
संविधान में अध्यादेश जारी करने का अधिकार सरकार को विशेष परिस्थितियों में ही दिया गया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की इस नसीहत के दो दिन के अंदर सरकार ने बजट सत्र के दौरान हाल के महीने में जारी सभी अध्यादेशों को कानून में बदलने के लिए रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है।
बुधवार को कैबिनेट की संसदीय मामलों की समिति की बैठक में ये फैसला किया गया कि सरकार बजट सत्र के दौरान प्रमुखता से इस दिशा में आगे पहल करेगी। एनडीए सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि सभी अध्यादेशों को कानून में बदलने से जुड़ी कानूनी औपचारिकताएं 1 फरवरी तक पूरी कर ली जाएंगी जिससे की बजट सत्र के शुरू होने तक सभी मंत्रालय पूरी तरह से तैयार हो जाएं।
कैबिनेट समिति ने बुधवार को तय किया कि इस बार बजट सत्र 23 फरवरी को बुलाया जाए। रेल बजट 26 फरवरी, आर्थिक सर्वे 27 फरवरी और आम बजट 28 फरवरी को पेश होगा। बजट सत्र का पहला चरण 23 फरवरी से 20 मार्च तक होगा। फिर एक महीने की रिसेस के बाद 20 अप्रैल से बजट सत्र का दूसरा चरण होगा। बजट सत्र 8 मई तक चलेगा।
पिछले शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य सभा में विपक्ष के गतिरोध की वजह से एनडीए सरकार कई महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार से जुड़े विधेयक पारित कराने में नाकाम रही थी। अब बजट सत्र के दौरान तैयारी नए सिरे से हाल में जारी अध्यादेशों को पारित कराने की होगी।
लेकिन आज बड़ा सवाल ये है कि क्या विपक्ष इसके लिए तैयार होगा? हाल के दिनों में ज़मीन अधिग्रहण अध्यादेश के मसले पर विपक्ष फिर लामबंद होता दिख रहा है। आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के लिए हज़ारों एकड़ ज़मीन अधिग्रहित करने के सवाल पर सोमवार को कांग्रेस, जेडी-यू और लेफ्ट के नेता दिल्ली में एक ही मंच पर दिखे। मुश्किल ये है कि राष्ट्रपति के आगाह करने के बाद एनडीए सरकार अध्यादेश को कानून में बदलने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ना चाहती है, जबकि विपक्षी दल इसके खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। ऐसी में राज्य सभा में बहुमत के अभाव में एनडीए सरकार के महत्वपूर्ण विधेयकों पर राजनीतिक सहमति बनाना बेहद मुश्किल चुनौती साबित हो सकता है।
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