भरा है। भारत सरकार ये जानना चाहती है कि आखिर किस ने उसके लिए मुचलका भरा है।'
भारत इस्लामाबाद को एक कूटनीतिक नोट भेजकर सवाल करेगा कि लखवी ने कैसे दो मुचलकों पर 10-10 लाख रूपये जमा किए तथा कौन इन मुचलकों के लिए आगे आया।
हालांकि रॉ का मानना है कि ये मुचलके आईएसआई ने भरे हैं। इस बारे में रॉ ने कैबिनेट सचिव को आगाह भी किया है। इस बीच भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र को लखवी की रिहाई को लेकर पाकिस्तान पर दबाब बनाने को कहा है। भारत का मानना है कि लखवी की रिहाई संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय किये कानूनों का उल्लंघन है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत सरकार के स्थायी दूत अशोक ने यूनाइटेड नेशंस सैंक्शन कमेटी के जीम मक्ले को चिट्ठी लिख कर कहा है कि लखवी की रिहाई संयुक्त राष्ट्र के 1267 रिजोल्यूशन के खिलाफ है। इस रिजोल्यूशन के तहत सैंक्शंस उन सभी लोगों या फिर संस्थाओं पर लागू होता है जिनका वास्ता आतंकवादी गुटों के साथ है। चिट्ठी में ये भी लिखा है कि बेल का पैसा सैंक्शन्स कमिटी द्वारा निर्धारित कानूनों के खिलाफ है।
वैसे भारत ही नहीं अमेरिका, इंग्लैंड, रूस, फ्रांस और जर्मनी भी लखवी की रिहाई को लेकर चिंतित हैं और इन सबने पाकिस्तान से उसे दुबारा गिरफ्तार करने को कहा है।
55 साल का लखवी लश्कर ए तैयबा के चीफ हाफिज सईद का रिश्तेदार है। लखवी को 25 नवंबर 2009 को गिरफ्तार किया गया था लेकिन 9 अप्रैल को कोर्ट ने उसे रिहा कर दिया।
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