नई दिल्ली:
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के राजनीतिक रुख अपनाने को लेकर टीम अन्ना के विभाजन के बावजूद अन्ना हजारे ने इस आंदोलन के दौरान जुटाई गई धनराशि लौटाने की अरविंद केजरीवाल की पेशकश नहीं स्वीकार करने का फैसला किया है।
टीम के दो फाड़ होने के बाद यहां बैठक में हजारे के समर्थकों ने उनसे केजरीवाल की अगुवाई वाले पब्लिक कॉज फाउंडेशन से धनराशि वापस मांगे जाने की अपील की थी लेकिन हजारे ने उनसे कहा कि वह पहले ही इसे नामंजूर कर चुके हैं।
बैठक में शामिल सूत्रों ने दावा किया कि हजारे ने बैठक को बताया कि केजरीवाल ने राशि वापस करने की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने उनसे उसे अपने पास रखने को कहा।
स्वयंसेवकों का मत था कि आंदोलन चलाने के लिए उन्हें धन की जरूरत होगी लेकिन हजारे ने कहा कि उन्हें नया आंदोलन खड़ा करना है और धन का मुद्दा लड़ाई का मुद्दा नहीं होना चाहिए। राजनीतिक पार्टी के गठन के सवाल पर केजरीवाल से 19 सितंबर को औपचारिक तौर पर राहें अलग होने के बाद इस मुद्दे पर अगले दिन महाराष्ट्र सदन में बैठक हुई जिसमें किरण बेदी भी शरीक हुईं।
टीम के दो फाड़ होने के बाद यहां बैठक में हजारे के समर्थकों ने उनसे केजरीवाल की अगुवाई वाले पब्लिक कॉज फाउंडेशन से धनराशि वापस मांगे जाने की अपील की थी लेकिन हजारे ने उनसे कहा कि वह पहले ही इसे नामंजूर कर चुके हैं।
बैठक में शामिल सूत्रों ने दावा किया कि हजारे ने बैठक को बताया कि केजरीवाल ने राशि वापस करने की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने उनसे उसे अपने पास रखने को कहा।
स्वयंसेवकों का मत था कि आंदोलन चलाने के लिए उन्हें धन की जरूरत होगी लेकिन हजारे ने कहा कि उन्हें नया आंदोलन खड़ा करना है और धन का मुद्दा लड़ाई का मुद्दा नहीं होना चाहिए। राजनीतिक पार्टी के गठन के सवाल पर केजरीवाल से 19 सितंबर को औपचारिक तौर पर राहें अलग होने के बाद इस मुद्दे पर अगले दिन महाराष्ट्र सदन में बैठक हुई जिसमें किरण बेदी भी शरीक हुईं।
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