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This Article is From Jul 17, 2021

चीफ जस्टिस ने कहा, सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही जल्द ही लाइव होगी

गुजरात उच्च न्यायालय की लाइव-प्रोसीडिंग के वर्चुअल लॉन्च में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह भी शामिल हुए

चीफ जस्टिस ने कहा, सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही जल्द ही लाइव होगी
चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग होगी (फाइल फोटो).
नई दिल्ली:

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग जल्द ही शुरू हो सकती है. इसे सक्षम करने के लिए लॉजिस्टिक्स पर काम किया जा रहा है. न्यायमूर्ति रमना ने गुजरात हाईकोर्ट की कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग के वर्चुअल लॉन्च के दौरान कहा, "सुप्रीम कोर्ट कुछ अदालतों की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू करने के बारे में सोच रहा है." हाईकोर्ट सोमवार से लाइव हो गया है.

चीफ जस्टिस ने कहा कि वर्तमान में, लोगों को मीडिया के माध्यम से अदालती कार्यवाही के बारे में जानकारी मिलती है. उन्होंने कहा कि "वास्तव में, प्रसारण के एजेंटों द्वारा अदालतों की जानकारी को फ़िल्टर किया जा रहा है. इस प्रक्रिया में, कभी-कभी ट्रांसमिशन लॉस होता है, जिसके कारण संदर्भ की अनुपस्थिति के कारण पूछे गए प्रश्नों और पीठ द्वारा की गई टिप्पणियों की गलत व्याख्या होती है. निहित स्वार्थ हैं, जो संस्था को शर्मिंदा करने या बदनाम करने के लिए इन गलत व्याख्याओं को बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं."

उन्होंने कहा कि "सीधी पहुंच की कमी गलत धारणाओं के लिए जगह देती है. अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की औपचारिकता इस बीमारी का सबसे अच्छा इलाज है. सूचना के प्रसार के लिए कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग महत्वपूर्ण है जो अनुच्छेद 19 का एक पवित्र पहलू है." उन्होंने कहा कि इस तरह की सीधी पहुंच के माध्यम से लोग पूरी कार्यवाही और न्यायाधीशों की राय के बारे में प्रत्यक्ष रूप से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इससे "किसी भी शरारत के लिए बहुत कम जगह बचती है."

जस्टिस रमना ने कहा कि "हालांकि सही दिशा में रास्ते पर हर कदम सावधानी के साथ चलना चाहिए. कभी-कभी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग दोधारी तलवार बन सकती है. हालांकि न्यायाधीशों को सार्वजनिक जांच का दबाव महसूस हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप अंततः तनावपूर्ण माहौल हो सकता है. यह न्याय व्यवस्था के लिए अनुकूल नहीं हो सकता है. एक न्यायाधीश को याद रखना चाहिए, भले ही न्याय लोकप्रिय धारणा के खिलाफ खड़ा हो, उसे संविधान के तहत ली गई शपथ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से ऐसा करना चाहिए." 

गुजरात के रहने वाले जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह भी वर्चुअल लॉन्च में शामिल हुए. इस अवसर पर न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग पारदर्शिता में वृद्धि करेगी.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, "लोग किसी विशेष मामले में रुचि रखते हैं या नहीं, लाइव-स्ट्रीमिंग से पारदर्शिता बढ़ती है. लोगों को पता चलता है कि न्यायाधीश वास्तव में काम करते हैं. न्यायाधीशों के कामकाज के बारे में गलत धारणाएं हैं. हमें छुट्टियों के लिए टारगेट किया जाता है." उन्होंने कहा कि "लाइव-स्ट्रीमिंग अब एक आवश्यकता है, महामारी समाप्त होने के बाद भी. लाइव-स्ट्रीमिंग अदालती कार्यवाही को सामने ला देगी और यह संदेश देगी कि अदालतें लोगों के लिए हैं." 

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण मामलों में अदालत की कार्यवाही को लाइव-स्ट्रीम किया जाए.

वर्चुअल लॉन्च के दौरान गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ ने कहा, "लाइव जाने के लिए साहस, आत्मविश्वास और सबसे ऊपर दृढ़ विश्वास की आवश्यकता थी. मेरे सभी भाई और बहन न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से लाइव-स्ट्रीमिंग नियमों को मंजूरी दी है."

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