
प्रतीकात्मक चित्र
नई दिल्ली:
सरकार ने कहा है कि नियमों के अनुसार डॉक्टरों को इलाज के पहले ही मरीज को फीस के बारे में बताना चाहिए, न कि इलाज के बाद में. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया कि भारतीय चिकित्सा परिषद (पेशेवर आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम 2002 के अनुसार, डॉक्टर को अपने चैंबर के बोर्ड पर और जिस अस्पताल में वह विजिट करते हैं वहां अपनी फीस और अन्य प्रभार शुल्कों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना चाहिए.
एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने बताया कि इसके अलावा, सेवाएं प्रदान करने से पहले डॉक्टर को अपनी फीस के बारे में बताना चाहिए न कि ऑपरेशन या उपचार के बाद या उस दौरान. ऐसी सेवाओं के लिए प्राप्त पारिश्रमिक फॉर्म में वर्णित होना चाहिए और सेवाएं देते समय मरीज को साफ तौर पर राशि बताई जानी चाहिए.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने बताया कि इसके अलावा, सेवाएं प्रदान करने से पहले डॉक्टर को अपनी फीस के बारे में बताना चाहिए न कि ऑपरेशन या उपचार के बाद या उस दौरान. ऐसी सेवाओं के लिए प्राप्त पारिश्रमिक फॉर्म में वर्णित होना चाहिए और सेवाएं देते समय मरीज को साफ तौर पर राशि बताई जानी चाहिए.
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