कुशीनगर:
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही प्रदेश में काबिल डॉक्टरों के बल पर स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने का दावा कर रही है लेकिन कुशीनगर जनपद के संयुक्त जिला चिकित्सालय में सीएमओ का प्राइवेट ड्राइवर भी मरीजों का इलाज कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह ड्राइवर मामूली दवा देने के साथ ही मरीजों को ड्रिप भी चढ़ा रहा है।
लापरवाही की हद तो तब दिखी जब हॉस्पीटल में बेहोशी की हालत में आई महिला को बिना स्ट्रेचर के चार महिलाए उठाकर एक वार्ड से दूसरे वार्ड में ले जा रही थीं जबकि हॉस्पीटल में स्ट्रेचर की व्यवस्था है। यही नहीं, जिस वार्डब्वाय को वार्डों की देखभाल और मामूली मरहम पट्टी के लिए रखा जाता है वे भी बेख़ौफ़ होकर मरीजों को इंजेक्शन और ड्रिप चढ़ाते हैं।
मजे की बात यह है कि इमरजेंसी वार्ड जहां 24 घंटे चिकित्सक मौजूद होना चाहिए वे भी वार्ड से गायब रहते हैं और इन्हीं ड्राइवर और वार्ड ब्याय के भरोसे जिला अस्पताल में इमरजेंसी की व्यवस्था चल रही है।
प्रदेश सरकार ने अपने चुनावी वादे में गंभीर बीमारी का इलाज का वादा किया था लेकिन प्रदेश के चिकित्सालयों में सामान्य बीमारियों का इलाज ड्राइवरों और वार्ड ब्यायों के सहारे चल रहे हैं तो गंभीर बीमारी के मरीजों का क्या हाल होगा।
लापरवाही की हद तो तब दिखी जब हॉस्पीटल में बेहोशी की हालत में आई महिला को बिना स्ट्रेचर के चार महिलाए उठाकर एक वार्ड से दूसरे वार्ड में ले जा रही थीं जबकि हॉस्पीटल में स्ट्रेचर की व्यवस्था है। यही नहीं, जिस वार्डब्वाय को वार्डों की देखभाल और मामूली मरहम पट्टी के लिए रखा जाता है वे भी बेख़ौफ़ होकर मरीजों को इंजेक्शन और ड्रिप चढ़ाते हैं।
मजे की बात यह है कि इमरजेंसी वार्ड जहां 24 घंटे चिकित्सक मौजूद होना चाहिए वे भी वार्ड से गायब रहते हैं और इन्हीं ड्राइवर और वार्ड ब्याय के भरोसे जिला अस्पताल में इमरजेंसी की व्यवस्था चल रही है।
प्रदेश सरकार ने अपने चुनावी वादे में गंभीर बीमारी का इलाज का वादा किया था लेकिन प्रदेश के चिकित्सालयों में सामान्य बीमारियों का इलाज ड्राइवरों और वार्ड ब्यायों के सहारे चल रहे हैं तो गंभीर बीमारी के मरीजों का क्या हाल होगा।