
नई दिल्ली:
सीबीआई मुलायम सिंह यादव पर मेहरबान है। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई मुलायम सिंह यदाव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस बंद करने जा रही है। वह जुलाई के अंत तक सुप्रीम कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट देने की बात कर रही है।
माना जा रहा है कि यह सरकार और मुलायम के बीच एक हाथ ले दूसरे हाथ दे का मामला है। सरकार को फूड बिल पर मुलायम का समर्थन चाहिए।
मुलायम सिंह यादव फिलहाल कांग्रेस के लिए जरूरी हैं। 2014 की चुनावी बिसात की अहम बाजी उनके हाथ से तय होनी है। क्या इसीलिए सीबीआई उनके खिलाफ चल रहा केस बंद करने की सोच रही है। यह सवाल इसलिए कि यह चौथा मौका है, जब सीबीआई ने मुलायम को लेकर पलटी मारी है।
सबसे पहले 2007 में सीबीआई ने मुलायम के खिलाफ मामला बनने की बात कही।
- 1 मार्च 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा कि वह मुलायम के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच करे।
- 26 अक्टूबर 2007 को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुलायम के खिलाफ पहली नजर में मामला बनता है। इसलिए उसे एफआईआर दर्ज करने की इजाजत दी जाए।
लेकिन, सालभर बाद ही सीबीआई ने पहली पलटी मारते हुए अपना रुख बदल लिया। उसने सीधे−सीधे सरकारी दबाव की बात मान ली।
- 6 दिसंबर 2008 को सीबीआई ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने उसे प्राथमिक रिपोर्ट वापस लेने को कहा है।
- 10 फरवरी 2009 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा
ये वह दौर था जब केंद्र सरकार को मुलायम ने विश्वासमत हासिल करने में मदद की थी। मगर मार्च आते−आते सीबीआई ने दूसरी पलटी मारी।
30 मार्च 2009 को उसने कहा कि वह अपने मूल रुख पर कायम है। लेकिन, पिछले तीन साल केंद्र सरकार और मुलायम के बीच राजनीतिक मजबूरियों वाली दोस्ती के साल रहे हैं। इसलिए सीबीआई को तीसरी बार पलटी मारनी पड़ रही है। इस बार उसका तर्क है, मुलायम और अखिलेश की आय में हुई बढ़ोतरी कर्ज के कारण दिख रही है। दिलचस्प यह है कि सीबीआई के मुताबिक यह कर्ज उनके रिश्तेदारों ने तोहफे के तौर पर उन्हें दिए।
लेकिन, याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि अभी तो उसकी गवाही तक नहीं हुई है।
माना जा रहा है कि सरकार यह मामला इसलिए भी बंद कराना चाहती है कि उसे खाद्य सुरक्षा बिल पर मुलायम का समर्थन चाहिए। दिलचस्प यह भी है कि सात साल से चल रहे इस मामले में अब तक एफआईआर की नौबत नहीं आई है।
माना जा रहा है कि यह सरकार और मुलायम के बीच एक हाथ ले दूसरे हाथ दे का मामला है। सरकार को फूड बिल पर मुलायम का समर्थन चाहिए।
मुलायम सिंह यादव फिलहाल कांग्रेस के लिए जरूरी हैं। 2014 की चुनावी बिसात की अहम बाजी उनके हाथ से तय होनी है। क्या इसीलिए सीबीआई उनके खिलाफ चल रहा केस बंद करने की सोच रही है। यह सवाल इसलिए कि यह चौथा मौका है, जब सीबीआई ने मुलायम को लेकर पलटी मारी है।
सबसे पहले 2007 में सीबीआई ने मुलायम के खिलाफ मामला बनने की बात कही।
- 1 मार्च 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा कि वह मुलायम के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच करे।
- 26 अक्टूबर 2007 को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुलायम के खिलाफ पहली नजर में मामला बनता है। इसलिए उसे एफआईआर दर्ज करने की इजाजत दी जाए।
लेकिन, सालभर बाद ही सीबीआई ने पहली पलटी मारते हुए अपना रुख बदल लिया। उसने सीधे−सीधे सरकारी दबाव की बात मान ली।
- 6 दिसंबर 2008 को सीबीआई ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने उसे प्राथमिक रिपोर्ट वापस लेने को कहा है।
- 10 फरवरी 2009 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा
ये वह दौर था जब केंद्र सरकार को मुलायम ने विश्वासमत हासिल करने में मदद की थी। मगर मार्च आते−आते सीबीआई ने दूसरी पलटी मारी।
30 मार्च 2009 को उसने कहा कि वह अपने मूल रुख पर कायम है। लेकिन, पिछले तीन साल केंद्र सरकार और मुलायम के बीच राजनीतिक मजबूरियों वाली दोस्ती के साल रहे हैं। इसलिए सीबीआई को तीसरी बार पलटी मारनी पड़ रही है। इस बार उसका तर्क है, मुलायम और अखिलेश की आय में हुई बढ़ोतरी कर्ज के कारण दिख रही है। दिलचस्प यह है कि सीबीआई के मुताबिक यह कर्ज उनके रिश्तेदारों ने तोहफे के तौर पर उन्हें दिए।
लेकिन, याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि अभी तो उसकी गवाही तक नहीं हुई है।
माना जा रहा है कि सरकार यह मामला इसलिए भी बंद कराना चाहती है कि उसे खाद्य सुरक्षा बिल पर मुलायम का समर्थन चाहिए। दिलचस्प यह भी है कि सात साल से चल रहे इस मामले में अब तक एफआईआर की नौबत नहीं आई है।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
मुलायम सिंह यादव, आय से अधिक संपत्ति, सीबीआई जांच, सुप्रीम कोर्ट, Mulayam Singh Yadav, Disproportionate Property, CBI Inquiry, Supreme Court