
मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्यसभा की एकमात्र सीट जीतने के बाद अब राज्य में सरकार बचाने की कवायद शुरू कर दी है. वहीं, विपक्षी पार्टी कांग्रेस नया गठबंधन सेक्युलर प्रोग्रेसिव फ्रंट (SPF) खड़ा करने में जुटी है. सरकार बचाने की कोशिश के रूप में बीजेपी ने पूर्वोत्तर के अपने संकटमोचक माने जाने वाले हेमंत बिस्व शर्मा को मैदान में उतार दिया है. वह रविवार रात को मणिपुर की राजधानी इम्फाल पहुंचे. वह अकेले नहीं हैं. उनके साथ मेघालय के मुख्यमंत्री और एनपीपी के नेता कोनार्ड संगमा भी हैं.
बीजेपी और एनपीपी दोनों पार्टियों से जुड़े सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया, "दोनों नेता बीजेपी और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) की मणिपुर इकाई के बीच की खाई को पाटने की कोशिश करेंगे. इन मतभेदों की वजह से ही एनपीपी के चार विधायकों ने पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था."
हालांकि, एनपीपी सूत्रों ने कहा कि संगमा की चिंता सिर्फ बीजेपी ही नहीं है बल्कि अपनी पार्टी के अंदर उपजी स्थिति भी है. उन्हें उम्मीद है कि इम्फाल यात्रा के दौरान वह मणिपुर इकाई में चल रहे संकट को काबू करने में कामयाब रहेंगे.
माना जा रहा है कि शर्मा और संगमा ने विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ कई बैठकें की हैं. कहा जा रहा है कि संगमा अपने विधायकों को मानने की कोशिश कर रहे हैं कि वे सरकार से समर्थन वापस लेने और कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन में शामिल होने के फैसले पर बार फिर से विचार करें.
पार्टी सूत्रों ने कहा कि एनपीपी ने बीजेपी लीडरशीप और हेमंत बिस्व शर्मा से स्पष्ट कर दिया कि राज्य नेतृत्व में बदलाव की मांग से कम पर समझौता होने की उम्मीद नहीं है.
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