कोरोनावायरस (Coronavirus) के फैलाव को धीमा करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आती जा रही है और आशंकाओं से कहीं ज़्यादा तकलीफदेह साबित हो रही है, भले ही माना जा रहा है कि अगले साल सब कुछ ठीक हो सकता है.
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा साल की शुरुआत में कोरोनावायरस के चलते चीन में हुई क्षति को ध्यान में रखकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी संभावनाओं की घोषणा किए जाने से पहले ही कुछ आंकड़े आने शुरू हो गए हैं. फ्रांस के केंद्रीय बैंक ने बुधवार को अपने आकलन में कहा कि साल के पहले तीन महीनों में देश की अर्थव्यवस्था लगभग छह प्रतिशत सिकुड़ जाएगी, जो दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से उनके लिए बदतरीन तिमाही होगी.
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इसी बीच, जर्मनी के शीर्ष आर्थिक संस्थानों का मानना है कि दूसरी तिमाही के दौरान यूरोप की शीर्ष अर्थव्यवस्था में लगभग 10 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है. यह गिरावट उस गिरावट के मुकाबले दोगुनी होगी, जो जर्मनी ने 2009 में वैश्विक मंदी के दरान झेली थी.
ऑस्ट्रम एसेट मैनेजमेंट में अर्थशास्त्री फिलिपे वैक्टर ने कहा, "साल की पहली दो तिमाहियों में पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाएं ढहने जा रही हैं..." वैक्टर का कहना था, "ऐसी कल्पना करना नामुमकिन है कि अमेरिका उस मंदी की चपेट से बचा रह पाएगा, जिसे सारी दुनिया झेल रही है..."
इसी दौरान, विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने भी बुधवार को कहा कि उनके अनुमान के मुताबिक, इस साल वैश्विक व्यापार में 13 से 32 फीसदी की गिरावट आ सकती है. WTO प्रमुख रॉबर्टो अज़ेवेडो ने चेताया कि दुनिया इस वक्त 'हमारी ज़िन्दगी की सबसे गहरी मंदी या गिरावट' का सामना कर रही है.
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